@Baliyan_x बिल्कुल चलेगा इनके लिए भी चलेगा,जो लोग ये आंदोलन चला रहे हैं वो सभी के लिए आवाज उठाएंगे,सभी जगह का हिसाब लिया जाएगा और जनता को जागृत किया जाएगा।
@Baliyan_x अब हमें टेंशन नहीं लेनी है कि किसको फायदा होगा किसको नहीं,अब तक बहुत सोच लिया हमने,अब सरकार करेगी चिंता करेगी तो, चिंता सरकार को करनी है करे तो ठीक नहीं तो जैसे अभी तक सामान्य वर्ग अनाथ है वैसे आगे भी रह लेंगे,अब हम हमारे मुद्दे उठाना नहीं छोड़ेंगे,सरकार जैसा बोयेगी वैसा काटेगीभी
@Baliyan_x जब सरकार सवर्णों की चिंता नहीं करती तो हम ये बोझ या चिंता क्यों करे कि किसको लाभ पहुँचे और किसको नहीं,सामान्य वर्ग को इस स्थिति में पहुंचाने के लिए ये ही सरकार जिम्मेदार है,जब तक दलित,शोषित,पीड़ित,वंचित करते रहोगे तब एक तबका अपने लिए भी आवाज उठाएगा समझा,इन सबकी जिम्मेदार ये ही है
@Baliyan_x भाई ओ भाई हम हमारी ऐसी तेसी करवाते रहे,सारा ठेका सवर्णों ने ही ले रखा है देश को आगे ले जाने का जबकि सबसे बुरे दौर में अगर कोई वर्ग है आज तो वो सामान्य वर्ग है,ये सरकार क्यों नहीं समय समय पर उनके लिए योजनाएं लाती,अब हम हमारे लिए आवाज उठाएंगे समझे।
UGC के सवाल पर उखड़ गए भाजपा राष्ट्रीय महासचिव
सवालों से बचते नजर आए
बीकानेर नगर निगम मेघवाल की चली
बीकानेर नगर निगम चुनाव में भाजपा ने सामान्य सीटों पर लगभग दो दर्जन ओबीसी उम्मीदवार
क्या भाजपा के पास सामान्य वर्ग के उम्मीदवार नहीं थे ?
@Baliyan_x सरकार जो चलाते हैं उन्हें सामान्य वर्ग को अछूत की तरह छोड़कर सबका ध्यान रखना पड़ता है, बालियान जी सही बोल रहे हैं,सबका में इस देश के सामान्य को छोड़कर सब आते हैं।
@Kapil_Jyani_@abhinaymaths जैसा नाम वैसा काम,ये इतना डरपोक,लीचड़ आदमी,मूर्ख,निर्लज्ज आदमी है इसकी औकात इसके ट्वीट में मैं बताता था,इस आदमी ने मुझे Block कर रखा है,बेशर्म है,पता नहीं किस का है ये
@ChiefRspDhavrai धीरे धीरे सरकार सारी मांगें मानेगी,जो भी भाई राजस्थान से हैं और मेरा ये ट्वीट देखेंगे उनसे विनती है कि राजस्थान में निकाय चुनाव हैं इन्हें सबक सिखाओ चुनावों में
आज देशभर में आरक्षण व्यवस्था, उसके लाभ, उसकी पात्रता और उसमें सुधार को लेकर अलग-अलग स्तर पर चर्चा हो रही है। मेरा व्यक्तिगत मत है कि इस विषय को केवल “आरक्षण के पक्ष या विपक्ष” के रूप में देखने के बजाय हमें सामाजिक न्याय के साथ-साथ आर्थिक न्याय और समान अवसर के दृष्टिकोण से भी देखना चाहिए।
भारत में सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए अनेक संवैधानिक एवं सरकारी व्यवस्थाएं हैं। इसी प्रकार अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग तथा अन्य वंचित वर्गों के लिए केंद्र और राज्यों में विभिन्न आयोग, निगम, योजनाएं एवं वित्तीय सहायता उपलब्ध हैं।
ऐसे में आर्थिक रूप से कमजोर सवर्ण एवं अनारक्षित वर्ग के परिवारों के लिए भी ऐसी मजबूत और संस्थागत व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे केवल इसलिए कोई युवा, विद्यार्थी, किसान, छोटा उद्यमी या जरूरतमंद परिवार पीछे न रह जाए कि वह आरक्षण की किसी श्रेणी में नहीं आता।
