The protest may be over, but a lot of these students don’t have a way back home.
We’re giving out free train tickets. Whatsapp on +91 99906 91313
@Hemkunt_Fdn is still standing with you. Our Sewa doesn’t get over until every single kid reaches home safely.
Please donate https://t.co/itDxy9L2DY
People at the CJP protest have found unique ways to participate. Some protesters are distributing lozenges, umbrellas, portable chargers for the convenience of fellow protesters
Full video: https://t.co/KKqcn8Jsqn
Janta Metro | The following stations will remain shut till further notice:
- Democracy
- Decency
- Free Speech
- Free Media
- Right to Protest
- Secularism
- Equality
- Fraternity
Mumbai street artist Tyler reflects on how a stencil created to question power evolved into a widely recognised symbol at the Jantar Mantar NEET protest, highlighting the role of street art in public discourse.
✍️ Sanjana Ganesh, Barry Rodgers
https://t.co/PbP8thhLOg
Is your police trained to hit people on the head? Especially women?? What orders did you give them @DelhiPolice ? Since you have been quick to clarify- do tell us!
पैलेट गन की गोलियों से छलनी हुआ आउटलुक का पत्रकार अब अस्पताल से घर तो लौट आया है, लेकिन उसका दर्द अभी भी कम नहीं हुआ है. उसके शरीर में अभी भी छर्रे फंसे हुए हैं.
पत्रकार को डॉक्टरों ने उसके शरीर में फंसे छर्रे दिखाए. खुद पत्रकार ने 25 से 30 छर्रो को गिना.
डॉक्टरों का कहना है कि छर्रों को निकालने के लिए चीरा लगाना पड़ेगा, जिससे फायदा कम नुकसान ज्यादा है. ऐसे में बेहतर ये होगा कि इन्ह��ं शरीर के अंदर ही रहने दिया जाए.
सवाल ये है कि आखिर पैलेट गन चलाने की इजाजत किसने दी?
छात्रों की समस्या का समाधान मिल गया है।
शिव खेड़ा ने कहा था- जीतने वाले कोई नया काम नही करते, वे वही काम नए तरीके से करते हैं। प्रधानसेवक ने भी अपनी गलती ��मझ ली। व्हाट्सप से बात नही बनेगी। प्रचार वे नए तरीके से करेंगे।
पार्टी को इंस्टा पर जाना होगा।
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वैज्ञानिक हर समस्या का वैज्ञानिक समाधान खोजता है। समाजशास्त्री, समाज के विभिन्न वर्गों की डायनामिक्स में समाजशास्त्रीय विश्लेषण करता है।
एक बार तो हमारे यहां इकॉनमिस्ट प्रधानमंत्री भी हुआ। मुंडी झुकाए खटता रहा, यह सोचकर, कि इकॉनमी सुधर जाए, तो देश तर जाएगा। गलत था। जेब मे पैसे हों न हो, प्रचार भरपूर होना चाहिए।
तो देश ने उसकी जगह प्रचारक चुना। अब जाहिर है, प्रचारक हर संकट में यही सोचेगा कि उसके प्रचार में कहां कमी रह गयी। सो पेपर लीक और एजुकेशन सिस्टम कोलैप्स हुआ, तो निष्णात प्रचारक ने तुरंत पकड़ लिया- मंत्रीगण ��ंस्टा पर पिछड़ गए हैं।
चलो इंस्टा!!
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ठीक वैसे ही जैसे सुभाष चन्द्र बोस ने आजाद हिंद फौज के सेनानियों को कहा था- चलो दिल्ली।
सोचता हूँ, अगर वे आज भाजपा सरकार में मंत्री होते, तो क्या कहते। शायद रात तक उनका ट्वीट आता- तुम मुझे लाइक दो, मैं तुम्हे रील दूंगा। उधर लोकमान्य तिलक कहते- स्वरील मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं वायरल होकर रहूंगा।
लालबहादुर शास्त्री, जय जवान, जय किसान नही कहते। इनका स्टेटस होता- जय रील , जय इंस्टाग्राम!! स्वामी विवेकानंद, हालांकि इनके साथ मंत्री न बनते, लेकिन जबरन कल्पना कर ही लें, तो उनका नारा होता-
उठो, जागो, रील बनाओ,
और वायरल होने तक मत रुको।
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दरअसल, फेसबुक, ट्विटर, थ्रेड्स, कू, इंस्टा-इतने सारे सोश�� मीडिया प्लेटफार्म हो गए हैं, की सरकार के लोग करे तो क्या क्या करे?वन नेशन, वन प्लेटफार्म की नीति लाने का यही वक्त है।
सरदार पटेल ने जिस तरह देशी रियासतों का एकीकरण किया था, मोदी जी को चाहिए कि सभी सोशल मीडिया प्लेटफार्म का एकीकरण कर दें।
वन लॉगिन, वन पासवर्ड।
���ज ऑफ बीइंग सोशल..
