पेपर लीक घोटाले पर अगर राहुल गांधी कोटा से आंदोलन की शुरुआत करना चाहते हैं तो मेनस्ट्रीम अखबारों से लेकर बाक़ी लोगों को इतनी दिक़्क़त क्यों है?
कल तक पूछते थे विपक्ष कहाँ है और अब जब विपक्ष सड़क पर उतर रहा है तो कहा जा रहा है, राजनीति कर रहे हैं!
विपक्ष अगर ऐसे मुद्दे पर आंदोलन और राजनीति नहीं करेगा तो और क्या ��रेगा?
When the teleprompter is not there he needs cue cards to help him speak on the world stage.
This is the reality of Mahamanav
Can't even speak 2 lines without a cue card or a teleprompter
अयोध्या के बाद मथुरा में चंदा चोरी ?
फलाहारी महाराज बोले- "जब गुल्लकों को खोला जाता है, तब CCTV बंद कर दिए जाते हैं। पैसे, सोना, चांदी, हीरे का बंदरबांट होता है !
सांसद क्या भाव है ?
कहाँ के साहब ? कैसा फ्लेवर चाहिए पंजाबी, बंगाली या फिर मराठी ?
बंगाली और मराठी का बताओ ?
बंगाली की 4 करोड़ डाउन पेमेंट और बाकी 36 महीने के लिए एक करोड़ प्रति महीना की आसान किस्तों पर, मराठी का फिक्स 15 करोड़ सीधे टेबल पर
दोनों जगह जनता ने चुना है फिर लोकतंत्र के दो भाव क्यों?
आप रास्ता भटक गए शायद,ये मंडी है, लोकतंत्र नहीं।यहाँ जरूरत के हिसाब से बोली लगती है।
IMPORTANT: In this season of political splits and mergers, the Supreme Court’s questionable role has largely escaped scrutiny.
1) The SC is yet to deliver a final ruling on the Shiv Sena (UBT) appeal filed in January 2024 challenging the Maharashtra Assembly Speaker’s decision on the party split. That’s 30 months, four CJIs and counting.
2) The SC is also yet to rule on a petition filed by Goa Congress leader Girish Chodankar in March 2022 challenging a Bombay High Court order related to defections. More than four years have passed.
When the history of this period is written, the Supreme Court’s performance as a constitutional guardian must come under serious examination.🙏
'गोदी मीडिया' ने उन 'कॉकरोचों' को बहुत ज़्यादा कवरेज दिया, जबकि उनकी संख्या सिर्फ़ 500 थी।
आज कोटा में राहुल गांधी के समर्थन में 1 लाख से ज़्यादा छात्र मौजूद हैं, फिर भी मुझे यकीन है कि उन्हें वैसी कवरेज नहीं मिलेगी।
पहले BJP-RSS के लोगों ने श्रीरामजन्मभूमि में शिलापूजन के नाम पर खूब पैसे वसूले, जिसका कोई लेखा-जोखा नहीं है।
ये 1,400 करोड़ रुपए से ज्यादा की चोरी है। उस समय विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष अशोक सिंघल जी बताएं कि वो पैसा कहां गया?
BJP-RSS ने लोगों की आस्था और भगवान का चढ़ावा ही चोरी कर लिया है। श्रीरामजन्मभूमि में BJP-RSS के लोगों ने संगठित लूट की है।
हमारी म��ंग है कि इस गंभीर मुद्दे से जुड़ी SIT की रिपोर्ट एक हफ्ते में आनी चाहिए।
लेकिन अफसोस है कि SIT में उस अधिकारी को जांच की जिम्मेदारी दी गई है, जिसके ऊपर खुद महाकुंभ में मची भगदड़ से जुड़ी जांच चल रही है।
ऐसे में साफ है कि BJP सिर्फ खानापूर्ति कर रही है।
: @INCUttarPradesh अध्यक्ष @kashikirai जी
📍 दिल्ली
���वो (मोहन भागवत) कह रहे हैं कि हम छुपा के कर रहे हैं क्या ? ‘संघ’ के नाम पर कर रहे हैं !