गुजरात का मॉडल देश के लिए उदाहरण बन सकता है;
गुजरात में अनारक्षित वर्ग के आर्थिक एवं शैक्षणिक विकास के लिए निगम/आयोग जैसी संस्थागत व्यवस्थाएं बनाई गई हैं। इनके माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों को शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, स्वरोजगार तथा अन्य क्षेत्रों में सहायता देने का प्रयास किया जाता है।
मेरा मानना है कि इसी प्रकार केंद्र सरकार के स्तर पर भी एक मजबूत व्यवस्था बनाई जानी चाहिए।
केंद्र सरकार द्वारा “राष्ट्रीय आर्थिक रूप से कमजोर अनारक्षित वर्ग आयोग” और “राष्ट्रीय आर्थिक रूप से कमजोर अनारक्षित वर्ग विकास निगम” जैसी संस्थागत व्यवस्था बनाने पर विचार किया जाना चाहिए।
इसके लिए प्रारंभिक तौर पर लगभग ₹2,500 करोड़ का वार्षिक बजट निर्धारित किया जा सकता है, जिसे आवश्यकता और परिणामों के आधार पर आगे बढ़ाया जा सके।
इस व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह होना चाहिए कि इसका लाभ जाति के आधार पर नहीं, बल्कि स्पष्ट आर्थिक एवं सामाजिक-शैक्षणिक मानकों के आधार पर दिया जाए।
आय, संपत्ति, परिवार की आर्थिक स्थिति, शिक्षा और अन्य वस्तुनिष्ठ मानकों को ध्यान में रखकर पात्रता तय की जा सकती है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि वास्तव में जरूरतमंद परिवारों तक सहायता पहुंचे।
साथ ही, EWS के लिए संविधान में उपलब्ध 10% आरक्षण की व्यवस्था अपनी जगह बनी रहे, लेकिन उसके साथ-साथ शिक्षा, रोजगार की तैयारी, स्वरोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए अलग से मजबूत सहायता तंत्र विकसित किया जाए।
आरक्षण व्यवस्था का मूल उद्देश्य जिन सामाजिक एवं ऐतिहासिक असमानताओं को दूर करना है, उसे समझना और उसका सम्मान करना आवश्यक है। इसलिए इस विषय को किसी वर्ग के खिलाफ खड़ा करने के बजाय हमें ऐसी नीति की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए जिसमें सामाजिक न्याय, आर्थिक न्याय और समान अवसर—तीनों का संतुलन हो।
मेरा मानना है कि किसी गरीब विद्यार्थी की प्रतिभा केवल इसलिए नहीं रुकनी चाहिए क्योंकि वह ऐसी श्रेणी से आता है जिसे आरक्षण का लाभ नहीं मिलता।
इसलिए देश में आरक्षण व्यवस्था पर व्यापक और तथ्यात्मक चर्चा के साथ-साथ आर्थिक रूप से कमजोर अनारक्षित वर्ग के लिए ₹2,500 करोड़ के प्रारंभिक बजट वाली राष्ट्रीय संस्था बनाने पर भी गंभीरता से विचार होना चाहिए।
@swatntra_anuj आपकी सारी बातों से सहमत हूं भाई,मैं भी आपका ही छोटा भाई हूं लेकिन ये भी बात सच है कि आरक्षण को कोई हाथ भी नहीं लगाएगा,खत्म तो दूर की बात है इससे बढ़िया इसमें Reform हो अभी की परिस्थिति को देखते हुए बाद में हटाने के लिए भी लड़ाई लड़ लेंगे,इस समय हटाने कीबात मतलब सभी वर्गों से वैर
@swatntra_anuj जब तक सवर्ण इस सरकार को डंडा नहीं करेंगे तब तक ये कुछ भी नहीं देगी,इनको अहसास करवाना बहुत जरूरी है और अहसास हो गया बांकीपुर में,इसी वजह से सवर्णों को खुश करने के लिए लाएगी कुछ