BJP की लोकतांत्रिक चोरी और डकैती की भूख इतनी बढ़ चुकी है कि विपक्षी विधायक-सांसद और मुख्यमंत्री तोड़ने व सरकारें चोरी करने के बाद अब ये विपक्षी पा���्टियों का नाम, चुनाव चिह्न और बै��क खातों को भी लूट रहे है।
बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था की रूह कंपकपाने वाली तस्वीर! टोर्च की रोशनी में गर्भवती का ऑपरेशन!
बाढ़ और संकट के समय बिहार का दौरा नहीं करने वाले तथा केवल चुनावों में ही बिहार आकर बिहार को ही बदनाम एवं अपमानित करने प्रधानमंत्री जी बिहार आएंगे और फिर 21 सालों की एनडीए सरकार के जंगलराज का रोना रोएंगे।
सीवर टूटा पड़ा है… बाक़ी सब ठीक है
गड्ढा खुला पड़ा है… बाक़ी सब ठीक है
स्ट्रीट लाइट नहीं है… बाक़ी सब ठीक है
चेतावनी लिखी नहीं है… बाक़ी सब ठीक है
भ्रष्टाचार चरम पर है… बाक़ी सब ठीक है
सरकार जानलेवा है… बाक़ी सब ठीक है
विगत 𝟐𝟖 दिनों से बिहार बाढ़ की विभीषिका से ही नहीं बल्कि सुखाड की भी मार झेल रहा है।राज्य में 𝟑𝟓 फीसदी से कम बारिश हुई है। भीषण सूखे के कारण राज्य के लाखों हेक्टेयर जमीन में खड़ी फसलें नष्ट हो रही है। लाखों किसानों का लागत मूल्य ���ी नहीं निकल रहा। सूखे का सरकार ने अभी तक कोई आंकलन भी नहीं किया है। किसानों के सामने आजीविका का संकट है।
दूसरी तरह बिहार विनाशकारी बाढ़ से प्रभावित है। राज्य के 𝟓𝟎 लाख लोग बाढ़ प्रभावित है लेकिन फिर भी एनडीए की संवेदनहीन सरकार बाढ़ पीड़ितों की कोई सुध नहीं ले रही। खानापूर्ति के लिए नाम मात्र की गिनी चुनी कुछ सामुदायिक रसोई और राहत शिविर शुरू किए थे वो भी फंड की कमी के चलते 𝟐-𝟒 दिन में ही बंद कर दिए गए।
अब बताइए जरा, जिन गरीबों के मकान गिर गए, जिनके घरों में पानी भरा है, जिनकी दिनचर्या का सामान जैसे जूते-चप्पल, कपड़े और बर्तन पानी में बह गये हैं, जिनके घरों के पास अब भी बदबूदार पानी जमा है वहाँ इस बेशर्म सरकार ने राहत शिविर बंद कर दिए है, बताइए वो बाढ़ पीड़ित इन परिस्थितियों में कहाँ जाएँगे?
सरकार के खजाने पर पीड़ितों का हक़ है लेकिन वो सारा पैसा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया? इस सरकार ने ना कोई राहत दी और ना ही कोई तिरपाल व खाने पीने का सामान?
बिहार के खजाने पर आपदा पीड़ितों का पहला हक है। 𝟐𝟎𝟏𝟓 में जब हमारी महागठबंधन की सरकार थी तब आपदा प्रबंधन और वित विभाग राजद के पास था तब हमारे राष्ट्रीय अध्य��्ष आदरणीय लालू प्रसाद जी की सलाह पर हमने बजट में यह प्रावधान कराया था कि बाढ़-सुखाड़, प्राकृतिक आपदा और संकट के समय राज्य के कुल बजट की चार फीसदी राशि को आकस्मिक निधि के रूप में उपयोग किया जा सकता है। अब आप बजट के अनुरूप हिसाब लगाइए कि बिहार की आकस्मिक निधि कितनी होगी? कहाँ गई वो राशि?
