Not surprising. Lying as a political tactic was taught to Indian Leftists by their Guru syphilis-dead Lenin who notoriously said, “We must hang the convict’s badge on our detractors”.
🌹आज सुप्रीमकोर्ट में वीर सावरकर को "माफ़ी वीर" कहने के मानहानि केस में जज ने कहा ,कि अगर सिर्फ़ चिट्ठियों के आधार पर ये कहा जा रहा है कि वीर सावरकर "माफ़ी वीर" हैं। तो जज साहब ने मोहनदास करमचंद गांधी के ब्रिटिश लॉर्ड और वायसराय को लिखे 12 खत दिखाते हुए राहुल गांधी के वकील अभिषेक मनु सिंघवी से पूछा कि क्या आपके क्लाइंट राहुल गांधी को पता है ,कि मोहनदास करमचंद गांधी ब्रिटिश वायसराय को लिखे हर खत के नीचे
आपका वफ़ादार सेवक
लिखते थ�� और अंग्रेजों से हर महीने ₹.1200 सैलरी लेते थे..
तो क्या मोहनदास करमचंद गांधी को अंग्रेजों का सेवक माना जाएगा और फिर ये गांधी भी देश का गद्दार है..
ये सुनकर वकील मनु सिंघवी चुप हो गए..
अगर ये 12 चिट्ठियां सच हैं, तो गांधी पक्का गद्दार थे, अंग्रेजों के एजेंट थे..
अब ये मामला कोर्ट से भी सर्टिफाइड हो गया है कि सावरकर माफी वीर नहीं थे बल्कि कांग्रेस के बापू मोहन दास करमचंद गांधी ,उर्फ भारत बंटवारे के सूत्रधार, अंग्रेजों के चमचे और गुलाम थे।
अब शायद कांग्रेस के चमचों को शर्म आए और वे चुल्लू भर पानी में डूब के मर जाए या माफी मांगे।