BJP के 'जानलेवा सिस्टम' ने 5 महिलाओं को मौत के घाट उतार दिया।
मामला राजस्थान के कोटा का है, जहां सिजेरियन डिलिवरी के बाद महिलाओं को दवाई की जगह पानी का इंजेक्शन लगा दिया गया।
BJP के इस 'करप्ट मॉडल' में गरीब जनता एक भरोसे के साथ सरकारी अस्पताल जाती है, लेकिन उसे मिलती है तो सिर्फ मौत।
ये घटना BJP सरकार में स्वास्थ्य सुविधाओं के दावों की धज्जियां उड़ा रही है, जिसमे�� गरीबों को कीड़ा-मकोड़ा समझा जाता है और सत्ता में बैठे लोग मौज उड़ाते हैं।
शर्म आनी चाहिए।
राजस्थान के कोटा में सिजेरियन ड��लीवरी के बाद पांच मांओं की मौत हो गई थी. अब जांच में पता चला कि खून बहने से रोकने के लिए उन्हें जो इंजेक्शन दिए गए थे, उनमें ब्लड क्लॉटिंग कंपोनेंट नहीं था. इंजेक्शन में सिर्फ पानी था, जिस वजह से खून का बहना नहीं रुका.
यह सब कोटा के सरकारी अस्पताल 'न्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल' में हुआ. पहले राजस्थान सरकार ने नकली ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन के इस्तेमाल से इनकार किया था. लेकिन अब राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर का कबूलनामा आ गया है.
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Kota | Pregnant Women death | Fake Injection
कुछ दिन पहले सयानी घोष ने कहा था;
"मैं चड्ढा नहीं हूँ जो चड्डी बन जाऊंगी। मैं घोष हूँ।"
अपने जाति पर गुरुर करने वाली ममता बनर्जी की सयानी भी TMC के बागी सांसदों में शामिल हो गई हैं।
ममता बनर्जी ने केवल सवर्णों को ही पॉवर-पोजीशन दी थी। आज उन सबने मिलकर अपना "मेरिट" दिखा दिया।
SSC GD का पेपर कैंसिल होने पर भड़के अभ्यर्थी
◆ सेंटर पर जमकर की तोड़फोड़, कम्यूटर-AC सब चकनाचूर
◆ प्रयागराज में कई किलोमीटर दूर से परीक्षा देने पहुंचे थे अभ्यर्थी
#SSCGD | #Prayagraj | #UttarPradesh
तमिलनाडु में 14.22 लाख किसानों का लोन माफ
◆ सीएम विजय ने सीमांत किसानों का 50,000 तक का लोन माफ करने का ऐलान किया
◆ बड़�� किसानों का 5,000 रुपये तक का कर्ज माफ होगा
#TamilnaduCM | Tamilnadu CM | Farmers
���्या आपको पता है धुएँ कि भी जाति होती है 👇
मध्य प्रदेश में एक दलित की चिता जलने से केवल इसलिए रोक दी गई क्योंकि उसका धुआं “ब्राह्मणों के श्मशान” तक चला जाता…
उस पर भी शर्मनाक ये कि पुलिस भी दलित परिवार पर ही दवाब डाल रही है क्यूं की पुलिस प्रशासन खुद जातिवाद से अंदर तक सड़ा हुआ हैं।
शर्म आनी चाहिए ऐसे समाज पर, जहां मौत के बाद भी दलित को सम्मान नहीं मिलता।
ज़िंदा था तब दलित होने नाम पर भेदभाव, नफ़रत, ज��लालत, छुआछूत,
और जब मर गया तो उसकी चिता का धुंआ भी "अछूत" हो गया जो ब्राह्मणों के शमशान तक नहीं पहुंचना चाहिए वरना बेचारे मरे हुए ब्राह्मण भी अशुद्ध हो जाएंगे।