बिहार के किसानों की समस्याओं को सरकार सुन नहीं रही है। बाढ़ के कारण लगभग डेढ़ लाख हेक्टेयर में लगी धान, मक्का, ��ब्जी और केले की फसल बर्बाद हुई है। क्षतिग्रस्त फसल का कोई मुआवजा नहीं मिला है।
मेरे पत्र लिखने और लगातार बाढ़ पीड़ितों की आवाज उठाने पर दिखावटी तौर पर केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान जी को बिहार भेजा गया। अब उस दौरे पर उन्होंने क्या रिपोर्ट 𝐬𝐮𝐛𝐦𝐢𝐭 की, राहत पुनर्वास तथा नुकसान का कितना आंकलन किया इसकी कोई जान��ारी सार्वजनिक नहीं की गयी है।
प्रधानमंत्री राहत कोष जिसे कोरोना में खत्म कर पीएम केयर्स फंड (𝐏𝐌 𝐂𝐀𝐑𝐄𝐒 𝐅𝐮𝐧𝐝) बनाया गया, उस फण्ड से बिहार की मदद क्यों नहीं की गई?
गोवा, अरुणाचल प्रदेश सहित कई अन्य राज्यों को मिलाकर उनकी जितनी कुल जनसंख्या है उससे अधिक आबादी बिहार में बाढ़ से प्रभावित है लेकिन गृहमंत्री और प्रधानमंत्री को बिहार की कोई फिक्र नहीं? बिहार की कोई सहायता नहीं? क्या यह बिहार के साथ भेदभाव नहीं है?
बाढ़ के बाद भी 𝟏𝟎𝟎 करोड़ के दीये जला बाढ़ पीड़ितों का जिया जलाने वाले सत्ताधारी संवेदनहीन लोग अब अपनी एक लाख-दो लाख की सैलरी देने की प्रतीकात्मक नौटंकी कर रहे है। इन सबकी सैलरी मिलाकर कुल 𝟐-𝟑 करोड़ रुपए भी जमा नहीं होंगे। क्या 𝟓𝟎 लाख लोगों के लिए ये 𝟐-𝟑 करोड़ रुपए पर्याप्त रहेंगे?
अरे आपके अंदर हिम्मत है तो सरकार से मदद करवाओ ना? डबल इंजन सरकार इसी को कहते है क्या??
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बिहार से है और उन बेचारे की इतनी भी हैसियत नहीं कि प्रधानमंत्री से आग्रह कर सके कि हे हुज़ूर; एक बार मेरे राज्य का दौरा कर लीजिए। बिहार में प्रथम बार बीजेपी का मुख्यमंत्री बना है, बिहार से 𝟖 केंद्रीय मंत्री और एनडीए के कुल 𝟒𝟐 सांसद है, 𝟐𝟓𝟎 से अधिक 𝐌𝐋𝐀/𝐌𝐋𝐂 है लेकिन सब नकारे और निकम्मे है। जनता ऐसे नकारे जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही सुनिश्चित करेगी।
कथित डबल इंजन सरकार बाढ़ पीड़ितों को अविलंब 𝟏𝟓 हज़ार की मदद तथा सुखाड़ और बाढ़ प्रभावित किसानों का सर्वेक्षण करा उन्हें यथाशीघ्र मुआवजा दें।
मंदिर में चोरी करवानेवाले और दुखी माँ का अपमान करनेवालों की झूठी बात का भरोसा अब कोई नहीं कर रहा है।
- जिन्होंने अपने ऊपर से मुक़दमे हटवाएं हों;
- जो पूज्य शंकराचार्य जी तक पर प्रहार करवाते और आरोप लगाते हों;
- जो संविधान का विरोध करने के लिए बाबासाहेब की मूर्तियों तक को तोड़ रहे हों;
- जो अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ नाइंसाफी की हर हद पार कर गये हों;
- जिन्होंने ‘हाथरस की बेटी’ के साथ अंतिम संस्कार तक का न्याय न किया हो;
- जिनको ‘हाता नहीं भाता’;
- जिन्होंने एक युवा विधवा को जेल में तड़पाया हो;
- जो प्राध्यापक, पत्रकार व ईमानदार अधिकारी तक को अभद्र शब्दों से संबोधित करते हों;
- जिन्होंने कॉरिडोर, पुल, एक्सप्रेसवे, मंदिर, पानी की टंकी के नाम पर निर्माण में पैसे खाएं हों;
- जो अपने सत्ता सजातीयों को हर अपराध के बाद बचाते हों;
- जो जनता के टैक्स के 2.5 करोड़ रुपये हर दिन अपनी नक़ली छवि बनाने पर लुटा रहे हों;
- जो विपक्ष पर झूठे मुक़दमे लगवाते हों;
- जो अपने विरोधियों का फ़ेक एनकाउंटर करवाते हों;
- जो बुलडोज़र से लोगों के घर गिरवाते हों;
- जो स्कूलों को बंद करवा रहे हों;
- जिनकी कुर्सी खींचने के लिए उनके अपने उप ही प्रय���सरत हों;
