TV actors aren't leaving a single chance to show Swara Bhaskar her real place 🚨
Karan - I've not seen your work, but I've seen you in some controversies
Swara - You would've become my fan then
Karan - Not really. I really feel pity for people like you who have to diss their own people just for bread and butter
Swara - Koi nahi. People realise facts slowly
Karan - Facts? Chhatrapati Sambhaji Maharaj's eyes were gouged out, he was tortured for days. Aurangzeb asked him to accept Islam. He roared, Not even if you offer your daughter to me. That's how we survived. We can't compromise our principles like you, who don't even understand our lineage
Swara - It would be better if Indians think about building schools instead of all this
Karan - People who celebrate the Indira Gandhi Memorial made on 45 acres and hate the Ram Mandir made on 2 acres shouldn't lecture others
He literally ate and left no crumbs. All these brave Hindus will make sure Swara leaves this show crying 🙏
दिल्ली उच्च न्यायालय ने आज मोदी एक्ट की धारा 18 और 18ए(2) के अंतर्गत वैधानिक रोक को देखते हुए मेरी अग्रिम जमानत याचिका को निरस्त कर दिया। हायकोर्ट का यह निर्णय अपनी जगह है, पर मैं इस से सम्मानपूर्वक असहमत हूँ।
साथ ही, यह भी स्पष्ट है कि न्यायालय ने कहा है कि इसकी टिप्पणियाँ केवल जमानत आवेदन तक सीमित हैं और मेरी आपराधिकता इससे सिद्ध नहीं हो जाती। इस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष चुनौती दूँगा और आशा करता हूँ कि देश की न्यायिक व्यवस्था में सर्वोच्च विश्वास बना रहे।
मुझे एक नीच, अधम, पतित ट्रोल के विरुद्ध अपने परिवार के सम्मान की रक्षा करने के लिए, इस घटिया और दमनकारी ��ोदी एक्ट (जिसे SC/ST एक्ट भी कहा जाता है) के प्रावधानों के तहत एक आपराधिक मामले में झूठा फँसाया गया है।
मैंने ऐसा कुछ नहीं कहा है जो किसी व्यक्ति या समुदाय का जाति के आधार पर जानबूझकर अपमान या अपमानजनक व्यवहार माना जा सके। मैं उन किसी भी निहित स्वार्थ वाली ताकतों से लड़ने के लिए तैयार हूँ जो इस देश में स्वतंत्र अभिव्यक्ति और सत्य कथन को दंडित करना चाहती हैं, भले ही इसके लिए मुझे जेल जाना पड़े।
एक नेता द्वारा अपनी राजनैतिक वोटबैंक को साधने के लिए, सामान्य जनता से बिना किसी सोच-विचार के, संशोधित किए गए इस पूरे कानून और इसके संशोधित नियमों का मैं तब तक विरोध करूँगा जब तक इसे पूरी तरह से निरस्त न किया जाए।
और हाँ, पुनः कहूँगा कि हमारी की माँ-बहनें सड़कों पर चलती-फिरती वस्तु नहीं है जिस पर कोई भी टिप्पणी करे और बच जाए। उनके सम्मान की रक्षा हेतु, सौ बार जेल जाना पड़े जाऊँगा और 101वीं बार वही करूँगा जो मैंने किया है।
PS: जो भी इस निरस्तीकरण पर स्खलित हो रहे हैं, तुम्हारी माँ-बहन पर भी हर दिन ऐसी टिप्पणी होती है। उस पर भी मैं ही स्टैंड लूँगा क्योंकि तुम अपनी कायरता में दो शब्द नहीं लिख पाओगे।
सरकारी विज्ञापनों से लेकर 58 लाख दीयों तक, मोदी जी के Birthday का ऐसा celebration कि अब बस यही समझना बाकी है कि मोदी जी को राम से ऊपर कब स्थापित कर दिया गया।
राम को लाने वाले का Birthday है, इसलिए दिया जलाइए, ढोल बजाइए, और AI से गाना भी बनवाइए!
