🎨होली मैत्री भाव का महापर्व है!🎨
प्रिय आत्मन!
होली एक महोत्सव का त्यौहार है।
महाउत्सव का अर्थ है- हम इतने आनंद में हैं कि अपने तक समेट नही सकते, उसको बाँटना चाहते हैं..,
हम इतने प्रेम में हैं कि प्रेम की सुगंध अपने तक सीमित नहीं रख सकते हैं..!
-आनंद और प्रेम का जब उत्कर्ष होता है, तो उसका नाम उत्सव है।
-���र ह��ली केवल उत्सव ही नही हमारी संस्कृति का भी उत्कर्ष है, हमारे भीतर आनंद का भी उत्कर्ष है, हमारे भीतर छिपे प्रेम का भी उत्कर्ष है, हमारे अहंकार के विसर्जन का भी उत्कर्ष है।
-होली “मैत्री भाव” को उत्कर्ष, पराकाष्ठा पर ले जाने का पर्व है।
याद रखना- होली मैत्री भाव का पर्व है!!
-जहाँ मैत्री है वहाँ प्रसन्नता है।बिना मैत्री भाव के कोई प्रसन्न नही हो सकता है!
-यदि हमेशा खुश रहना चाहते हो तो पहले नंबर पर अपने भीतर छिपे हुए मैत्री भाव को महसूस करो और दूसरे नंबर पर सबके प्रति मैत्री भाव महसूस करो!
-यदि मैत्री भाव का यह स्वर्णिम सूत्र जीवन में उतार लिया, तो मेरी चुनौती है कि कोई उदास होना चाहे तो नहीं हो सकता है!!
🪷इस होली के अवसर पर मेरा आशीर्वाद है- कि तुम इस मैत्री भाव को महसूस करते हुए हमेशा खुशी में जियो, उत्सव में जियो, प्रसन्नता में जियो।
🤚मेरी ढेर सारी शुभकामनाएँ!💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐
~ समर्थगुरु श्री सिद्धार्थ औलिया
@SiddharthAulia
@narendramodi
@myogiadityanath
"आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम! ✨
जब समर्थगुरु सिद्ध���र्थ औलिया और कालिदास बाबा जैसे महान संयमी मिलते हैं, तो विश्व में शांति और चेतना का विस्तार होता है। दो महान विभूतियों का मिलन केवल एक मुलाकात नहीं, बल्कि ज्ञान और प्रेम की एक नई धारा है। 🙏🌸
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