जम्मू-कश्मीर में इतनी लड़कियाँ लापता क्यों हो रही हैं? 🤔
✍🏻 *पोस्ट 1 | 27 अक्टूबर ’26*
💭 *विषय — इंडियन करंट अफेयर्स*
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📰 26 अक्टूबर 2026 को The Tribune की RTI रिपोर्ट से सामने आया कि जम्मू-कश्मीर में 2019 से लगभग 16,400 महिलाएँ और लड़कियाँ लापता दर्ज हुईं। इनमें लगभग 4,300 का अब भी पता नहीं चला।
👩 इनमें लगभग 14,600 वयस्क महिलाएँ और 1,800 नाबालिग लड़कियाँ थीं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि लापता दर्ज हुई नाबालिग लड़कियों में लगभग 56% का पता नहीं चल पाया है।
*🇮🇳 क्या यह समस्या केवल जम्मू-कश्मीर की है?*
नहीं। NCRB के अनुसार, 2022 में पूरे भारत में लगभग 4.46 लाख महिलाएँ लापता दर्ज हुईं। इनमें लगभग 62,000 नाबालिग लड़कियाँ थीं।
*🔍 आख़िर महिलाएँ लापता* क्यों होती हैं?
हर मामले की वजह अलग हो सकती है। कुछ लड़कियाँ घरेलू हिंसा, पारिवारिक दबाव या जबरन विवाह से बचने के लिए घर छोड़ती हैं। कुछ अपनी इच्छा से कहीं जाती हैं, जबकि कुछ अपहरण, धोखाधड़ी और मानव तस्करी का शिकार होती हैं।
⚠️ मानव तस्करी में नौकरी, शादी या बेहतर जीवन का झाँसा देकर महिलाओं और लड़कियों का शोषण किया जा सकता है। लेकिन हर लापता महिला को तस्करी का शिकार मानना गलत होगा।
🏠 कई बार ख़तरा घर के भीतर भी होता है। WHO के अनुसार, दुनिया में लगभग हर तीन में से एक महिला अपने जीवन में शारीरिक या यौन हिंसा झेल चुकी है।
*📖 महिलाओं का जीवन क्या सिर्फ़ शादी और घर सँभालने के लिए है?*
📚 महिलाओं की स्थिति केवल सुरक्षा का नहीं, स्वतंत्रता का भी प्रश्न है। कई परिवारों में लड़कियों की पढ़ाई, नौकरी और विवाह के फ़ैसले उनकी इच्छा के बजाय दूसरों की पसंद से होते हैं।
जब किसी लड़की को बचपन से सिखाया जाता है कि उसकी ज़िंदगी का उद्देश्य शादी करना, बच्चे पैदा करना और घर सँभालना है, तो उसकी अपनी क्षमताएँ पीछे छूट जाती हैं।
💡 आर्थिक आत्मनिर्भरता ज़रूरी है, लेकिन केवल कमाना काफ़ी नहीं। दूसरों की स्वीकृति, सुविधाओं और भावनात्मक सहारे के लिए अपनी स्वतंत्रता से समझौता करने की आदत को भी पहचानना होगा।
❓ सवाल: यदि परिवार या साथी आपकी पढ़ाई, नौकरी और निर्णयों पर नियंत्रण रखता है, तो आप क्या चुनेंगे?
A) सुरक्षा और सुविधाओं के बदले उसके निर्णय मान लेंगे।
B) परिवार की नाराज़गी से बचने के लिए अपनी इच्छाएँ छोड़ देंगे।
C) अपनी समझ, क्षमता और आर्थिक स्वतंत्रता बढ़ाकर सही निर्णय लेंगे।
D) समाज की स्वीकृति मिलने तक अपने निर्णय टालते रहेंगे।
*Source:*
The Tribune:
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NCRB: https://t.co/XclrPlZqTI
WHO: https://t.co/jpRryVyWZr
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*"मेहनत के बाद भी परिणाम न मिले, तो क्या करें?"*
📖 _आचार्य प्रशांत की पुस्तक *'योगवासिष्ठ सार'* से एक अंश, जो महर्षि वसिष्ठ और श्रीराम के संवाद पर आधारित है:_
*प्र:* कई बार खूब प्रयत्न के बावजूद भी परिणाम नहीं निकलते, जैसे किसी परीक्षा में सफलता इत्यादि। इसके फलस्वरूप गहरी निराशा छा जाती है और आगे प्रयत्न करने का मन भी नहीं करता है। तब क्या करें?