We as audience can clearly see what has happened, We have never seen him like this , lets do our bit to support him inside - more power to Scoutop 🥺🫶🏼
WE ARE WITH YOU SCOUTOP
#ScoutArmy#Scoutop#BiggBoss20
24 सितंबर को लेकर सवर्ण समाज से अपील
24 सितंबर को लेकर मैं सामान्य वर्ग के लोगों से एक महत्वपूर्ण अपील करना चाहता हूं। 24 सितंबर को चंद्रशेखर रावण शक्ति प्रदर्शन के लिए आ रहे हैं। मुझे आशंका है कि वे सवर्ण समाज के लोगों से टकराव चाहते हैं। पिछली बार के आंदोलन में 14 लोगों की हत��या हुई थी। इस बार भी यदि दिल्ली में सवर्ण समाज के लोग वहां आते हैं, तो टकराव की स्थिति पैदा हो सकती है।
आप लोग बिना तैयारी के वहां जाएंगे और पुलिस भी आपको सुरक्षा नहीं देगी। यदि पुलिस को आवश्यकता पड़ी, तो वह गोली चलाने से भी पीछे नहीं हटेगी।
इसलिए 24 सितंबर के आसपास यदि कोई रैली या प्रदर्शन करने की योजना बना रहा है, तो उस विचार को अभी त्याग देना चाहिए।
हमें किसी के उकसावे में नहीं आना है। सामान��य वर्ग और ओबीसी समाज के लोग, तथा SC/ST एक्ट, यूजीसी की नीतियों और आरक्षण व्यवस्था से प्रभावित ��ोग, सभी से मेरा विनम्र निवेदन है कि 24 सितंबर को चंद्रशेखर रावण और भीम आर्मी जो करना चाहते हैं, उन्हें करने दीजिए।
वे जंतर-मंतर आएं या पूरी दिल्ली में प्रदर्शन करें, लेकिन हमें उनका सामना नहीं करना है। उनके आसपास बिल्कुल नहीं जाना है। उनके एक, दो या पांच किलोमीटर के दायरे में भी नहीं दिखना है।
उन्हें सरकार के साथ अपनी लड़ाई लड़ने दीजिए। हमें इसमें नहीं पड़ना है। सरकार भी चाहती है कि लोग हिंसा करें और फिर उनके विरुद्ध कार्रवाई की जा सके। यदि किसी व्यक्ति का चेहरा हिंसा में दिखाई दे गया, तो उसका भविष्य बर्बाद हो सकता है।
सरकार अपने आपको बचाने के लिए अलग-अलग लोगों को सामने लाती है और फिर अपनी कार्रवाई को सही ठहराने का प्रयास करती है। हमें ऐसी किसी भी योजना का हिस्सा नहीं बनना है।
हमारे लिए हिंसा से बचना जरूरी है:
मैं बार-बार कह रहा हूँ कि हिंसा मत कीजिए। 24 सितंबर को शक्ति प्रदर्शन मत कीजिए। इसके बाद तीन-चार दिन या सात दिन तक भी ऐसे किसी कार्यक्रम से दूर रहिए। ��दि शक्ति प्रदर्शन करना है, तो अक्टूबर या नवंबर में कर सकते हैं। चुनाव की तारीख घोषित होने के बाद भी लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखी जा सकती है।
हमें अभी सड़कों पर आने की कोई आवश्यकता नहीं है। हमें सड़कों पर जाकर किसी से पिटने या लड़ने की जरूरत नहीं है। यदि टकराव हुआ, तो आप पर मोदी एक्ट, NSA और अन्य गंभीर धाराएं लगाई जा सकती हैं। आपको लंबे समय तक जेल में रहना पड़ सकता है।
इसलिए 20 से 30 सितंबर के बीच सवर्ण समाज का कोई भी समूह उनके आसपास कहीं भी दिखाई न दे। उन्हें अपना प्रदर्शन करने दीजिए। यदि वे हंगामा करते हैं या तोड़फोड़ करते हैं, तो यह दिल्ली पुलिस, सरकार और उनके बीच का मामला है। हमें इसमें नहीं पड़ना है।
हमें अपना ध्यान उत्तर प्रदेश के चुनाव पर केंद्रित रखना है। हमें अपने तीन मूल एजेंडों पर ध्यान देना है:
1. यूजीसी से संबंधित नीतियां
2. एससी-एसटी एक्ट
3. आरक्षण सुधार (12 मांगें)
यही हमा��े मूल मुद्दे हैं। हमें इन्हीं पर केंद्रित रहना है। हिंसा नहीं करनी है। हमें किसी के ��ाल में नहीं फंसना है और शांतिपूर्ण तथा लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखनी है।
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ये है कोर्ट का ऑर्डर कि यदि इस पर मोदी एक्ट न लगता तो तुरंत बेल हो जाती क्योंकि इसमें कोई गंभीर बात है ही नहीं। पर मोदी एक्ट ��ग गया है तो अब उन्हें मेरे द्वारा ‘योग्य बनना होगा’ पर आपत्ति हो गई कि ये बात मैंने जातिवाद से ग्रसित हो कर कहा है कि रावण को किसी भी लड़की के योग्य बनना होगा।
यानी, योग्यता आर्थिक नहीं, रूप-गुण की नहीं, शिक्षा की नहीं, बल्कि कुछ और ही हो गई।
��ात्रि काल में अचानक से कमरे में तापमान अत्यधिक बढ़ता अनुभव हुआ, पीली-पीली आग की लपटें दिख रही थी! हड़बड़ा कर उठा तो पाया कि बाबा साहेब संविधान में आग लगा रहे थे।
मैंने चेक किया तो पाया कि आज तो September 2, 1953 भी नहीं है, फिर बाबा साहेब ऐसा क्यों कर रहे होंगे! फिर अचानक से मैं जग कर बैठ गया। अजीत जी, आप एक ही सपने में दो बार कैसे जग गए?
इन्सेप्शन हो रहा था, सपने में सपना चल रहा था। अब मैं सोच रहा हूँ कि जिस बा���ा साहेब को एक ब्राह्मण ने अपना उपनाम दिया, एक राजपूत ने पढ़ाया, और एक देश ने अपनाया, देश का भविष्य लिखने के लिए बी एन राव, राजेंद्र प्रसाद के समकक्ष उन्हें संविधान समिति में, बिना उनकी जाति देखे बिठाया, वो भला संविधान में आग क्यों लगाएँगे?
फिर मैंने देखा कि 40 दिन बाद यहाँ दलित को याद आता है कि उसे जातिसूचक गाली दी गई थी, एक भीड़ पुलिस स्टेशन को घेर कर धाराएँ जुड़वा देती है ताकि राहुल गांधी वहाँ आ��र क्रेडिट ना ले ल���, और फिर एक 14 वर्ष की बच्ची को स्कूल भेजने की जगह किसी गुंडे की राजनीति को आगे बढ़ाने का हथियार बनाया जाता है। ऐसे में यदि बाबा साहेब आज होते तो संविधान में तो आग लगा ही देते।
दिल्ली पुलिस को इस वीडियो का भी संज्ञान लेना चाहिए.. स्वतंत्र भारद्वाज ने हिंसा की है तो उसपर कार्रवाई कीजिए लेकिन अगर उसके साथ भी हिंसा हुई है तो उसको भी जांच में शामिल कीजिए..
इस वीडियो में बहुत कुछ साफ है कि क्या हुआ था वहां।
लहसुन का लोकतंत्र
देखिए कि सरकार कितनी नंगी और अराजकतावादियों की गोद में बैठने वाली हो गई है कि ये आज सुप्रीम कोर्ट में यह कहने गए कि तिल���ट्टों के प्रदर्शन में जिन्होंने पत्थरबाजी की, पुलिस पर डंडों से प्रहार किया, सार्वजनिक संपत्ति को क्षति पहुँचाई, उन पर हुए केस निरस्त किए जाएँ।
@BJP4India वालों, वह तुम्हारे बापों की संपत्ति थी? कितनी बार तुम अपनी घटिया राजनीति के लिए @DelhiPolice को पिटवाते रहोगे? पूरी पुलिसिंग को पंगु बना कर रख दिया है, जो भी आता है इनका सर फोड़ कर चला जाता है।
पर हाँ, पुलिस कुछ न करे क्योंकि माननीय @narendramodi जी को रात के एक ब���े ‘जेन जी’ के लिए रील बना कर, उन्हें माफ करते हुए बड़ा हृदय वाला दिखना है। आज कल रील और उसके व्यू नहीं गिन रहा कोई!