ये सिर्फ भेदभाव नहीं, ये इंसानियत की लाश पर खड़ा ब्राह्मणवाद है।
जिस समाज में मृतक की चिता का धुआं भी जाति देखकर स्वीकार किया जाए, उस समाज को सभ्य कहलाने का कोई अधिकार नहीं।
नोएडा: SSC ऑनलाइन भर्ती परीक्षा में नकल का भंडाफोड़
◆ CAPF, SSF और असम राइफल्स की ऑनलाइन भर्ती परीक्षा में नकल का भंडाफोड़ हुआ
◆ STF ने परीक्षा सेंटर पर छापा म���रकर ऑनलाइन नकल पकड़ी, 7 अरेस्ट
Noida | SSC Online Exam | STF
मुख्यमंत्री श्री @HemantSorenJMM की पहल पर शुरू हुई CM Fellowship Scheme
राज्य के छात्रों को मिलेगी PhD फेलोशिप, विदेश में उच्च शिक्षा के लिए 100% स्कॉलरशिप और शोध कार्यों के लिए वित्तीय सहायता।
माननीय प्रधानमंत्री जी की हालिया अपील ऐसे समय आई है जब देश की अर्थव्यवस्था पहले से ही दबाव में है। पिछले तीन महीनों में हमारा विदेशी मुद्रा ��ंडार लगभग $38 अरब घटकर मात्र $690 अरब रह गया है। रुपया डॉलर के मुक़ाबले ₹95 पार कर चुका है, और व्यापार घाटा लगातार बढ़ रहा है। ये केवल आँकड़े नहीं हैं, ये करोड़ों परिवारों की रोज़मर्रा की चिंता हैं।
मैं मानता हूँ कि मौजूदा हालात में अर्थव्यवस्था चलाना आसान काम नहीं है, और दुनिया भी एक कठिन दौर से गुज़र रही है।
ऐसे समय में सरकार का ध्यान मांग बढ़ाने पर होना चाहिए, मांग घटाने पर नहीं। दुनिया का आर्थ��क इतिहास हमें एक सीधी बात सिखाता है कि जब आर्थिक गति धीमी हो, तब लोगों से कम खर्च करने को कहना समाधान नहीं होता, समाधान यह है कि टैक्स में राहत देकर, छोटे व्यापारियों को सहारा देकर, मध्यम वर्ग पर बोझ कम कर आम परिवारों के हाथ में थोड़ा ज़्यादा पैसा छोड़ा जाए।
मुझे दुख इस बात का है कि हर बार किफ़ायत की ज़िम्मेदारी उसी ईमानदार करदाता पर आ जाती है जिसने कोविड के समय भी सबसे ज़्यादा सहा। उसने उस वक़्त भी पूरे भरोसे से अपनी भूमिका निभाई थी, तब भी उसके लिए राहत सीमित थी, और आज फिर उसी को बलि का बकरा बनाया जा रहा है और वो भी बिना ये बताए कि सरकार अपनी ओर से उसके लिए क्या करने जा रही है।
केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को रेवडियां बांटने वाली नीतियों पर तुरंत रोक लगानी होगी ताकि सरकारी खजाने पर बोझ कम हो सके। अगर सरकारें fiscal dicipline और productive capital creation पर ध्यान नहीं देंगी, तो थोड़े समय का राजनीतिक लाभ देश को लंबी आर्थिक कीमत चुकाने पर मजबूर करेगा।
देश को अपील नहीं, एक स्पष्ट रास्ता चाहिए। ��ोग जानना चाहते हैं विकास कैसे लौटेगा, नौकरियाँ कैसे बढ़ेंगी, और किसानों, छोटे व्यापारियों व मध्यम वर्ग को असली राहत कब मिलेगी।
सिर्फ़ नागरिकों से त्याग माँगना शासन नहीं होता। जवाबदेही, दूरदृष्टि और आर्थिक संतुलन यही असली राष्ट्रहित है।