मध्यप्रदेश लोक स���वा आयोग द्वारा आयोजित भर्तियों में पिछले चार–पाँच वर्षों से पदों की संख्या को लेकर लगातार छात्रों में असंतोष देखा जा रहा है। कई प्रतियोगी परीक्षाओं में केवल 200, 400 या 500 पद ही घोषित किए जाते हैं, जबकि परीक्षा में बैठने वाले अभ्यर्थियों की संख्या एक लाख से डेढ़ लाख तक होती है। ऐसी स्थिति में युवाओं में निराशा और आंदोलन की स्थिति बनना स्वाभाविक है।
सरकार के ही आकांक्षी पोर्टल के अनुसार प्रदेश में लगभग 6 लाख 97 हजार बेरोजगार युवा पंजीकृत हैं। यदि भर्तियों में पदों की संख्या बढ़ाई जाए तो निश्चित रूप से बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार का अवसर मिलेगा।
मैं आपके माध्यम से सरकार से आग्रह करता हूँ कि PSC की भर्तियों में ��दों की संख्या बढ़ाई जाए, वर्ग-1 (Class-1) के पदों में भी वृद्धि की जाए, और लंबे समय से लंबित शिक्षक भर्ती 2018 की प्रक्रिया को भी शीघ्र पूरा किया जाए। यह मध्यप्रदेश के लाखों युवाओं की न्यायसंगत और महत्वपूर्ण मांग है।
मध्यप्रदेश सरकार और पीएससी की भर्ती नीति अब खुद सवाल पूछ रही है। राज्य सेवा परीक्षा 2026 में 155 पद, जबकि कभी 571 और 457 पद दिए जा चुके हैं। स्टेट इंजीनियरिंग सर्विस में 29 पद—जब 2021 में 493 थे! वन सेवा में 30 पद, वह भी जनरल के लिए शून्य। नतीजा साफ है—आवेदन तीन लाख से फिसलकर दो लाख से नीचे। अब सरकार कह रही है पद बढ़ाने पर विचार होगा, लेकिन रिजल्ट से प��ले संशोधित विज्ञापन देना पड़ेगा। यानी पहले निराशा, फिर उम्मीद का झुनझुना। सवाल यह नहीं कि पद बढ़ेंगे या नहीं, सवाल यह है कि क्या युवाओं का भरोसा वापस आएगा? क्योंकि भर्ती कम हुई नहीं—भरोसा घटा है।
एक साल पहले दिए गए आश्वासनों पर अमल न होने से हज़ारों छात्र फिर आंदोलन के लिए मजबूर हैं ।
MPPSC इंदौर के सामने कड़ाके की ठंड में शांतिपूर्ण भर्ती सत्याग्रह जारी है ।
मुख्य मांगें
राज्य सेवा परीक्षा 2024 में कमसे कम 700 पद, राज्य वन सेवा 2026 में 100 पद, अभियांत्रिकी सेवा 2025 में 400 पद, ADPO 2026 में 300 पद
भर्ती परीक्षाओं में घपले रोकने हेतु स��़्त पेपर लीक क़ानून
अंतिम वर्ष के छात्रों को विभिन्न परीक्षाओं में अवसर
अतिथि-संविदा प्रथा समाप्त कर नियमित नियुक्तियाँ
इंटरव्यू अंक 100, बैकलॉग पदों की शीघ्र भर्ती
MPPSC परीक्षाएँ UPSC पैटर्न पर समयबद्ध व पूरी तरह पारदर्शी हों
यह आंदोलन छात्रों के भविष्य और न्यायपूर्ण भर्ती व्यवस्था के लिए है ।
@DrMohanYadav51 जी क्या reason है कि आपके राज में बेचारे अभ्यर्थियों को पढ़ाई की जगह लड़ाई करनी पड़ रही है?
जब पहले अच्छी संख्या में पोस्ट आतीं थी तो ��ब आप क्यों निकलने नहीं दे रहे? क्या अफीम की भाजी ज्यादा हो गई?
