किसी को भी गाली देना गलत है चाहे वह देश का प्रधानमंत्री हो या देश का कोई भी आम इंसान
लेकिन ये मोहतरमा कौन है जो राष्ट्रपिता को गाली दे रही हैं कार्यवाही इन पर भी होना चाहिए @delhipolice
आज संसद भवन परिसर में विपक्ष के सांसदों ने अनोखे अंदाज में चढ़ावा चोरी के खिलाफ प्रदर्शन किया।
मजे की बात यह है कि इस प्रदर्शन में पूर्णिया सांसद भगवा कपड़े पहनकर बाबा बने बैठे हैं।😀
राहुल गांधी सहित कई सारे नेता दान पेटी में कुछ पैसे चढ़ावा के रूप में चढ़ाते हैं अंत में पप्पू यादव पैसे लेकर भाग जाते हैं।😀
आखिर इन विपक्ष वालों को ये सब आइडिया दे कौन रहा है? पिछले कई सालों तमाम घटनाएं हुईं लेकिन इस तरह का प्रदर्शन मैने कभी नहीं देखा।
फिलहाल विपक्ष मजबूती के साथ लड़त��� हुआ दिख रहा है।
जिस खबर का इंतजार पूरे देश को था वो आज आखिरकार आ ही गया है।
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अप��ा इस्तीफा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को भेज दिया है।
पिछले एक महीने से उनके इस्तीफे की मांग को लेकर जगह जगह पर प्रदर्शन चल रहे थे लेकिन कयास लगाया जा रहा था कि
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं होगा। लेकिन
देश में भारी विरोध प्रदर्शन को देखते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने स्वयं अपना इस्तीफा सौंप दिया।
जिस खबर का इंतजार पूरे देश को था वो आज आखिरकार आ ही गया है।
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को भेज दिया है।
पिछले एक महीने से उनके इस्तीफे की मांग को लेकर जगह जगह पर प्रदर्शन चल रहे थे लेकिन कयास लगाया जा रहा था कि
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं होगा। लेकिन
देश में भारी विरोध प्रदर्शन को देखते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने स्वयं अपना इस्तीफा सौंप दिया।
@JaikyYadav16 पक्ष और विपक्ष दोनों मिलकर बोलना चाहिए लेकिन यहां तो अलग ही चल रहा हैं
दूसरे का घर जलता देख मज़ा तो आता ही है जब अपने घर की बारी आएगी तब गोबर भ��्तों को पता चलता है
प्रयागराज में छात्रों और युवाओं की आवाज़ उठाने वाले कोचिंग संस्थानों — क्लाइमैक्स, टारगेट विद रवि तिवारी और एग्जामपुर — को बंद कर दिया गया है। इतना ही नहीं, संस्थानों के बाहर पुलिस की तैनाती भी कर दी गई है।
सवाल यह है कि क्या युवाओं के भविष्य की बात करना अब अपराध बन गया है, क्या छात्रों के हक की आवाज़ उठाने वालों को दबाकर शिक���षा व्यवस्था मजबूत होगी।
जो लोग देश को "विश्व गुरु" बनाने का दावा करते हैं, उन्हें यह बताना चाहिए कि विश्व गुरु बनने का रास्ता शिक्षा के मंदिरों पर ताले लगाने से होकर जाता है या शिक्षा को मजबूत करने से,
युवाओं की मांगों का जवाब संवाद से दिया जाना चाहिए, दमन से नहीं। आवाज़ों को बंद करने से समस्याएँ खत्म नहीं होतीं, बल्कि व्यवस्था के प्रति अविश्वास और बढ़���ा है।
याद रखिए, जब छात्र अपने भविष्य के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हो जाएँ, तो सवाल छात्रों पर नहीं, व्यवस्था पर उठते हैं।
क्योंकि किताबों से डरने वाली व्यवस्था कभी ज्ञान का नेतृत्व नहीं कर सकती।
#indianmedia #youtubeteachers #students