*आचार्य प्रशांत:* हम जैसा प्रयत्न करते हैं, वो प्रयत्न निवेश होता है। उस प्रयत्न में जैसे आप कुछ खो रहे होते हैं, खो रहे होते हैं पाने की चाह में। आप कहते हैं कि
_"आज श्रम कर रहा हूँ, आज अपना चैन खो रहा हूँ, आज अपना विश्राम खो रहा हूँ, कल इसके बदले में अपेक्षित परिणाम मिलेगा।"_
तो जब परिणाम आपके मन के अनुकूल नहीं आता तो दोहरी चोट पड़ती है। ऐसा लगता है कि जैसे हाथ की पूँजी तो गँवाई और परिणाम के रूप में कुछ हाथ न आई।
परिणाम हज़ार बातों पर निर्भर करते हैं, इसीलिए उनमें हमेशा कुछ-न-कुछ अप्रत्याशित ज़रूर रहेगा। किसी छोटी-से-छोटी बात के परिणाम को ले करके भी आप कभी सौ प्रतिशत आश्वस्त नहीं हो सकते। इसका अर्थ यह है कि चोट खाने की सम्भावना हमेशा बनी रहेगी अगर आप परिणामों पर निर्भर हैं।
तो करा क्या जाए? करा यह जाए कि जो चैन आप परिणाम से पाना चाहते थे, वो चैन आप प्रयत्न में पाओ। जिस आनंद की उम्मीद आपको भविष्य से थी, वो आनंद आप वर्तमान से ही ले लो।
तो ज़रा चतुर बनो, ज़रा होशियारी से खेलो। प्रयत्न ऐसा रखो कि परिणाम से कुछ माँगने को बाकी न बचे। प्रयत्न में ही अपने आपको पूरा फूँक डालो, पूरा झोंक दो। वो जो खड़ा रहता, बाकी रहता, भिखारी की तरह हाथ पसारे रहता, आगे से उम्मीद बाँधे रहता, उसको पूरा प्रयत्न में ही भस्म कर डालो।
*जीत सिर्फ संयोग है, ऐसा संयोग जो आज जीत बनकर सामने आ रहा है, सुख बनकर सामने आ रहा है, कल दुःख बनकर सामने आएगा।*
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मुझे गीता से क्या मिला, गीता जीवन में उतरने के बाद जीवन में क्या परिवर्तन हुआ..
पूरी बात पढ़ें!!
गीता के छात्र हैं ना हम!
धर्म युद्ध कुरुक्षेत्र में भी था, आज भी है, तो हमें योद्धा होना है। और उसके लिए युद्ध कौशल तो चाहिए ही, साथ ही शरीर की मज़बूती भी बहुत आवश्यक है।
और गीता तो किसी अर्जुन के लिए ही होती है।
और ईमानदारी से अवलोकन करने पर पता चलता है कि मैं अर्जुन जैसा तो नहीं ही हूँ।
अर्जुन को महाबाहो कहा गया है, मतलब जिनकी भुजाएँ अत्यंत शक्तिशाली हो। हमें ख़ुद से पूछना होगा: हमारी हैं क्या?
अर्जुन को "धनंजय कहा" गया है, मतलब जिसने अत्यधिक धन-संपत्ति अर्जित किया हो। पर हमने तो किया नहीं!
कम से कम इतना तो नहीं ही किया है कि पूर्ण रूप से आत्मनिर्भर हो सकें और संस्था को भी योगदान दे सकें।
अर्जुन को गुड़ाकेश भी कहा गया है। गुड़ा मतलब निद्रा। तो जिसने निद्रा को जीत लिया हो वो अर्जुन।
खासकर हमें परीक्षा या सत्रों के समय नींद तो आ ही जाती है।
तो हमने अगर इतना भी नहीं कर रहे तो गीता कैसे उतरेगी हमारे ऊपर। और गीता नहीं उतरेगी तो "युद्धयस्व" कैसे होगा??
असली प्रश्न तो यही है ना!!