- जिनका विरोध उनके ही विधायक करते हों;
- जिनका अपने दल के प्रधान से ही मुख्य संघर्ष हो;
- जो भ्रष्टाचार के पैसों को सोने की सिल्ली में ढलवाते हों;
- जिनकी कमीशनख़ोरी की वजह से लगातार बढ़ती कमरतोड़ महंगाई ने खाना-पीना, दवाई-इलाज, पढ़ाई सब महंगा कर दिया हो;
- जिनकी प्रशासनिक अज्ञानता और अक्षमता का लाभ अधिकारी लगातार उठा रहे हों;
- जिनके अपने मंत्री तक न्याय पाने के लिए धरने पर बैठ रह��� हों;
- जिनके समय में बिजली, पानी, सड़क जैसी बुनियादी ज़रूरतों के लिए लोग तरस रहे हों,
- जो किसानों-मज़दूरों को उनकी फसल-मेहनत का सही दाम इसलिए नहीं दिलवा रहे हों कि उनकी किसी से डील हो गई है;
- जो किसानों को खाद, सिंचाई का पानी, बिजली न दिलवा पा रहे हों;
- जो खेती को छुट्टा पशुओं से न बचा पा रहे हों;
- जो अपने प्रदेश के व्यापार-कारोबार को दूसरे राज्यों के ठेकेदारों को नीलाम कर रहे हों;
- जो जीएसटी की मार से छोटे दुकानदारों-कारख़ानों को ख़त्म करने पर उतारू हों;
- हस्तकलाओं-शिल्पकारों को विदेशी डील के माध्यम से मार रहे हों;
- जो ट्रेडिंग के बिचौलियों के लिए प्रदेश के उत्पादन को समाप्त कर रहे हों;
- जो इंवेस्टमेंट में एडवांस कमीशन खाते हों,
- जो कोर्ट में नौकरी-भर्ती फँसाकर, लेटरल एंट्री, संविदा, नॉट फाउंड सूटेबल के माध्यम से आरक्षण मार रहे हों;
- जिन्होंने प्रतिभावानों, हुनरमंदों के यश भारती जैसे सम्मान और सम्मान राशि बंद कर दी हो;
- जो स��कारी संपत्ति बेच रहे हों;
- जिनका शासन��ाल महिलाओं के विरुद्ध अपराध व हिंसा में नंबर वन हो;
- जिनके समय में ‘हिरासत में मौतों’ का रिकॉर्ड बना हो;
- जिनके समय में माफ़िया नहीं बल्कि क़ानून-व्यवस्था ही प्रदेश छोड़कर भाग गई हो और ‘क्राइम के ख़िलाफ़ ‘ज़ीरो-टॉलरेंस’ का दावा ही ‘ज़ीरो’ हो गया हो;
- जिनके भ्रष्ट शासन में ‘हथेली गरम, पुलिस नरम’ का फ़ार्मूला जनता में लोकप्रिय हो गया हो;
- जिनके शासनकाल में आईपीएस फ़रार हुआ हो और थाने पर छापे पड़े हों;
- जिनके समय में ‘कोडीन भाई’ और ‘वनस्पतिगंज’ जैसे सीरियल बनने की चर्चा हो;
- जिनके समय में भूमाफ़ियाओं, क़ब्ज़ाजीवियों, अवैध खननवालों, जमाख़ोरों, मिलावटखोरों का बोलबाला हो;
- जो पीडीए समाज के लोगों के आवास गंगा जल से धुलवाते हों; मंदिर-चौराहे-मंच तक का शुद्धीकरण करवाते हों;
- जो पीडीए समाज के लोगों से मिलने से पहले उनको साबुन से नहलवाते हों;
- जो ‘पीडीए’ पर अत्याचार करवाकर मन-ही-मन मुस्कुराते हों;
- जिनक�� समय में शिक्षक, शिक्षार्थी, शिक्षामित्र, आशा-आँगनबाड़ी-सहायिका, चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी, पुरानी पेंशन की मांग करनेवाले वरिष्ठ नागरिक, 1090 व 69000 वाले, UPSSSC व अन्य भर्ती व सैन्यभर्तीवाले, टीईटीवाले, वकील, पेशेवर, डिलेवरी पर्सन, बीएलओ, प्रधान और सभी विभागों के ईमानदार लोग उपेक्षित-उत्पीड़ित व परेशान हों;
- जिनके समय में डबल इंजन की आपसी टकराहट में उत्तर प्रदेश पिस रहा हो;
- जिनके अपने भाषण-संबोधन में अपनी कोई बात कहने को नहीं हो;
ऐसे लोगों की बातों का अब कोई असर नहीं हो रहा है क्योंकि वो ख़ुद दिन भर किसी के असर में रहते हैं।
जनता अब उनको सुनने के मूड में नहीं है।
बिहार गंभीर रूप से बाढ़ और सुखाड़ से प्रभावित है। लाखों हेक्टेयर में खड़ी फसलें नष्ट हो रही है। भीषण सूखे और बाढ़ की दोहरी मार से प्रदेश के लाखों किसान त्राहिमाम कर रहे है।