#MPPSC_न्याय_यात्रा
MPPSC न्याय यात्रा 2.0 पर पुलिस द्वारा उम्मीदवारों को एकत्र होने से रोकना और दबाव बनाना भारतीय संविधान का उल्लंघन है।
अनुच्छेद 19(1)(a) व 19(1)(b) शांतिपूर्ण अभिव्यक्ति और सभा का अधिकार देते हैं।
शांतिपूर्ण आंदोलन अपराध नहीं है।
युवाओं की आवाज़ दबाना लोकतंत्र पर हमला है।
��ंविधान सर्वोच्च है, दमन नहीं।
#mppsc_न्याय_यात्रा
#MPPSC_छात्रों_की_मांगें_पूरी_करो
#संविधान_विरोधी_मोहन_सरकार
@NEYU4MP
अगर यही युवा किसी धार्मिक आयोजन के लिए एकत्रित होते, तो इन्हीं पर पुलिस फूल बरसाती।
लेकिन आज ये अपने अधिकारों के लिए खड़े हैं, इसलिए इन्हें खड़ा होने तक नहीं दिया जा रहा।
#MPPSC_PROTEST#MPPSC_न्याय_यात्रा ✊
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा बैगा, भारिया और सहरिया जनजातियों—जो कि केंद्र द्वारा अधिसूचित विशेष पिछड़ी जनजातियाँ (PVTGs) हैं—को सरकारी सेवाओं में सीधी भर्ती का प्रावधान दिया गया है। इस नीति का उद्देश्य ऐतिहासिक उपेक्षा, अत्यधिक गरीबी, कुपोषण, अशिक्षा और सामाजिक पिछड़ेपन के कारण इन जनजातियों को त्वरित रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है। यह कदम PM-जनमन योजना की भावना से भी जुड़ा है।
नीति के अनुसार, तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के गैर-राजपत्रित पदों पर PVTG अभ्यर्थियों को बिना परीक्षा या साक्षात्कार के सीधे नियुक्ति दी जाती है। वे केवल न्यूनतम शैक्षणिक योग्��ता पूरी करके आवेदन जमा करते हैं और ST कोटे की उपलब्ध रिक्तियों में 100% प्राथमिकता पाते हैं।
लेकिन समस्या कहाँ है?
मध्य प्रदेश की कुल जनजातीय आबादी में: (2011 जनगणना अनुसार)
PVTGs (बैगा–भारिया–सहरिया) की आबादी लगभग 3% है
जबकि भील, भिलाला, ��ोंड, कोरकू, कौल, पावरा आदि जनजातियाँ करीब 18% हिस्सेदारी रखती हैं
ऐसे में जब ST कोटे के सभी रिक्त पदों पर PVTGs को 100% प्राथमिकता दी जाती है, तो संपूर्ण 21% आरक्षण के भीतर सामान्य आदिवासी समाज के लिए अवसर अत्यंत सीमित हो जाते हैं। इससे दो स्पष्ट समस्याएँ उत्पन्न होती हैं:
अन्य ST समुदायों के लिए अवसरों का संकुचन
आंतरिक असमानता, जो ST श्रेणी के भीतर असंतोष को जन्म देती है
नीति-सुधार क्यों जरूरी है?
न्याय के संतुलित सिद्धांत के अनुसार, ST श्रेणी के भीतर अवसरों का वितरण आबादी के अनुपात में होना चाहिए। चूँकि PVTGs की जनसंख्या कुल आदिवासी समाज का केवल 3% है, इसलिए ST कोटे के कुल पदों में से 4–5% पद विशेष रूप से PVTGs को दिए जाना अधिक तर्कसंगत है। इससे:
PVTGs को संरक्षण भी मिलेगा,
और अन्य आदिवासी समाज—भील, गोंड, भिलाला आदि—के साथ अन्याय भी नहीं होगा।
PVTGs के सामाजिक उत्थान के लिए विशेष प्रावधान आवश्यक है, लेकिन इसके साथ ही ST श्रेणी के भीतर समान अवसर, आंतरिक न्याय, और आबादी आधारित वितरण भी सुनिश्चित होना चाहिए। इसलिए मध्य प्रदेश सरकार को इस नीति की पुनर्समीक्षा कर इसे अधिक संतुलित और पारदर्शी बनाना चाहिए, ताकि संपूर्ण आदिवासी समाज का समग्र विकास हो सके।
मध्यप्रदेश में 25 लाख से अधिक पंजीकृत बेरोजगार युवा सरकार की रोजगार मेलों की खोखली योजना पर अब भरोसा खो चुके हैं। हर महीने 15 लाख रुपये खर्च कर सरकार रोजगार मेले तो धूमधाम से लगवा रही है, पर नतीजा—शून्य। �� किसी के पास डेटा है कि कितने युवाओं को नौकरी मिली, न यह जानकारी कि जो मिली, उन्होंने ज्वाइन भी किया या नहीं। दरअसल, यह रोजगार मेला नहीं, सरकार का इवेंट मैनेजमेंट शो बन गया है।
