बिछड़ के तुमसे ख़िज़ाँ हो गए तो ये जाना,
हमारे हुस्न में सब दिलकशी तुम्हारी थी !
गिला नहीं कि मेरे हाल पर हँसी दुनिया,
गिला तो ये है कि पहली हँसी तुम्हारी थी !
~ असद
वफ़ा का ज़िक्र तक महँगा पड़ेगा,
हमें इस तौर भी जीना पड़ेगा ।
तुम्हारी याद ओढ़े सो रहा हूँ,
तुम्हें अब ख़्वाब में मिलना पड़ेगा।
हमारी आँख भीगी जा रही है,
हमें अब ज़ोर से हंसना पड़ेगा।
अभी तो इश्क़ में दिल ही दुखा है,
अभी इस राह में क्या क्या पड़ेगा।
सग़ीर आलम
अबके चेहरे पे वो दरार आई,
आईना बन गया तमाशाई !
अपना दिल जैसे दुखती आँख कोई,
उसकी यादें कि जैसे पुरवाई !
एक मुद्दत के बाद हमने 'असद'..
उसको देखा.. तो अपनी याद आई!