सरकार चाहती है कि वो ये केस माफी की भी नौटंकी करे और वही सरकार फिर कोर्ट को यह भी कहती है कि तिलचट्टों का पाँच सितम्बर वाला मार्च रोक दिया जाए। माननीय सूर्यकांत जी ने कहा है कि अभी से वो यह नहीं मान सकते कि कुछ गलत ही हो जाएगा।
जबकि माननीय सूर्यकांत के समक्ष ऐसे उदाहरण हैं कि इन्हीं आयोजकों के कारण दिल्ली में तीन दिन क्या होता रहा। फट्टू सरकार की %# इतनी फटी हुई थी कि आयोजकों को नामित तक नहीं कर पाई कि इनका ही दायित्व बनता था।
ये चल रहा है इस देश में। दंगाइयों को सरकार बचा रही है ताकि उनके राम मंदिर लूट के पाप को डायवर्ट करने का रिवार्ड उन्हें दिया ��ा सके। जनता सब देख रही है।
इतने ज्वार-भाटे के मध्य इस स्टेडियम की रूपरेखा देख कर आनंद होता है! दर्शकदीर्घा की चंद्राकार छत, त्रिशूलाकार फ्लडलाइट और डमरूरूपी पैवेलियन!
हर हर महादेव! जय काशी!
RHA को ले कर सरकार से कुछ बात और माँगें
सरकार अपने स्तर से हर आंदोलन को फूट, समझौता, बल-प्रयोग, समझदारी, मिसइन्फॉर्मेशन कैम्पेन या कायरता दिखा कर कर समाप्त करना चाहती है। और वही उनका कार्य भी है। RHA का नाम ले कर कुछ लोगों ने आंदोलन के लिए जनता को बुलाया और लगभग 7000 की भीड़ जंतर मंतर पर भीतर दिखी, उतने को ही बाहर होल्ड किया ग���ा या लौटा दिया गया।
मैंने केवल दिल्ली पुलिस की बकलोली की अवज्ञा के लिए इसमें भाग लेने की बात की और फिर बहुत लोग मेरे आने पर भी आए। फिर दुबे को पाठक जी ने नेता मान कर एक ऐसे पत्र पर चर्चा के लिए आश्वासन दिया जिसमें आरक्षण शब्द ही नहीं है।
खैर, मैं ये सब तकनीक देखता और जानता आया हूँ। मुझे इस विषय पर सरकार को भीड़ दिखाने की आवश्यकता न पहले थी, न आज है, पर जब चाहूँ वह भी कर सकता हूँ। अगली बार बिना अनु��ति के भी ऐसा किया जा सक���ा है यदि प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट चाहिए, तो वह भी दिखा देंगे। पर मेरा लक्ष्य वह है ही नहीं।
सरकार को ‘आरक्षण हटाओ आंदोलन’ से इसलिए नहीं डरना चाहिए क्योंकि एक भीड़ पूरे कनॉट प्लेस को घर कर पत्थरबाजी करते हुए संसद घेर लेगी। सरकार को इसलिए डरना चाहिए कि ऐसी कोई भीड़ ही नहीं है, न ही हम संसद को घेरने की योजना बना रहे हैं।
आंदोलन की तपन केवल जलती हुई कार की आग और अराजक भीड़ की ही नहीं होती। एक तपन ऐसी भी ���ोती है जब जनमानस को वैचारिक रूप से इतना सक्षम बना दिया जाता है कि वह स्वयं ही अपने लिए वह निर्णय कर ले, जो वो कल तक किसी दूसरे बहकावे में आ कर कर रहा था।
हमारी माँगें:
१. आरक्षण पर श्वेत-पत्र: क्या लाभ हुआ, किन जातियों को अनुपात से अधिक लाभ लगातार मिला, कौन सी जातियाँ पूर्णतः छूट गईं। आरक्षण किस तरह से देश या समाज के उत्थान में सहायक है, उसके लिए आँक���़े क्या कहते हैं आदि आदि! इस से जुड़ी हर वह रिपोर्ट और सर्वेक्षण जो सार्वजनिक नहीं हुई।
२. EWS को हर वह आर्थिक सहायता दी जाए जो SC को मिलती है। निःशुल्क कोचिंग, निःशुल्क फॉर्म, शून्य हॉस्टल और कोर्स फीस। फिर भी लोन यदि लेना पड़े तो उसमें भी सुविधा।
