‘एक व्यक्ति, एक वोट’ की जमीनी सच्चाई! 🗳️
एक आम नागरिक ने ���पनी जेब से यूपी और दिल्ली के दो अलग-अलग पहचान पत्र निकालकर राहुल गांधी की वोट बैंक की राजनीति की पोल खोल दी है।
उनका आरोप है कि AAP और कांग्रेस फर्जी व दोहरे वोटों के सहारे चुनाव जीतती हैं।
SIR के जरिए ऐसे मामलों की सफाई हो रही है, जिसका विरोध इन पार्टियों की चुनावी राजनीति से जुड़ा है और इसीलिए ये हुड़दंग मचा रहे हैं। सुनिए…
@prakashpoddarjh@Ritesh126098 उत्पाद सिपाही एग्जाम में जिस तरह 150+ छात्रों को पकड़ा गया फिर भी आप लोग इस पर शांत है, क्या आंदोलन में उत्पाद सिपाही के छात्र नहीं थे पर कोई भी इसके बारे में नहीं बोल रहा है इस एग्जाम में 97% रिजल्ट लाने वाले भी तेजस्वी लोग है। @kunalpratap86@JPSCreformanch@Ravindra250496
मैं स्वयं आदिवासी समाज से आता हूँ। हमारे लिए ‘आदिवासी’ केवल एक पहचान नहीं है यह हमारे पुरखों का इतिहास, हमारी संस्कृति, हमारा संघर्ष और हमारा स्वाभिमान है। जब कोई पुलिसकर्मी इसी पहचान को गाली की तरह इस्तेमाल करता है, किसी आदिवासी को सरेआम अपमानित करता है या डराता-धमकाता है, तो चोट केवल उस एक व्यक्ति को नहीं लगती; पूरा आदिवासी समाज आहत होता है।
हम पुलिस को अपना विरोधी नहीं मानते। अन्याय होने पर सबसे पहले वर्दी से ही सुरक्षा और न्याय की उम्मीद करते हैं। लेकिन जब वही वर्दी हमारी पहचान को अपमानित करे, तब हम अपनी पीड़ा लेकर कहां जाएं?
आधा दर्जन से अधिक ऐसे वीडियो वायरल हो चुके हैं। पुलिस एसोसिएशन बताए क्या उसने इनमें से किसी मामले में अपने स्तर से अपने किसी भी मेंबर पर कोई कार्रवाई की? किसी दोषी पुलिसकर्मी की सार्वजनिक भर्त्सना की? उसके विरुद्ध वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखकर कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की? यदि हां, तो उससे जुड़े पत्र, प्रस्ताव या अन्य प्रमाण सार्वजनिक करे।
अपने सदस्यों के अधिकार और सम्मान क�� लिए खड़ा होना एसोसिएशन का दायित्व है, लेकिन संस्था की नैतिकता तभी प्रमाणित होती है, जब वह अपने बीच के गलत लोगों के विरुद्ध भी उतनी ही मजबूती से खड़ी हो। अन्यथा उसकी चुप्पी पीड़ित आदिवासियों को यही संदेश देती है कि उनकी गरिमा और पीड़ा का कोई मूल्य नहीं है।
यह सवाल पुलिस के विरोध का नहीं, पुलिस व्यवस्था पर हमारा विश्वास बचाने का है। हम केवल इतना चाहते हैं कि हमारी पहचान को गाली न बनाया जाए और वर्दी के पीछे छिपकर हमारा अपमान करने वालों को संरक्षण न मिले।
@JharkhandPolice
विधानसभा सदस्य और थाना प्रभारी के बीच हॉट-टॉक के बाद पुलिस एसोसिएशन से लेकर तरह-तरह के बयान सामने आ रहे हैं। अच्छी बात है कि भाषा, शिष्टाचार और मर्यादा बनी रहनी चाहिए, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह मर्यादा सिर्फ जनप्रतिनिधियों के लिए है?
