सतयुग में सतसुकृत रूप, त्रेतायुग में मुनीन्द्र रूप, द्वापर में करुणामय रूप और कलियुग में कबीर रूप—यह परमात्मा की वही दिव्य लीला है जो मानव कल्याण के लिए युग-युग में चलती रही है।
#परमात्मा_चारों_युगमें_आतेहैं
God Kabir In 4Yugas
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ज्ञानी गरुड़ है दास तुम्हारा, तुम बिन नाहीं जीव निस्तारा। इतना कह गरुड़ चरण लिपटाया, शरण लेवो अविगत राया ।।
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कबीर साहेब चारों युगों में अलग-अलग नामों से प्रकट होते हैं। सतयुग में कबीर परमेश्वर, विष्णु जी के वाहन पक्षीराज गरुड़ से मिले और उन्हें वास्तविक ज्ञान से परिचित कराया:
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Almighty God Kabir manifests Himself in all the four eras (Yugas).
Almighty Kabir incarnated across the four cosmic eras under
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जपो रे मन सतगुरु नाम कबीर।। जपो रे मन परमेश्वर नाम कबीर। चार दाग से सतगुरु न्यारा, अजरो अमर शरीर। दास मलूक सलूक कहत हैं, खोजो खसम कबीर।।
- कबीर सागर, अध्याय अगम निगम बोध, पृष्ठ 45
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कलयुग में धर्मदास जी को मिले गुरु नानक जी को मिले रामानंद जी को मिले गीता साहब को मिले गरीब दास जी को मिले अनेकों प्रमाण है जिनको परमात्मा जिंदा रूप में मिले हर युग का अलग-अलग प्रमाण है
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In Satyug, Kabir Sahib met Manu Ji as Satsukrit and tried to impart true spiritual knowledge. He also enlightened Garuda:
Gyani Garud hai das tumhara, tum bin nahin jeev nistara.
Itna kah Garud charan liptaya, sharan levo avigat raya.
God Kabir
♦️ कबीर परमात्मा चारों युगों में अलग-अलग नामों से आते हैं। 'कबीर सागर' (बोध सागर खंड) के अध्याय 'भवतारण बोध', पृष्ठ 55 में:
सतयुग में सतसुकृत कह टेरा, त्रेता नाम मुनीन्द्र मेरा।
द्वापर में करुणामय कहाया, कलयुग नाम कबीर धराया।।
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कबीर परमात्मा के चारों युगों में आने के ऐतिहासिक व आध्यात्मिक प्रमाण मिलते हैं। सतयुग में कबीर जी 'सतसुकृत' नाम से आकर पक्षीराज गरुड़, कागभुशुंडि और मनु आदि ऋषियों से मिले। त्रेतायुग में 'मुनीन्द्र' ऋषि के रूप में उन्होंने
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कबीर परमेश्वर केवल कलियुग में ही नहीं आए, बल्कि वे चारों युगों में प्रकट होते हैं। महाभारत युद्ध के उपरांत पांडवों ने श्रीकृष्ण जी के सान्निध्य में जो धर्म यज्ञ किया था, उसे परमात्मा कबीर जी ने अपने भक्त सुपच सुदर्शन के रूप में आकर पूर्ण करवाया था:
एक गलत बता दो मेरी मैंने गीता, वेद, पुराण से न्यारी बात बताई हो उनकी एक भी गीता, वेद, पुराण के अनुसार साधना नहीं है
~ संत रामपाल जी महाराज #SantRampalJiMaharaj#santrampaljiquotes
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त्रेतायुग में 'मुनीन्द्र' ऋषि के रूप में उन्होंने रानी मंदोदरी, विभीषण, नल-नील और हनुमान जी आदि को दर्शन दिए। द्वापरयुग में 'करुणामय' रूप में वे सुपच सुदर्शन और रानी इन्द्रमती से मिले, तथा कलियुग में 'कबीर' नाम से प्रकट होकर गुरु नानक देव जी..
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धन-धन सतगुरु सत कबीर, भक्त की पीर मिटाने वाले।
रहे नल-नील यत्न कर हार, तब सतगुरु से करी पुकार ।
जा सत रेखा लिखी अपार, सिंधु पर शिला तिराने वाले ।।
समुद्र पर सेतु बनाने वाले कबीर परमेश्वर जी ही थे जिनकी शक्ति अपार है।
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♦️ द्वापरयुग में 'करुणामय' रूप में आए कबीर साहेब ने रानी इन्द्रमती की रक्षा की:
डसी सर्प नै जब जाय, पुकारी इन्द्रमति अकुलाय।
आप ने तुरंत करी सहाय, बहरूली मंत्र सुनाने वाले।।
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♦️ कबीर परमात्मा के चारों युगों में आने के ऐतिहासिक व आध्यात्मिक प्रमाण मिलते हैं। सतयुग में कबीर जी 'सतसुकृत' नाम से आकर पक्षीराज गरुड़, कागभुशुंडि और मनु आदि ऋषियों से मिले। त्रेतायुग में 'मुनीन्द्र' ऋषि के रूप में उन्होंने रानी मंदोदरी, विभीषण,