मातृ समान रुक्मिणी अक्का के देहावसान ने हमारे भाव विश्व में एक शून्य का निर्माण कर दिया है। वृद्धावस्था में शरीर शांत होना स्वाभाविक ही है किंतु दशकों के परिचय, आत्मीय संबंध के कारण मन को असहनीय वेदना होती है। रुक्मिणी जी का ज्ञानानुभव संपन्न जीवन एवं व्यक्तित्व एक राष्ट्र समर्पित सार्थक जीवन का प्राज्ज्वल्यमान उदाहरण थे।
आप राष्ट्र सेविका समिति द्वारा हिन्दू समाज का संगठन एवं महिलाओं को संस्कार देना इस उदात्त कार्य में सदैव सक्रिय रहीं। उनकी सहज मातृवत् आत्मीयता और निरंतर सक्रियता सभी को प्रभावित करती थीं। उनके निधन से सेविकाएँ समेत सभी एक मातृ समान अभिभावक से वंचित हुए हैं। संघादर्श के मेरु सदृश सूर्यनारायण राव परिवार के उस पीढ़ी की आखरी कड़ी भी अब नहीं रही।
रुक्मिणी अक्का अब स्मृतिशेष हैं। उनके परिवार तथा समिति की समस्त बहनों को मेरी गहरी संवेदनाएँ व्यक्त करता हूँ। ईश्वर ��स पुण्यात्मा को सद्गति दे यही प्रार्थना है। ॐ शान्तिः।
मोहन भागवत
सरसंघचालक
दत्तात्रेय होसबाले
सरकार्यवाह
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
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