मोट्टो यही- भारत को एक इंस्टा अकाउंट में पिरोऊँगा।
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आठवीं सदी में शंकराचार्य ने भी कहा था- जगत मिथ्या है, इंस्टा ही सत्य है। सच्चा हिन्दू वही है, जिसने इंस्टा पर मोदी जी को फॉलो किया है।
दरअसल आधार, पासपोर्ट, वोटर आईडी सबके खारिज होने के बाद, इंडियन सिटिजनशिप का कोई प्रमाण होगा, तो वह इंस्टा पर आपकी प्रधानसेवक की प्रोफाइल की फॉलोइंग शिप होगी।
नागरिक को अपना आधार नम्बर, इं��्टा से लिंक करना होगा। जिसमें रोज हर पोस्ट लाइक करके, आप अपनी सिटिजनशिप रिन्यू करेंगे। फॉलो न करने वाले SIR में कट जाएंगे, फिर अपना और अपने बाप का इंस्टा आईडी लेकर BLO के चक्कर लगाते रहना।
लेकिन बेहतर समर्थन का ईनाम भी मिलेगा। पिछली बार एक देशभक्त मुस्लिम को, इसीलिए तो राष्ट्रपति बनाया गया था।
याद है? उन्होंने मशहूर बयान दिया था - रील्स वो नहीं जो फीड में आते हैं, सच्ची रील्स वो हैं जो स्क्रॉल करने नहीं देते।
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आदेश के बाद इंस्टा लोक में बंदनवार सजे हुए है। हर्ष का माहौल है। सकल कूचों में गीत गूंज रहा है- जो राम को लाये है..
वही रील को लायेंगे।
🙏❤️
गोदी चैनलों को कवरेज सुधारने का फ़रमान !!
सूत्र ने एक बहुत ही दिलचस्�� बात बतायी है। वो ये कि अंदर इस बात का आंकलन है कि टीवी चैनलों ने जिस तरह की कवरेज की है उससे असंतोष और बढ़ा है।
सूत्र ने दावा यहाँ तक किया है कि उनको ज़रूरी निर्देश दिए जा चुके हैं और कवरेज ‘सुधारने’ को कहा गया है।
‘अधिक से अधिक धर्मेंद्र प्रधान तक बात रुक जाए’ इस हिसाब से चलने को कहा गया है
सूत्र का दावा है कि ‘जिन चैनलों को आप लोग गोदी चैनल कहते हैं, उनकी कवरेज में आ रहे बदलाव को नोट कीजिएगा��
जंतर-मंतर अब सिर्फ़ दिल्ली का नहीं रहा। उसकी प्रतिध्वनि अब देश के हर शहर में सुनाई दे रही है।
ले मशालें चल पड़े हैं लोग मेरे गाँव के,
अब अँधेरा जीत लेंगे लोग मेरे गाँव के।
#StudentProtest#JantarMantar
Real face of Delhi Police
That student first joined hands, then began to take the hits. When Delhi policeman realised that body hits are not working, he hit him right in the face with the rod.
Guy dropped unconscious the very next moment. MP Renuka Chowdhury and others came for his rescue.
And CJI doesn’t have time for this
वे डरते हैं
किस चीज़ से डरते हैं वे
तमाम धन-दौलत
ग���ला-बारूद पुलिस-फ़ौज के बावजूद?