प्रदेश के 10 बड़े जिलों के रोजगार कार्यालय, जिन्हें कभी मॉडल कैरियर सेंटर बनाया गया था, आज फुटबॉल की तरह एक कंपनी से दूसरी कंपनी को सौंपे जा चुके हैं। निजी कंपनियां भी स्थानीय युवाओं की बजाय यूपी-बिहार से लोगों को लाकर भर��ती कर रही हैं, जिससे मप्र के युवाओं को न घर में रोजगार मिल रहा है, न बाहर जाने का रास्ता।
अगर सरकार सच में युवाओं के भविष्य को लेकर गंभीर होती, तो निजी कंपनियों को यह सख्त निर्देश देती कि वे कम से कम 75 से 80 प्रतिशत स्थानीय युवाओं को रोजगार दें। लेकिन सच्चाई यह है कि सरकार आंकड़ों और इवेंट्स की राजनीति में उलझी है, जबकि युवाओं का भ��िष्य अंधकार में है।
मप्र के बेरोजगार अब समझ चुके हैं—सरकार के रोजगार मेले दरअसल वोट मेले हैं, जहाँ नौकरी के नाम पर सिर्फ वादे बांटे जाते हैं, अवसर नहीं।
डॉ हिरालाल अलावा मनावर विधायक
🔥 मध्यप्रदेश के युवाओं की सीधी चेतावनी
➡️ MPPSC राज्य सेवा परीक्षा 2026 में 700 से कम पद स्वीकार नहीं होंगे।
➡️ स्टेट इंजीनियर भर्ती में भी न्यूनतम 500 पद चाहिए।
📌 उम्मीदवारों का तर्क –
पिछली 3 परीक्षाओं में पदों की संख्या लगातार घटती गई है।
2022 → 457 पद
2023 → 229 पद
2024 → सिर्फ़ 110 पद
2025 → 500 पद घोषित, लेकिन वेक���ंसी निकली मात्र 158 ❗
@DrMohanYadav51
मध्यप्रदेश में भर्ती परीक्षाओं का हाल किसी से छुपा नहीं है। बैंक नोट प्रेस देवास में बिहार के जयराम मंडल ने सॉल्वर बैठाकर नौकरी पाई और चार साल तक मज़े से काम करता रहा। यह सिर्फ एक केस नहीं, बल्कि मप्र की भर्ती प्रणाली पर बड़ा सवाल है। परीक्षा कराने वाली थर्ड पार्टी एजेंसियां हों या जिम्मेदार विभाग, सबकी मिलीभगत से बेरोज़गार युवाओं के सपनों के साथ मज़ाक होता रहा।
सरकार दावा करती है कि भर्तियां पूरी तरह पारदर्शी हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि लाखों की परीक्षा फीस वसू�� कर भी फिंगरप्रिंट अपडेट, फोटो मैचिंग और दस्तावेज सत्यापन जैसी बुनियादी प्रक्रियाएं ढंग से नहीं होतीं। नतीजा यह कि असली मेहनतकश युवा बेरोज़गार घूमते रहते हैं और जुगाड़ व भ्रष्टाचार से नौकरी पाने वाले सिस्टम का मज़ाक उड़ाते हैं।
यह घटना बताती है कि मध्यप्रदेश में परीक्षा और भर्ती अब "कौशल" नहीं, "सॉल्वर मैनेजमेंट" का खेल बन गई है। सवाल यह है कि सरकार कब तक आंख मूंदे रहेगी? बेरोज़गार युवाओ�� के भविष्य से यूँ ही खिलवाड़ होता रहेगा या इस गड़बड़ी के जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई होगी?
#MPPSCScam #SolverGang #Vyapam2 #MadhyaPradesh #BerozgarYuva
आश्चर्य तो यही है कि जब युवा अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाता है तो युवाओं को जेल में डाल दिया जाता है, हमे आदतन अपराधी करार दिया जाता है, लेकिन खुलेआम पुलिस कर्मचारियों द्वारा गलत कार्य किया गया, ASI भारत ���िंह परिहार द्वारा गुनाह कबूल करने के बाद भी DCP साहब संरक्षण कर रहे है।
@NEYU4INDIA @TheSootr @MPYuvaShakti
पटवारी भर्ती के घोटालेबाजों को इसलिए छोड़ दिया है क्योंकि उनके पैसे सही जगह पहुंच गए थे..❓️
@DrMohanYadav51 जी पटवारी घोटाले की जांच रिपोर्ट क्यों नहीं दिखा रहे हो,किसको बचाने की कोशिश कर रहे हो,उसको बचाने में आपकी ही इमेज खराब हो रही है।
@Energy_MPME@PradhumanGwl@MPEBIndore@CMMadhyaPradesh SIR RRB JE & MPPKVVCL AE EXAM ARE ON SAME DAY I.E 4 JUNE . EVERY OPPORTUNITY MATTERS FOR THE YOUTH OF MP. PLEASE RE-SCHEDULE EXAM OF MPPKVVCL AE EXAM .