यह सब बहुत चुपचाप होता है। न कोई ���ोर, न विदाई के फूल।
बस एक सुबह आप देखते हैं कि घर में किसी की आवाज़ कम हो गई है। हर सुबह अख़बार अब वैसा नहीं फरफराता, घर के मंदिर की घंटी वैसे नहीं बजती और आँगन की वो कुर्सी, जो सूरज की तरफ़ मुड़ी रहती थी वो अब खाली हो चुकी है।
यही नया भारत है।
अगले दस–पंद्रह सालों में एक पूरी पीढ़ी धीरे-धीरे विदा हो जाएगी।
वो लोग, जिन्होंने हमारी सुबहें बनाई, हमारे संस्कार सँवारे, और हमें सिखाया कि जीना और अच्छा लगना यह दो अलग बातें हैं। कोई गलत और सही नहीं होता, बस अलग होता है।
वे जो रात को जल्दी सोते थे और भोर होते ही उठते, तुलसी को पानी देते, मंदिर जाते, राह में हर किसी से मुस्कराकर मिलते थे।जिनके लिए हर भ��जन ईश्वर को याद किए बिना पूरा नहीं होता था।
त्योहार उनके लिए सजावट नहीं बल्कि संबंधों की सजावट थे।दीये जलते थे, पर उजाला रिश्तों में होता था। रंग उड़ते नहीं दिल में बस जाते थे। मेहमान आते थे, तो घर में जगह नहीं, दिल में जगह ��नाई जाती थी।
वे न “रूटीन” के पीछे भागे, न “वेलनेस” के और उनका अनुशासन ही उनकी साधना था। उनकी सादगी ही उनका वैभव थी। अगर आपने उनके साथ कुछ साल गुज़ारे हैं, तो आपको वो जीवन याद होगा।
घर के आँगन में अचार की खुशबू, सिलबट्टे की खट–खट आवाज़,
डायरी में नीली स्याही से लिखे नंबर, और हर एकादशी–अमावस्या का ज़िक्र, जिसमें समय भी भक्ति बन जाता था।
पुरानी चप्पलें, मोटे शीशों वाला चश्मा, और चेहरे पर वो सुकू�� जो किसी ऐप से डाउनलोड नहीं होता। वो लोग कम बोलते थे, पर हर शब्द में स्थिरता थी। वो दिखाते नहीं थे, बस करते थे।
अब धीरे-धीरे, एक-एक कर के, वे जा रहे हैं और उनके साथ ही जा रहा है एक जीवन-दर्शन!
जहाँ जीवन में संतोष था, दिखावा नहीं, विश्वास था, पर क��्टरता नहीं और प्यार था, पर सौदा नहीं। जब वे नहीं रहेंगे, तो केवल लोग नहीं जाएँगे। उनके साथ एक लय चली जाएगी, जिसमें भारत साँस लेता था।
अगर आपके घर में आज भी कोई ऐसा है तो उनके पास बैठिए।
बात कीजिए। सुनिए उनको!
क्योंकि वे सिर्फ़ यादें नहीं हैं, वे संस्कार हैं। वे हमारी कहानी के आख़िरी जीवित अध्याय हैं। हमारे पूर्वज हमारे अतीत नहीं हैं।
वे हमारा नक्शा हैं। वे बताते हैं हम कहाँ से आए हैं ताकि हम रास्ता न भूलें।
उनसे सीखिए।
उनकी सादगी में गहराई है और उनकी चुप्पी में उत्तर हैं।
उनकी आँखों में वो शांति है, जो आज के समय में दुर्लभ हो चुकी है।
इससे पहले कि यह युग पूरी तरह चला जाए, थोड़ा रुकिए और बस थोड़ा सा झुकिए।
और याद रखिए बस एक बात!
"सादगी भी एक विलासिता थी, जिसे हमने आधुनिकता की भीड़ में खो दिया।"
BE A DURGA !! EVERY GIRL HAS DURGA WITHIN.
May maa durga bless our girls with immense power to fight against injustice and to protect themselves.
Empowering yourself is the only WAY.
#BURNINGWESTBENGAL#JusticeForWomen