@JPNadda देश के लगभग 1.80 लाख कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (CHO) वर्षों से संविदा पर रहकर प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूत नींव बने हुए हैं, फिर भी उनका भविष्य आज भी असुरक्षित है।
CHO का नियमितीकरण केवल कर्मचारियों का नहीं, बल्कि देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने का विषय है।
@JPNadda देश के 1.80लाख कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (CHO) संविदा पर हैं।वर्षों से प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ बनने के बावजूद उनका भविष्य आज भी असुरक्षित है।
जब तक CHOs को नियमित नहीं किया जाएगा, तब तक "स्वस्थ भारत" का सपना अधूरा रहेगा।
सुरक्षित CHO=मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था।
#ParmanentCHOs
@JPNadda देश के 1.80 लाख कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (CHO) संविदा पर हैं। वर्षों से प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ बनने के बावजूद उनका भविष्य आज भी असुरक्षित है।
जब तक CHOs को नियमित नहीं किया जाएगा, तब तक "स्वस्थ भारत" का सपना अधूरा रहेगा।
सुरक्षित CHO = मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था।
@JPNadda देश के 1.80 लाख कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (CHO) संविदा पर हैं। वर्षों से प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ बनने के बावजूद उनका भविष्य आज भी असुरक्षित है।
जब तक CHOs को नियमित नहीं किया जाएगा, तब तक "स्वस्थ भारत" का सपना अधूरा रहेगा।
सुरक्षित CHO = मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था।
स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए पहली बार प्राइमरी, सेकेंडरी और टर्शियरी हेल्थ केयर के बीच बेहतर लिंकेज और संतुलित दृष्टिकोण अपनाया गया।
1.81 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के माध्यम से देशभर के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का पहला संपर्क बिंदु मजबूत किया गया, ताकि लोगों को सही समय पर सही इलाज और रेफरल मिल सके।