पहली बार ऐसा दिखाई पड़ रहा है कि एक आदमी के चलते पूरी शिक्षा व्यवस्था खोखली होती दिख रही है।
Education system से लेकर Exam System तक, सब तमाम सवालों के घेरे में हैं। Special Protest सिर्फ एक आदमी के इस्तीफे को लेकर हो रहे हैं।
मगर ऐसा क्या है कि धर्मेंद्र प्रधान को नहीं हटाया जा सकता, चाहे देश का भविष्य दांव पर हो ,युवाओं के भविष्य के चलते!
ये बात एकदम समझ से परे है। हर अति का अंत है और जल्दी ही सरकार को इन्हे हटाना होगा। कोई शिक्षित आदमी ही अब देश की शिक्षा ��ी जिम्मेदारी लेगा।
अगला नंबर रेल मंत्री और वित्तमंत्री का आना है |
विकसित भारत क़ि दिशा देश का युवा तय करेगा |
जिस घपले-घोटाले की सज़ा शिक्षामंत्री को मिलनी चाहिए उसकी सज़ा शिक्षक को क्यों दी जा रही है।
भाजपा अपनी कमियों, कमज़ोरियों और भ्रष्टाचार के लिए हमेशा ही किसी और को निशाना बनाती है। कभी ‘द��नाजीवी’ तथाकथित पत्रकारों से मीडियाबाज़ी करवाकर शिक्षा से जुड़े यूट्यूबर्स पर बेबुनियाद आरोप लगवाती है और कभी उनके शैक्षिक संस्थान बंद करवाती है। इसके लिए भाजपा संस्थान के भवनों के अवैध निर्माण का बहाना बनाती है। अगर कोई अवैध निर्माण हुआ है तो हम ‘प्रयागराज विकास प्राधिकरण’ के उन सभी अधिकारियों के निलंबन और उनसे वसूली की माँग करते हैं, जिनके समय में ये निर्माण हुआ या फिर जिन्होंने आज तक उस पर आपत्ति नहीं की। 24 घंटे में इस कार्रवाई की रिपोर्ट जनता के सामने रखी जाए।
भाजपा शिक्षा, शिक्षक और शिक्षार्थियों की विरोधी है। देश के इतिहास में अब ये पहली बार होगा कि शिक्षा के मुद्दे पर चुनाव लड़ा जाएगा। प्राइमरी के सरकारी स्कूलों को बंद करने; यूनिफ़ॉर्म, स्टेशनरी, मिड-डे मील जैसे घोटालों से लेकर कॉपी की हेराफेरी व भ्रष्ट-मूल्यांकन, पेपर लीक, प्रतियोगी परीक्षाओं में आरक्षण की हक़मारी, हर संभव परीक्षा धांधली, रिजल्ट में बेईमानी व कोर्ट में परिणाम फँसाने की भाजपाई चालबाज़ी जैसे विषयों पर चुनाव होगा और जनता भाजपा को हमेशा के लिए बाहर कर देगी।
जब भाजपा के राज में विकसित भारत के झूठ का इतिहास लिखा जाएगा, तब क्या एक बेबस बेटी का ये ‘आख़िरी ख़त’ भी लगाया जाएगा।
भाजपा समर्थकों से सीधी अपील : क्या ये पत्र भी आपकी आँखें नहीं खोल सकता है?
#NEET#NEET_LEAK#CBSE
हम नहीं चाहते हैं कि समाज के बीच आग जले। हम चाहते हैं समाज में सौहार्द की फुहार हो। हमारी सकारात्मक राजनीति की स्वस्थ परंपरा ने हमें यही सिखाया है। इसीलिए हम भाजपा विधायक श्रीमत��� अनुपमा जायसवाल जी से मिलने गये और उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करके आएं हैं। राजनीति अपनी जगह है और मानवीय संबंधों का महत्व अपनी जगह।
सद्भाव बना रहे, सौहार्द बना रहे!
आज अभिनेता से लेकर बड़े बड़े दिगज़्ज़ खिलाड़ी आज देश मैं हो रहे अन्याय और अत्याचार के ख़िलाफ़ बोलना छोड़िये लिख नहीं पा रहे है, 2014 से पहले भले ही सब कुछ ख़राब रहा हो मगर ये आज़ादी ज़रूर थी कि सब बोलते थे आवाज़ उठाते थे सरकारो से सवाल पूछते थे और सरक���रें दबाब भी महसूस करती थी और जवाब भी देती थी । आजकी सरकारो के लिए जनता सिर्फ़ वोट लेने की मशीन और tax कमाने जा ज़रिया मात्र है । याद रखना दोस्तों -
जब न्याय सत्ता की जेब में चला जाये
तो अकेला कोई बलात्कारी ही सिर्फ अपराधी नहीं बल्कि पूरी व्यवस्था की उसमे साझेदारी है ।।
अच्छा राम राज्य है - जहाँ एक rape पीड़ि��ा को न्याय के लिए सड़को पे उतरकर सुरक्षा के लिए बनी police से ही भिड़ना पड़ रहा है और तमाम intellectual वर्ग मूक बनकर बैठा है ।।
bulldozer क्या बस ग़रीब की छत पे चलने के लिए है , बड़े गुनहगार के घर पहुचते ही तो डीजल खत्म ।।
@narendramodi साहब कुछ रहम कीजिये 🙏
#JusticeForUnnaoVictim
आत्म-स्वीकृति!
किसी को उम्मीद नहीं थी कि दिल्ली-लखनऊ की लड़ाई यहाँ तक पहुँच जाएगी। संवैधानिक पदों पर बैठे लोग आपस में कुछ तो लोक-लाज रखें और मर्यादा की सीमा न लाँघें। भाजपाई अपनी पार्टी के अंदर की खींचातानी को चौराहे पर न लाएं। कहीं कोई बुरा मान गया तो वापस जाना पड़ेगा।
आज PDA(जन कर्त्तव्य जागरुकता) Public Duty Awareness कार्यक्रम के तहत सिकंदराबाद विधानसभा के गाँव रजपुरा और शेरपुर में सफ़ाई,वृक्षारोपण और आर्थिक रूप से कम��़ोर छात्रों के लिए मुफ्त शिक्षा अभियान को अपनी टीम और ग्रामवासियों के साथ मिलकर पूरा किया…हम सबका अपने परिवेश और समाज के प्रति ये कर्त्तव्य बनता भी हैं….
आप भी कमजोरों को आगे बढ़ायें…सफ़ाई करें…और प्रकृति के लिए वृक्ष लगायें…..
हमेशा आपके आशीर्वाद का आकांक्षी🙏
अमिताभ ठाकुर ने कफ सीरप मामले पर आवाज उठाई, मुख्यमंत्री के स्वजातीय माफिया और मुख्यमंत्री के खासमखास लोगों की संलिप्तता के सबूत पेश किए।
परिणामस्वरूप एक अति पुराने और औचित्यहीन मामले में भाजपा सरकार ने अमिताभ ठाकुर को गिरफ्तार करवा दिया और फंसा दिया है।
मुख्यमंत्री जी जब जब ��वाब देने में फंसते हैं तब तब अलोकतांत्रिक कार्य करते हैं।