३. तीनों ही आरक्षित वर्ग में ‘कोटा विदिन कोटा’ लागू हो ताकि वास्तविक दलित-पीड़ित-वंचित जातियों तक लाभ पहुँचे। अभी SC और OBC में हजार-हजार जातियाँ ऐसी है��� जिन्हें नगण्य आरक्षण मिला है। और 4-5 जातियाँ ऐसी हैं जो 70-80% आरक्षण खा रही हैं। इसका आधार पारिवारिक आय हो, न कि वैयक्तिक और दुरुपयोग की संभावना न रहे।
४. मेरिट का सम्मान हो। आरक्षित वर्ग का कटऑफ किसी भी हालत में सामान्य वर्ग के कटऑफ के (से नहीं) 10% के रेंज से बाहर न जाए। और यह भी आज की परीक्षा के अधिकतम आयु सीमा वाले बच्च���ं की आयु के बाद समाप्त किया जाए। न्यूनतम क्वालिफाइंग मार्क्स तो तय होना ही चाहिए।
५. सरकार यह सर्वेक्षण करे कि क्या गरीबी, भेदभाव या पिछड़ेपन से किसी की बौद्धिक क्षमता घट या बढ़ सकती है? इम्पीरिकल एविडेंस सार्वजनिक करें और उसी आधार पर आरक्षण की नीतियाँ बनें।
६. एक व्यक्ति को एक बार आरक्षण मिले। एक परिवार को एक बार आरक्षण मिले।
७. दशकीय समीक्षा हो। समाप्ति के लिए एक ‘सनसेट क्लॉज’ या रोडम��प कि कब तक रहेगा।
८. कॉलेज/यूनिवर्सिटी पुस्तकालयों में पुस्तकों के अलॉटमेंट का आरक्षण तत्काल निरस्त हो। इसका कोई लॉजिक नहीं है। यह आरक्षण से लड़ कर वहाँ पहुँचे बच्चों को सताने की व्यवस्था मात्र है। या आप पुस्तकों की मात्रा दोगुनी कीजिए और वहाँ ‘आरक्षित सेक्शन’ लिख दीजिए।
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अन्य माँगें:
९. यूजीसी नियमावली निरस्त हो या समीक्षा कर के हर जाति समूह को इसमें सम्म��लित किया जाए।
१०. SC/ST Act की तर्ज पर ‘सवर्ण उत्पीड़न (रोकथाम) कानून पास’ हो। दोनों ही कानून में केस झूठा पाए जाने पर, उस केस में होने वाला दंड आरोप लगाने वाले को झेलना पड़े। आर्थिक जुर्माना भी वसूला जाए।
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सरकार और सुधिजन देख लें। बाकी, चाहे आप दुबे, शेखावत या अन्य को मैनेज कर लें, आंदोलन चलता रहेगा।
SC/ST एक्ट के जितने भी केस होते हैं, जिनमें से 92 परसेंट फेक साबित होते हैं, उन केसों का 81 से 84 परसेंट हिस्सा OBC समाज के लोगों पर दर्ज होता है। यादवों पर, जाटों पर, गुर्जरों पर, कुर्मियों पर, कुशवाहा पर, ये सभी लोग OBC हैं। तो भाई, आप लोग इनके द्वारा सबसे ज्यादा पीसे जा रहे हो। इसमें आपको आगे आना चाहिए, और इसके साथ ही OBC समाज के हर उस व्यक्ति को आगे आना चाहिए जिसे लगता है कि इस तरह के एक्ट से समाज विभाजित हो रहा है।
आप खुद को केवल 'यादव' तक सीमित कर लेते हैं, लेकिन यादव भाई, मैं जानता हूँ कि यादव समाज सबसे धार्मिक समुदायों (one of the most religious clans) में से एक है, बिहार में भी और यूपी में भी। अक्टूबर 2024 में डासना में जब जुबैर के ट्वीट के बाद दस हजार की भीड़ पहुँच गई थी, तब यादव भी वहाँ डटकर खड़े थे, वही मंदिर को बचा रहे थे। तो भाई, आप भी इसमें आगे आओ। आप लोग इस एक्ट के तहत सबसे अधिक टारगेट होते हैं। आखिर इसे चाहता कौन है? कौन कहता है ये सब करने के लिए?