बिहार में प्रथम बार बीजेपी का 𝐂𝐌 बना है, 𝐁𝐉𝐏 के राष्ट्रीय अध्यक्ष बिहार से है। बिहार से 𝟖 केंद्रीय मंत्री और एनडीए के कुल 𝟒𝟐 सांसद है, 𝟐𝟓𝟎 से अधिक 𝐌𝐋𝐀/𝐌𝐋𝐂 है लेकिन सब न��ारे और निकम्मे है।
राज्य के 𝟓𝟎 लाख लोग बाढ़ प्रभावित है लेकिन फिर भी प्रधानमंत्री और एनडीए की संवेदनहीन सरकार बाढ़ पीड़ितों की कोई सुध नहीं ले रही।
कथित डबल इंजन सरकार बाढ़ पीड़ितों को अविलंब 𝟏𝟓 हज़ार की मदद तथा सुखाड़ एवं बाढ़ प्रभावित किसानों का सर्वेक्षण करा यथाशीघ्र उन्हें मुआवजा दें।
जेन ज़ी ने दिखा दिया है कि भाजपा का विरोध इस हद तक था कि उन्हें दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ क��� चुनाव भी घपले से जीतना पड़ा।
जब निर्दलियों से दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी हार गई हो, तो उसकी हालत युवाओं के बीच कितनी जर्जर है ये कहने की ज़रूरत नहीं है। दरअसल भाजपा सारे पद हारी है। भाजपा समर्थित प्रत्याशी झूठेलसर्टिफ़िकेट से जीते हैं, सच्ची मतगणना से नहीं।
भाजपा के ऊपर अपनी नैतिक जीत अर्जित करने वाले विपक्ष के सभी प्रत्याशियों को हार्दिक बधाई। इसी अन्याय और भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ हम सबको एकजुट होना होगा तभी बदलाव आएगा।
@visheshyadavD
#DUSU
#delhiuniversity
#DUElectionresult
बिहार को बीजेपी-एनडीए ने शर्मसार किया है। सब शर्मिंदा है। जमुई कांड पर सरकार के लोग निम्नस्तरीय बयान दे रहे है।
जब ज���ुई कांड हुआ तब सम्राट चौधरी जातीय सम्मेलन कर रहे थे। #Bihar #Crime #Shame
देश पर एक system का कब्ज़ा है - परत दर परत।
कौन है ये सिस्टम?
RSS और "हम दो, हमारे दो" की अगुवाई में गिनती के लोगों ने मिल कर भारत की हर संस्था पर अपना नियंत्रण कर लिया है।
सरकार हो, व्यापार हो, शिक्षा हो, स्वास्थ्य हो, खेल हो, मीडिया हो, न्यायपालिका हो, चुनाव आयोग हो या bureaucracy - इस सिस्टम में ���ुनर नहीं, पैसा और पहुंच मायने रखता है।
इस क़ब्ज़े के खिलाफ, भ्रष्टाचार के खिलाफ, अन्याय के खिलाफ छात्रों की आवाज़ ही सिस्टम के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।
इसीलिए system को students से खतरा है - क्योंकि वो सवाल पूछते हैं, जवाबदेही मांगते हैं।
इसी डर से सिस्टम छात्र नहीं, अंधभक्त चाहता है - छात्रों को प्रताड़ित करता है, अंधभक्त को बढ़ावा देता है, ताकि कोई सवाल न उठे और मनमानी चलती रहे।
#ChhatronKiGoonj
बिहार में अराजक स्थिति उत्पन्न हो चुकी है। ���िहार में अब कहीं भी, कभी भी, कोई भी छात्रा और महिला सुरक्षित नहीं है। गुंडे अपराधी अब दिन दहाड़े स्कूलों, कॉलेज और घरों में घुसकर अपराध कर रहे है।
महिलाओं को 10 हज़ार रूपया नगद देकर और चुनाव बाद दो लाख ₹ ओर देने का वादा करने वाले प्रधानमंत्री ऐसी घटनाओं पर मौनी बाबा बन चुके है। एनडीए सरकार में महिलाओं, छात्रों, गरीबों और दलितों पर अत्याचार में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है।
बिहार का खजाना लुटाकर तथा महिलाओं को 2 लाख रुपए देने का लालच देकर श्री नीतीश कुमार तो चार महीने में ही अपना झोला-झंडा उठाकर चल दिए।
विधानसभा चुनाव के अंतिम 35 दिनों में बिहार के खजाने से ही एक बीमार मुख्यमंत्री से 41 हज़ार करोड़ रुपए बंटवाकर तथा तंत्र व यंत्र से विजय हासिल कर घमंड में डूबे बीजेपी के दो शीर्ष नेता नौसिखिए हाथों में बिहार की बागडोर देकर, पता नहीं बिहार से किस जुर्म का बदला ले रहे है?