व्यक्तिगत तौर पर गीता सत्रों के बाद मैंने जितना बाहर की तरफ जो प्रयास किए हैं या यूँ अर्थ में कह सकता हूँ कि युद्ध कौशल सीख रहा हूँ।
1. अलग अलग भाषाएँ सीख रहा हूँ। ( Russian aur Japanese साथ में 😄, दोनों बिल्कुल अलग भाषाएँ हैं)
इन्हें साथ में करने के लिए बौद्धिक क्षमता का बहुत विकास होता है।
2. जब तक कालेज में था, तो शारीरिक मजबूती के लिए दौड़ता था। swimming भी कॉलेज में सीखा(freestyle, breaststroke, backstroke, aur butterfly stroke) चारों आते हैं। 50m freestyle to 55 सेकंड्स में किया भी है।
1 दिन में 700-800m swimming करता था।
अभी भी दौड़ता हूँ। तो शारीरिक मजबूती में कहीं से पीछे नहीं हूँ।
3. कॉलेज में 7 सेमेस्टर्स बिना किसी arrear के clear करने के बाद 8वें सेमेस्टर में GATE EXAM भी AIR 22 के साथ क्लियर किया। विषय था NAVAL ARCHITECTURE AND MARINE ENGINEERING. मैंने BTech भी MARINE ENGINEERING में ही किया है।
4. अभी घर पर हूँ, तो सत्रों को और अच्छे से सुन पाता हूँ, रिकॉर्डिंग सुनता हूँ, परीक्षा देता हूँ।
5. शास्त्रीय संगीत गायन में प्रभाकर हूँ(6 साल शिक्षा ली है). स्वरों को अच्छे से समझता हूं। अब बाँसुरी भी बजाना सीख रहा हूँ(जिससे मेरी साँस की समस्या भी ख़त्म हो गई है। पहले साँस अटक जाती थी, रात को सो नहीं पाता था, अब नहीं)
साथ ही मम्मी को भी हारमोनियम सिखा रहा हूँ।
अब bookstall पर भी जा रहा हूँ। अलग अलग लोगों से जा कर बात करता हूं। लोगों तक किताबें पहुँचता हूँ।
सारा दिन कैसे बीत जाता है पता ही नहीं चलता।
गीता तो जीवन में उतरी है।
युद्ध का शंखनाद तो कर दिया है!!
याचना नहीं, अब रण होगा!!
आचार्य जी आपसे नया जीवन मिला है।
आपका आभार🙏🙏❤️
प्रणाम!
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दीपोत्सव 2026, दिल्ली NCR में 🪔
_"भीतर बैठे अँधेरे को रौशनी मिल गयी, तब दीवाली। फिर रौशनी एक दिन नहीं, हर दिन रहती है।”_
~ आचार्य जी 🙏🏻
जिस घड़ी का आपको इंतज़ार था, वह आ गई है। दीपोत्सव 2026 की तिथि तय हो गई है, और तैयारियाँ शुरू हो चुकी हैं! ✨
इस बार दीपोत्सव हम आचार्य जी के साथ मनाएँगे। आइए, साथ बैठिए, और वह दीया जलाइए जो रात बीतने पर भी जलता रहे। 🪔
*दिनांक:* 7 और 8 नवंबर, (शनिवार-रविवार)
*स्थान:* ग्रेटर नोएडा
*रजिस्ट्रेशन लिंक:*
7 नवंबर:
https://t.co/dReNl9NA9b
8 नवंबर:
https://t.co/7UV44owgJY
_तमसो मा ज्योतिर्गमय_ 🪔
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भविष्य को खुलने दीजिए।
भविष्य में जो भी हो,
हम देखेंगे।
पर यह वर्तमान असहनीय है।
जो सही नहीं है,
उसे नकारना होगा।
इस नकार के साथ
कुछ सुंदर घटता है।
भविष्य का अनुमान मत लगाइए,
वर्तमान को नकारिए,
जो सही नहीं है।
🙏
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अवलोकन
*कुरुक्षेत्र में युद्ध की तैयारियाँ इन दो दिनों के सत्रों से गति में बहुत तेज़ हो गई हैं।*
*हमन गुरु नाम साँचा है हमन दुनिया से यारी क्या*🙏🏻
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Posted by Riya Yadav on Acharya Prashant App.
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नमस्कार आचार्य जी 🙏
और मेरी कम्युनिटी के सभी साथियों को भी हृदय से धन्यवाद। ❤️
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आचार्य जी, लोकधर्म में जिस खेल को अक्सर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है, उसके पीछे की मेहनत, संघर्ष और समर्पण को देखने वाली संस्था हमारी PAF है।
https://t.co/N3TRcd7N5N