कहीं एक जगह ऐसा होता होगा कि आप किसी को घोड़ी चढ़ने से रोक रहे होंगे, लेकिन उसे सौ बार इस तरह से दिखाया जाता है जैसे कि हर यादव, हर OBC उन्हें घोड़ी पर चढ़ने नहीं दे रहा।
जबकि ऐसा तो है नहीं। तो जब अपवादों (exceptions) को उदाहरण बनाकर आपके पूरे जाति समूह को, आपकी पूरी जाति को अपमानित किया जाता है, तो यह आपके लिए भी उचित सलाह है कि आप आगे आइए। क्या जातिवाद आपके खिलाफ नहीं होता है? 'OBC Atrocity Act' क्यों नहीं होना चाहिए? 'सवर्ण Atrocity Act' क्यों नहीं? क्या यादवों को 'गँवार' और इस तरह के अन्य आक्षेप नहीं सहने पड़ते हैं? आखिर ऐसी कौन सी जाति है जिसके ऊपर जातिवादी टिप्पणी नहीं होती है?
जब ब्राह्मणों को नहीं छोड़ा जा रहा है, उन्हें 'ब्राह्मणवादी', 'भिखमंगा', 'मनुवादी' और पता नहीं क्या-क्या बोला जाता है, और वो सब के सब नेगेटिव इंटेंट (negative intent) के साथ बोले जाते हैं। फिर आप क्यों अपने आपको इससे अलग रखकर चल रहे हो? OBC समाज should be the first in line.
भाई, ये जो भी जातिवाद के उदाहरण रखते हैं, उन्हें देखने की जरुरत है। और आपका कटऑफ भी अब जनरल के बराबर ही आ रहा है, तो आपके लिए तो वैसे भी आरक्षण का उतना अधिक मतलब रह नहीं गया है। तो चाहे आरक्षण की बात हो या SC/ST Atrocity Act की, या फिर अभी आपको लग रहा होगा कि 'चलो भाई, UGC में हम तो बचे हुए हैं', लेकिन यदि कोई SC/ST आपसे बदला लेना चाहे, तो वह आपका भी जीवन खराब कर सकता है। You are not protected from the SC/ST Act. या जो UGC regulations 2026 हैं, उनमें भी आपको कोई प्रोटेक्शन नहीं है।
आपके पास सिर्फ इतनी प्रोटेक्शन है कि यद��� आप पर कोई जातिवादी टिप्पणी करेगा तो आप भी काउंटर कर सकते हैं; काउंटर ही नहीं, आप भी जाकर शिकायत कर सकते हैं। But as such, यदि कोई SC/ST आप पर झूठा आरोप लगा दे, तो आप भी फँस जाओगे।
इस बात को समझो and come into this; oppose these shitty regulations and these acts, जो समाज को विभाजित करने में लगे हुए हैं। And leftists are having a bloody field day. They are laughing and having a great time at our expense. इस बात को समझिए और साथ आइए।