वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
अर्थ - घुमावदार सूंड वाले, विशाल शरीर काय, करोड़ सूर्य के समान महान प्रतिभाशाली।
मेरे प्रभु, हमेशा मेरे सारे कार्य बिना विघ्न के पूरे करें (करने की कृपा करें)॥
#ganeshji
नमस्कार ! मैं बिहार हूं , मै देश की सबसे पुरानी विरासत संजो के बैठा हूं , मैं बुद्ध की धरती हूं , इतिहास में मै राजा था , मैं अखंड भारत पर एकछत्र राज करता था ,
आजादी की लड़ाई में भी मैने बढ़ चढकर हिस्सा लिया , लेकिन आजादी के बाद मुझे क्या मिला ?
लोग मुझे बिहारी कहकर चिढ़ाते हैं , जिस शब्द पर मुझे गर्व होने चाहिए वो शब्द आज ��ेरे लिए गाली बन चुका है ,
आज मेरे बच्चे ट्रेनों के बाथरूम में लटककर पंजाब , दिल्ली , गुजरात , तमिलनाडु और मुंबई कमाने जाते हैं और वहां तमाम तरह के आरोप और प्रत्यारोप झेलते हैं, अब तो भाषा के नाम पर हमारे ऊपर एक नए तरह का शोषण हो रहा है ,
हमारे गांव के गांव पलायन की वजह से वीरान हैं,हमारे प्राइमरी स्कूलों और अस्पतालों की स्थिति बद से बद्तर होती जा रही है , हमारी बहुएं त्यौहार का इंतजार करती हैं कि प���ि अब कमाकर लौटेंगे , लॉकडाउन में हम ट्रेनों से कुचल दिए जाते हैं,
लेकिन हमारे विधानसभाओं और लोकसभाओं से जीतने वाले प्रत्याशी ,पूर्व में मुख्यमंत्री बनने वाले और उनके बच्चे ऐशो आराम की जिंदगी जीते हैं , उनके अनपढ़ और गंवार बच्चे हमपर राज करते हैं,
क्योंकि जब लोकतंत्र का पर्व आता है तो हम शिक्षा , स्वास्थ्य और रोजगार भूलकर जाति और धर्म में बंटकर वोट डालते हैं और फिर भेड़ बकरियों की तरह ट्रेन में चढ़कर कमाने चले जाते हैं ,
मैं बिहार हूं , हर रोज पिछड़ रहा हूं , मुझे बचा लो , अपने नेताओं से सवाल पूछो , उनसे शिक्षा स्वास्थ्य रोजगार और न्याय व्यवस्था दुरूस्त करने की बात करो ,मैं वेंटिलेटर पर हूं आखिरी सांसे ��िन रहा हूं , मुझे बचा लो ।
उत्तराखंड के चमोली ज़िले की निजमुला घाटी का यह वीडियो है, जहाँ आपदा और टूटी-फूटी सड़कों के बीच ग्रामीण एक बीमार महिला को पैदल डंडी क��� सहारे अस्पताल तक ले जा रहे हैं।
यह दृश्य सिर्फ़ एक महिला की मजबूरी नहीं, बल्कि उन हज़ारों पहाड़ी परिवारों की सच्चाई है, जो आज भी बुनियादी ��्वास्थ्य सुविधाओं से दूर हैं।
जिस राज्य के लोगों ने अलग उत्तराखंड की लड़ाई लड़ी, जिनके अपनों ने अपने बलिदान से यह राज्य बनवाया आज वही लोग छोटी-छोटी बुनियादी सुविधाओं के लिए भी तरस रहे हैं।
वीकेंड पर यहाँ घर बनाने या “mountains are calling” का स्टेटस लगाने वालों के लिए यह वीडियो एक आईना है। यह दिखाता है कि असल पहाड़ की ज़िंदगी कैसी है और यहाँ के लोग किन हालात से रोज़ गुज़रते हैं।@pushkardhami @drdhansinghuk
#Uttarakhand #Chamoli
चुनाव से पहले खुद को योग्य, शिक्षित, कर्मठ और जुझारू बताने वाले…
और अब जब आपदा में इन्हें ढूंढा जा रहा है, ये नेपाल के काठमांडू में होटल में नाचते हुए जश्न मना रहे हैं।
थलीसैंण ब्लॉक का एक बड़ा हिस्सा आपदाग्रस्त हो गया है। गांवों में जगह-जगह ग्रामीणों को भारी क्षति पहुंची है। चार मजदूर घायल हैं, पांच मलबे में बह गए हैं।
इस दुख की घड़ी में नवनिर्वाचित क्षेत्र पंचायत सदस्यों और जिला पंचायत सदस्यों को पीड़ितों की मदद के लिए सबसे आगे होना चाहिए था।
लेकिन दुर्भाग्य देखिए थलीसैंण से आया एक वीडियो दिखाता है कि नवनिर्वाचित कई क्षेत्र पंचायत सदस्य, कुछ के पति और एक पूर्व ब्लॉक प्रमुख, काठमांडू के एक होटल में जश्न मना रहे हैं।
📹 वीडियो क्रेडिट: मनोहर बिष्ट जी
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