बिहार के इस हालात के अकेले ज़िम्मेवार प्रधानमंत्री श्रीमान @narendramodi जी हैं। भाजपा और उनकी पिछलग्गु पार्टियों को ऐसी घटनाओं पर शर्म भी नहीं आती।
कहने को ‘राष्ट्रीय अध्यक्ष’ हैं
अपनी पार्टी म���ं ही ये विपक्ष हैं
जो बन सुरंगजीवियों के एजेंट
अपनी लीडरशिप को मारे डेंट
महाजोड़ी के विरुध्द करें काम
वो यू.पी. आकर दे रहे हैं ज्ञान!
सेट कर दी इन्होंने अपनी टोली
टिकट के नाम पर भर रहे झोली
जो ख़ुद हार गये थे ‘अपना बूथ’
जिन्होंने पिया ‘अपमान का घूंट’
अपने पद से भी बड़े हैं इनके बोल
अपने पार्टी पर ही बन गये ये बोझ
अब नये अध्यक्ष की जारी है खोज
बिहार में ध्वस्त कानून-व्यवस्था और बेखौफ अपराधियों का खौफनाक चेहरा!
जमुई से एक झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जहाँ बेखौफ अपराधियों ने एक नाबालिग लड़की और लड़के के साथ गंभीर दुर्व्यवहार किया। वीडियो में साफ दिख रहा है कि पीड़ित बच्ची हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाती रही, गुहार लगाती रही, लेकिन अपराधियों को ज़रा भी रहम नहीं आया।
प्रदेश में बच्चियाँ और महिलाएँ लगातार असुरक्षित महसूस कर रही हैं। सवाल यह है कि प्रशासन और सरकार कब तक इस बदहाल लॉ एंड ऑर्डर पर खामोश रहेंगे?
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बिहार में खूनी राज! विगत दिनों में जेल में बंद चौथे कैदी की हत्या। जब प्रदेश का मुख्यमंत्री खुद 7 हत्याओं में आरोपित रहा हो तब न्याय की उम्मीद किसके करिएगा।
सासाराम की मंडल कारा में विचाराधीन कैदी 26 वर्षीय अमरजीत यादव की पुलिस द्वारा हत्या कर दी गई।
👉 पहले अमरजीत को फर्जी मुकदमे में जबरन उत्पाद विभाग द्वारा उठाया गया���
👉 फिर 1 लाख रुपया घूस की डिमांड की गयी, नहीं देने पर प्रताड़ित कर उसे बेरहमी से मार दिया।
👉 दिन में परिजनों को डेड बॉडी देने से मना किया, रात के अंधेरे में मृत शरीर को सिर्फ़ दिखाया गया।
👉 पत्नी मृत शरीर के पास जाना चाही तो पुलिस ने धमकी दी कि तुम्हीं पर मर्डर का केस लगा देंगे।
👉 मृतक ��े शरीर पर बर्बरता और चोट के अनेक निशान थे, गर्दन और आंख फोड़ दिया गया था।
👉 पुलिस FIR नहीं लिख रही थी, ग्रामीणों के भारी विरोध के बाद FIR लिखने को तैयार हुई।
👉 अगले ही दिन उसी जेल से आए एक चश्मदीद ने बताया कि लड़के को पहले कोई इंजेक्शन दिया गया जिससे वह तड़पने और चिल्लाने लगा, फिर बेरहमी से उसको मारा गया।
आज पीड़ित परिजनों से मिलकर उनकी न्याय की लड़ाई को आगे बढ़ाने का आश्वासन दिया तथा आर्थिक मदद की���
बिहार में कानून व्यवस्था ध्वस्त है। फर्जी 7th क्लास का सर्टिफिकेट लिए हुए आपराधिक प्रवृत्ति के मनोनीत मुख्यमंत्री ने प्रदेश में अराजकता फैला दी है।
UPI पर चार्ज
बैंक में पैसा रखने पर चार्ज
ATM से पैसा निकालने पर चार्ज