वे डरते हैं
कि एक दिन
निहत्थे और ग़रीब लोग
उनसे डरना बंद कर देंगे।
~ गोरख पांडेय
संसद मार्च के दिन, जब पुलिस की बर्बरता चरम पर थी, बच्चियों और निहत्थे छात्रों पर लाठियाँ बरसाई जा रही थीं, उनके सिर फोड़े जा रहे थे, तब जान बचाने के लिए कुछ छात्र इधर-उधर भागे और जहाँ भी शरण मिल सकती थी, वहाँ पहुँचने की कोशिश की।
कुछ छात्र कनॉट प्लेस के हनुमान मंदिर पहुँचे। आरोप है कि मंदिर के पुजारियों ने मुख्य द्वार बंद कर दिया और उन्हें अंदर नहीं आने दिया। यही वे मंदिर हैं जो धर्म और इंसान की रक्षा का दावा करते हैं। ज़रा सोचिए, जनता के चंदे से बने और जनता के पैसे से चलने वाले मंदिर किसी की निजी संप��्ति नहीं हैं।
उसी दौरान, गुरुद्वारों ने अपने दरवाज़े खोल दिए और छात्रों को शरण दी। एक अस्पताल में भी कुछ छात्र पहुँचे। सा��ने आए वीडियो के अनुसार, अस्पताल के स्टाफ ने दरवाज़े बंद रखे। पुलिस लगातार दरवाज़े खुलवाने की कोशिश करती रही, स्टाफ पर दबाव डालती रही, लेकिन उन्होंने दरवाज़े नहीं खोले।
इसी मंदिर और धर्म के नाम पर आपको बरगलाकर भाजपा सत्ता में आई है। अब देख लीजिए कि धर्म और मंदिर आपके और आपके बच्चों की रक्षा कैसे कर रहे हैं।
अभी भी समय है। अस्पताल, स्कूल और शिक्षा जैसे असली मुद्दों पर बात कीजिए। सरकार से जवाबदेही माँगिए।
जिन गधो ��े कार्टूनिस्टों को इस बात के लिए अदालतों में खींचा कि उन्होंने कार्टून बना कर मोदी या आरएसएस का अपमान किया।
जिन जजों ने कार्टूनिस्टों को ज्ञान देने की कोशिश की कि कार्टून कैसे बनाए जाने चाहिए।
उन पर हंसने का दिन है आज। देखिए मोदी और आरएसएस पर कैसे-कैसे मीम बना रहा है युवा। कुछ तो सीधे गाली दे रहे हैं।
उखाड़ लीजिए जज साब जो ��खाड़ सकते हैं इन लोगों का।
ये हालात दरअसल सुप्रीम कोर्ट के पैदा किए हुए हैं जिसने सरकार को अकाउंटेबिलिटी से एकदम बाहर कर दिया। और संविधान को ताक पर रख कर नागरिक को छोड़ सरकार को बार बार बचाया।
This is #Mizoram today
The people of our NE are always ♥️♥️♥️.
Thousands in Aizawl protested against #DelhiPolice excesses/the govt
“Melody Melody Melody… he has no time to visit Mizoram or #Manipur”
People sang 3 idiot songs in support of students, youth & #SonamWangchuk
मूल बात क्या है? मूल बात है कि गोदी मीडिया लोकतंत्र का हत्यारा है।
आप अगर-मगर के सहारे इससे नहीं बच सकते। क��छ अच्छे लोग हमेशा हैं, रहेंगे।उन्हें निशाना मत बनाइये, हिंसा और हुड़दंग नहीं होनी चाहिए। तब भी गोदी मीडिया की सच्चाई नहीं बदल जाएगी। जनता को हर दिन जागना होगा। आज इस मीडिया पर आप गर्व नहीं कर सकते. इसके न्यूज़ रूम के लोग भी शर्म से सहमे रहते हैं। अभी भी ज़रूरत है कि देश की हर पंचायत में पोस्टर लगना चाहिए कि गोदी मीडिया लोकतंत्र का हत्यारा है।हर पार्टी के दफ्तर के बाहर यह पोस्टर लगा होना चाहिए��� एयर पोर्ट पर स्पेस ख़रीद कर यह नारा लिखा जाना चाहिए। लोगों को अपनी कार के पीछे लिखना चाहिए। इस गोदी मीडिया ने लोकतंत्र के हर कोने में सड़न पैदा कर दी है। इसके कारण कुर्सी पर बैठा हर शख़्स ख़ुद को ख़ुदा समझ बैठा है। सांसद तक लूटे जा रहे हैं। विपक्षी पार्टियाँ लूट ली जा रही हैं। वोट का अधिकार छीना गया है। इसी मीडिया के सामने। इसलिए मूल बात है कि गोदी मीडिया लोकतंत्र का हत्यारा है।