ये पुलिस वा��े है या गुंडे ? कैसे एक लड़की को दोनों पुलिस वाले लात मार रहे हैं।
क्या ये महिला सुरक्षा पर खतरा नहीं ?
ऐसे गुंडे जो वर्दी का जोर दिखा रहे हैं इनको स्पेंड क्यों नहीं किया जाता ?
सड़क किनारे बेसहारा मिली बुजुर्ग महिला ��े बताया कि अपने ही बच्चे उन्हें मारते हैं और खाना तक नहीं देते। माता-पिता को सम्मान और प्यार देना हम सभी की जिम्मेदारी हैं
चुपके से बगल के लोग विडियो बना रहे थे,
ये महिला अपने मासूम बच्चे को आखिर क्यों मार रही है?
ऐसी ज़ालिम महिलाओं को तो बेऔलाद होना चाहिए,
क्या इसकी वजह इसका बॉयफ्��ेंड है?
अपने ही बच्चे की ही दुश्मन बन गई🤔
@NituyadavUP@Rudhrayadav001 पहले आप जैसी फेमिनिस्ट लोगों को इस देश से नि��ाल देना चाहिए जो भारतीय संस्कृति को आजादी का हवाला देकर वेश्यावृति को बढ़ावा देती हैं।
जाना ही हैं तो mutual divorce लेकर जाए न।
ऐसे लोगों को रख भी कौन रहा है।
23 साल की उम्र में जिस युवक को झूठे बलात्कार मामले में जेल भेज दिया गया, उसने 20 साल सलाखों के पीछे गुज़ार दिए।
इस दौरान उसके माता-पिता और बड़े भाई का निधन हो गया, लेकिन वह अंतिम संस्कार तक में शामिल नहीं हो सका।
समाज की बदनामी के कारण वह शादी भी नहीं कर पाया।43 साल की उम्र में जाकर वह आज़ाद हुआ।
अधिवक्ता श्वेता सिंह राणा ने अदालत में साबित किया कि मामला पूरी तरह झूठा था।
ये सिर्फ़ एक व्यक्ति की कहानी नहीं,
ये हमारी न्याय व्यवस्था पर एक कड़ा सवाल है।
सवाल सिर्फ भारत का नहीं पूरे विश्व से है कि सारे के सारे सोशल मीडिया और अन्य बड़े प्लेटफॉर्म अमेरिका से ही क्यों हैं....?
ट्विटर (X) - अमेरिका
फेसबुक - अमेरिका
इंस्टाग्राम - अमेरिका
टिकटोक - अमेरिका
यूट्यूब - अमेरिका
मैसेंजर - अमेरिका
गूगल - अमेरिका
माइक्रोसॉफ्ट - अमेरिका
जीम��ल - अमेरिका
इन जैसा या इनसे बेहतर अमेरिका के अलावा और कोई क्यों नहीं बना पाया...?
ममता बनर्जी, महुआ मोइत्रा और सागरिका घोष के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल का शरिया राज्य में तब्दील होना एक भयावह वास्तविकता है
जिसके प्रति सभी उदार भारतीयों को जागरूक होने और इसका जोरदार ढंग से सफाया करने की आवश्यकता है।
@narendramodi माननीय श्री नरेन्द्र मोदी जी हमारा देश स्वदेशी को जरूर चुनेगा पर उससे पहले हम ये जो भी पोस्ट विदेशी सोशल मीडिया पर कर रहे हैं इसे रोकना होगे और अपना स्वदेशी सोशल मीडिया लाना होगा ।🙏
हमारा देश किसी से कम नहीं है और ना ही किसी से पिछे हैं।🙏
बिहार में TRE-4 के प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस की बर्बर लाठीचार्ज ने बड़ा सवाल खड़ा किया है। क्या सरकार छात्रों की आवाज़ से इतनी डर गई है? नौकरियों के सपनों को लाठियों से कुचला नहीं जा सकता। लोकतंत्र में युवा की मांग सुनी जाती है, दबाई नहीं जाती।
लेकिन BJP या NDA के र���ज में ऐसी तस्वीरें आम हो चुकी हैं।
पटना में TRE-4 एग्जाम को लेकर हज़ारों छात्र सड़क पर उतरे। उनकी माँग है कि वादे के अनुसार 1.20 लाख पदों का नोटिफिकेशन 15 सितंबर से पहले जारी किया जाए..!
रोज़गार मांगने पर मिलती है लाठी,
अधिकार की जगह मिलता है अत्याचार।
बिहार के युवा अबकी बार इस गुNDA सरकार को उसकी असली जगह दिखाएंगे - उल्टी गिनती चालू हो गई है।
अजीब इत्तेफाक है ! छात्र नेता का कमीज फाड़ दिय��� गया और उसके न्याय हित में अभ्यर्थी एक ट्वीट को रीट्वीट नहीं कर पा रहा है!
जमाना स्वार्थी हो चुका है क्या??