अजीत भारती से ज्यादा तर्कपूर्ण भाषण इस सज्जन सिंह ने दिया है, इसका वीडियो वायरल हो रहा है।
सज्जन सिंह ने कहा obc एक आर्टिफिशल केटेगरी है, यह स्टेट तय करता है कौन ओबीसी बनेगा नही बनेगा, स्टेट क्या होता है- सरकार, सरकार क्या होता है पोलटिकल पार्टी , अधिकतर स्टेट में मैजोरिटी ऑफ ओबीसी दबंग जाति है।।
आप जिस मनुस्मृति के आधार पर उदाहरण देते हो वह अधिकतर भारतीय हिंदू ब्राह्मण घर में पाया ही नहीं जाता है।
मैं अपने जीवन में जिन कुछ चंद लोगों से वाकई प्रभावित हुआ उनमें से एक थोड़ा सा मोटे दिमाग का गोलू मोलू सा लड़का था बीस बाइस साल का।
वो लड़का सुबह पेपर बांटता ��ा। दिन में एक किराने की दुकान पर नौकरी करता था और रात में बैंड में झुनझुना बजाता था (क्योंकि और कुछ बजाना उसे आता भी नहीं था)। और भी कोई छोटा मोटा काम बोलो तो पैसे लेकर कर देता था।
ऐसा करके वो महीने में चार पांच हजार कमा लेता था (2003-04 की बात बता रहा)
सबसे बड़ी बात!
कोई भी काम करते समय वो खुश ही दिखता था।
फिर उसने एक लकड़ी का खोखा खुद का रख लिया और धीरे धीरे टीन की एक बड़ी दुकान। जनरल स्टोर टाइप।
उस��ा व्यवहार अच्छा था या कुछ और पर दुकान खूब चली थी।
बहुत दिनों से उसका पता नहीं। अब कहां है, ये पता नहीं
पर वो ऐसा कैरेक्टर था मुझे बेहद पसंद था।
हंसमुख मेहनती और किसी काम में शर्म न करने वाला।
ऐसे लोग आपको कभी बेरोजगार नहीं मिलेंगे भले उनमें कोई भी स्किल न हो।
कभी कभी हम समझदार दिखने के लिए वास्तविक रहना ही भूल जाते है,लोग क्या सोचेंगे उससे ज्यादा तो खुद ही सोच लेते है.
अजीब तो नहीं लग रहा है न,ऐसा बोल दूंगी तो न जाने लोग क्या सोचने लगेंगे मेरे लिए, कही उदास तो नहीं दिख रह��� हूॅं न.....इस सब को सोचकर सरलता कही दबी सी रह जाती है मन के अंदर और फिर हम कलाकारों की भांति अभिनय करने लगते है वो भी उस दुनिया से जो न हमें जानते है और जिन्हें कोई मतलब नहीं होता है हमारे सुख दुःख से।
अच्छे बनने दबाव,अलग दिखने की चाह एक अदृश्य बंधन की तरह हमेशा गले में बंधा हुआ रहता है जो प्रेरित करता है तुम सबसे अलग हो, तुम सबमें शामिल कैसे हो सकते हो?
जीवन की यात्रा में ऐसे लोगों से भी मिलना हुआ जो वाकई में असाधारण थे पर उनसे मिलकर खुद को कमअक्ल या ��ोटा कभी भी महसूस नहीं हुआ, अद्भुत अलौकिक प्रतिभा की धनी स्त्रियों को भी साधारण भेष-भूषा और प्रेम से लोगों से मिलते हुए देखी हूॅं और जब तक कोई और नहीं बताता कभी पता भी नहीं होता कि वो कौन है।
मुझे जो अब तक समझ में आया है वो बस इतना ही है कि सरल होना वाकई में सरल नहीं है और जो सरल है वही शोर से मुक्त है ✨🙏🏻
चिड़ियॉं के सबसे कोमल ��ोटे से सफेद पंख के जैसे पवित्र होते है कुछ लोगों की बोली.✨🧿
शब्द खुद ब खुद सारे रिक्त स्थानों को भर देते है और असर वैसा ही होता है जैसे घावों पर मरहम का होता है..✨😇❣️
पत्थरों में ढूॅंढते हुए न जाने कब ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग जीवन में ही मिल जाता है और जब आंतरिक ऊर्जा बार बार किसी एक जगह पर आकर रुक जाती है तब सारे भाव भक्ति में बदल जाते है और प्रेम बंधन नहीं मुक्ति का द्वार बन जाता है...✨😇🌸🧿
भाषा/विचार आपके परवरिश की भी पहचान बताती है.. आप क्या लिखते हैं,क्या सोचते हैं इसके पीछे बहुत योगदान आपके घर के माहौल और संगत का भी होता है..
��ूल बनने के चक्कर में या अपने आप को सबसे अलग दिखाने के लिए अपने माता-पिता के दिए गए परवरिश और अपने पूर्वजों से मिले हुए संस्कार को शर्मिंदा न कीजिए 🙏🏻