ATM कार्ड रखने पर चार्ज
बैंक से SMS Alert पर च��र्ज
Minimum Balance रखने पर charge
कोई भी वस्तु खरीदने पर Direct और Indirect Tax
कमाई पर Tax, GST अलग से
Toll Tax अलग से, Road Tax अलग से
Education Cess, Environment Cess, Health Cess, Agriculture Infrastructure and Development Cess, Road and Infrastructure Cess
इस सरकार में पानी, हवा पर, शिक्षा-स्वास्थ्य-कृषि- हर चीज़ पर टैक्स लगा दिया है।
यही है इनका Digital India, यही है इनकी Cashless Economy। मोदी जी इसी Digital India का ढोल पीट रहे थे।
मोदी जी क्या बोलते थे कि नोटबंदी से भ्रष्टाचार, कालाधन और आतंकवाद खत्म हो जाएगा, अब तो भ्रष्टाचार ओर अधिक बढ़ा है। नोटबंदी का मोदी जी कोई एक फायदा गिना दें। मोदी जी वहीं करते है जो अमेरिका और उनके पूंजीपति मित्र आदेश देते है। मोदी की कथनी और करनी में भारी फ़र्क़ है। #TejashwiYadav #RJD #Bihar
जनता पूछ रही है कि भ्रष्ट भाजपा के समय बन रहे एक्सप्रेसवे जुमलाई विकसित भारत की हस्त रेखाएं हैं तो फिर ये रेखाएं खंडित क्यों है?
सच तो ये है कि भाजपा के समय का हर निर्माण : सड़कें, पुल, भवन, मंदिर, संसद, पानी की टंकी, गुंबद-छतरी, छत, कॉरीडोर… भाजपा के भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाता है। भाजपा के समय में विकास नहीं होता है, बल्कि विनाश पर रंग-रोगन और प्रचार क��� लीपापोती मात्र की जाती है।
सच तो ये है कि उप्र की भाजपा सरकार के पास अपने से पहलेवाली सपा सरकार द्वारा बनवाए गये देश के सर्वश्रेष्ठ एक्सप्रेसवे ‘आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे’ का जीता जागता मॉडल उपलब्ध था। अगर भाजपा ने अपने 50% कमीशन के भ्रष्टाचारी मॉडल की जगह थोड़ी भी ईमानदारी का मॉडल ��पनाया होता तो बदनामी से बचा भी जा सकता था। भाजपा तो ‘आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे’ के रखरखाव तक में भेदभाव कर रही है, मेंटेनेंस का पैसा तक मिलबाँटकर हजम कर चुकी है। वर्ल्ड क्लास एक्सप्रेसवे बनाना तो दूर भाजपा तो संभालना भी नहीं जानती है।
भाजपा राज मे��� आपस की टकराहट में डबल इंजन एक-दूसरे का ईंधन हड़पने की कोशिश में लगे हैं। एक तरफ़ कौड़ि��ों के दाम में सरकारी संपत्तियां बेची जा रही हैं तो दूसरी तरफ़ प्राइवेट संपत्तियों की सरकारी ख़रीद का षड्यंत्र जारी है।
असली लड़ाई भाजपा के अंदर की है जिसमें प्रभावशाली लोग अपने-अपने आदमी को भरपूर फ़ायदा पहुँचाने की साज़िश में शामिल हैं। अंसल के मामले में इस बार लखनऊ ने, दिल्लीवालों की चाल ख़ारिज कर दी है। अब देखना है दिल्ली की तरफ़ से इसे मात मान लिया जाएगा या कोई नई चौपड़-चाल चली जाएगी।
भाजपा सपा के बनाए हुए प्रोजेक्ट्स को बेचने पर उतारू है। भाजपा सरकार नहीं, दुकानदार है।