क्या पुलिस एसोसिएशन ने उस गालीबाज दारोग़ा के व्यवहार पर कारवाई की बात तो दूर, कभी निंदा या आम आदमी के साथ गाली की भाषा में बात करने को लेकर कभी किस��� पुलिस वाले को नसीहत दी? क्या पुलिस को यह पता नहीं है कि बिना किसी की सहमति के उससे बातचीत को रिकार्ड कर वायरल करना किसी की निजता के हन��� का अपराधिक काम है? क्या यह निजता हनन का कानून सिर्फ आमलोगों के लिये ही बना है, पुलिस के लिये नही? ऐसे कई सवाल हैं जिनका जबाब देना जरूरी है।
कुछ महीने पहले बोकारो जिले के चास थाना प्रभारी का कथित गाली-गलौज वाला ऑडियो वायरल हुआ था। हमने सरकार से मामले में प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई की मांग भी की थी। लेकिन कार्रवाई करने के बजाय सरकार ने ऐसे गालीबाज पुलिस अधिकारियों को संरक्षण दिया।
थानों में आम जनता के साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल, फोन पर गाली-गलौज और दुर्व्यवहार की शिकायतें अक्सर सामने आती हैं। आज अगर जनप्रतिनिधि और पुलिस के बीच ऐसी स्थिति पैदा हो रही है, तो इसके लिए राज्य सरकार की नीति और संरक्षण भी जिम्मेदार है।
अगर आम जनता द्वारा गाली देना अपराध है, तो पुलिस को ऐसा कौन-सा विशेषाधिकार मिला है कि वह जनता को अपशब्द कहे? यह विशेषाधिकार आखिर किसने दिया?
पुलिस को सबसे पहले जनता से बा��� करने का तरीका और शिष्टाचार सीखना होगा। स���कार को भी ऐसे मामलों में केवल निलंबन तक सीमित न रहकर कठोर कार्रवाई और प्राथमिकी दर्ज कराना सुनिश्चित करना चाहिए। तभी व्यवस्था में वास्तविक सुधार आएगा।
@HemantSorenJMM @JharkhandPolice
ये देखिए JMM के गुंडे अब छात्रों को मारेंगे । ल���कतांत्रिक व्यवस्था ने सरकार और सिस्टम का विरोध करने वालों को अधिकार है मगर इन जाहिलों को कौन समझाए कि देश संविधान से चलता है मार धाड़ से नहीं । राज्य में अराजकता की स्थिति पैदा हो गई है अच्छा होता कि राज्य में चौथी बार राष्ट्रपति शासन लग जाए
झारखंड सरकार के खिलाफ छात्रों का यह हुजूम नहीं, जनसैलाब है!
JPSC-JSSC पेपर लीक और भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ छात्रों का आक्रोश अब और एकजुट होकर सड़कों पर उमड़ पड़ा है। छात्रों का साफ संदेश है: उनके भविष्य से खिलवाड़ अब बर्दाश्त नहीं होगा।
राहुल गांधी और हेमंत सोरेन से चाहिए जवाब! ⬇️
@CJP_for_India गुंडा गर्दी देखे हो कहां देखना है तो झारखंड आ जाओ तुमको सिर्फ बीजेपी शासित राज्य ही देखता है, झारखंड में आंदोलन 23 होने को है पर @INCIndia और @JmmJharkhand गठबंधन सरकार छात्रों के बात नहीं सुन रही है।
@JPSCreformanch उत्पाद सिपाही एग्जाम रद्द का भी मांग मुखरता से रखिए इसमें भी बहुत सारे लोग इसरो के साइंटिस्ट एग्जाम में बैठे थे जिसमें अनेको लोग का 97% से अधिक मार्क्स है हम चाहते हैं कि इतने तेजस्वी लोग नासा में काम करे और उत्पाद सिपाही एग्जाम झारखंड ��े युवा के लिए छोड़ दे।
@sukhdeobhagat Bjp कुछ नहीं जानती है कि आप कुछ नहीं जानते हैं cgl में cid जांच में 120 क्वेश्चन का आंसर है कोर्ट के सामने आया फिर भी jmm और कांग्रेस की सरकार ने उसे दरकिनार कर ��ॉइनिंग करा दिया यह कहां तक उचित है आप MP है तो आप कुछ भी बोलिएगा, यहां की स्टूडेंट बोल दे एक भी एग्जाम फेयर हुआ है