स्कूलों में टीचर से कहा जाता है कि आप बच्चों पर छड़ी नहीं चला सकते। उन्हीं बच्चों पर पुलिस लाठी चला रही थी। शहर देख रहा था। बच्चों के माँ बाप और उनके व्हाट्स एप अंकिल चुपचाप देख रहे थे। पेपर लीक करने वाले आ�� पार्टी मना रहे होंगे। मनाओ तुम लोग। अभी धर्म का मुद्दा खोजा जा रहा होगा ताकी गोदी ऐंकर धर्म रक्षक बन कर चिल्लाने आ जाएँ। जनता को पता है गोदी माल��क, गोदी ऐंकर, गोदी संपादक अपने पेशे के धर्म की रक्षा कभी कर ही नहीं सकते।अख़बारों की हेडलाइन कैसे मैनेज होगी? लिख कर दे दिया गया है या ख़ुद से लिख लेंगे?
@iamnarendranath सरकार के ताबूत में ये कहीं आखिरी कील न हो जाये अभी भी समय है संभल जाए और हिन्दू मुस्लिम की राजनीति से उठकर बच्चों के भविष्य के बारे में भी सोचें।
शांतिपूर्ण विरोध एक अटूट और मौलिक अधिकार है।
भारत के निर्दोष छात्रों पर हमला करने के आदेशों का आँखें बंद करके पालन करने वाले हर पुलिस अधिकारी और सरकारी कर्मचारी ये बात ध्यान रखें:
संविधान ही आपका मालिक है।
सत्ता हमेशा के लिए नहीं रहती।
जवाबदेही ज़रूर तय की जाएगी।
Peaceful protest is a sacred and fundamental right.
Every police officer and govt official blindly following orders to attack India’s innocent students should keep in mind:
The Constitution is your master.
Power is not permanent.
Accountability will follow.