मैं भी वही पूछ रहा हूँ - ‘संघ’ के नाम पर कर रहे हैं तो संघ क्या है ? कौन है ? संघ का पैसा कहॉं से आता है ? ये जो Security मिली है वो क्या Tax Payer का पैसा नहीं है ?
और ये क्या नाटक है कि 100 साल से किसी मे नहीं पूछा..तो क्या और 100 साल भी नहीं पूछें ?”
@PriyankKharge जी RSS की खटिया खड़ी किए बिना नहीं मानेंगे 🔥🔥🔥
भाई गरीब नेताओं और अधिकारियों से टोल टैक्स मत माँगो वे लूटने के लिए आए हैं और अगर वे टैक्स देंगे तो बेचारे गरीब के गरीब ही रहेंगे और भूँखे मर जाएंगे।
भले ही गरीब और मध्यमवर्ग से दोगुना टोल वसूल लो लेकिन नेताओं और अधिकारियों पर जुल्म मत करो।
Why Elections ?
If the party symbol
Sends you to Parliament
How can you walk over
Join another party with another symbol
You did not get elected on that symbol !
No principle of constitutional law can permit this !
Immoral
Illegal
Unconstitutional
Over to Court !
Men who attacked Abhijeet Dipke are being welcomed with Garlands…
the same way Rap!sts of Bilkis Bano were welcomed with garlands…
The same way they glorify Godse for k!lling Gandhi…
This is NOT the India we want..
विपक्ष को तोड़ कर चुनौती जनता को दी जा रही है कि आपकी कोई औक़ात नहीं है। ऐसा कर लोकतंत्र का उत्साह ख़त्म किया जा रहा है। अगर कोर्ट केस माफ़ कराने के लिए सांसद पार्टी छोड़ रहे हैं तो सवाल उठेगा कि क्या कोर्ट ने ED की जगह ले ली है? अदालत की साख को दाँव पर लगाने से नुक़सान भरोसे का होगा। वकील प्रतिस्पर्धा में निखरते हैं।उनके पेशे को AI से ज़्यादा ख़तरा न्याय व्यवस्था को पार्टी व्यवस्था में बद�� देने से होगा। इसके बाद क्या बचेगा? हताशा का लंबा दौर और नतीजा? एक शब्द में - दुर्दशा। हताशा से केवल दुर्दशा पैदा होती है। राष्ट्र के लोक जीवन का उत्साह ख़त्म हो जाता है। उसकी आर्थिक प्रगति भी कुंठित हो जाती है। अभी सत्ता के दम पर कुछ भी कर लीजिए लेकिन सबके सामने सांसदों को गुलाम की तरह पेश कर राजनीति के महत्व को भी समाप्त किया जा रहा है। अगर यह जीत है तो बीज���पी जश्न क्यों नहीं मना रही? क्या इस देश में किसी को पार्टी चलाने नहीं आती? फिर जब सारा बहुमत आ ही गया तब चुनाव बंद कर दीजिए।
🔥 RSS पर नकेल कसने की शुरुआत।
प्रियंक खड़गे ने मोहन भागवत को पत्र लिखा।
कर्नाटक की 4127 शाखाओं और 562 रूट मार्च का हवाला देकर पूछा,
“दस्तावेज़ तैयार रखिए, बिना रजिस्ट्रेशन इतना बड़ा नेटवर्क कैसे चल रहा है?”
जो हर NGO और नागरिक से हिसाब मांगते हैं,
RSS खुद “body of individuals” का बहाना क्यों बनाता है?
कानून सबके लिए बराबर है या RSS को छूट❓
ED तेरे बाप की, CBI तेरे बाप की, तमाम एजेंसियों से लेकर पुलिस तक, सब कुछ तेरे बाप का। अपने बाप से बोलकर जांच करवा और ख़ुद पता कर ले। करेगा?
तुम्हारे पास और तुम्हारे तमाम बापों के पास तो सब���ी फाइलें हैं ना? करवाओ जांच। तुम्हारी भी तो फाइल दिखाकर ही आज तक जूते चटवा रहे हैं ना?
एक बात ध्यान रख संजय, इन ध���तराष्ट्रों का सहारा लेना छोड़ना पड़ेगा तुझे भी। बहुत जल्द हिसाब होगा, तुम्हारा भी और तुम्हारे धृतराष्ट्र का भी।
और हाँ, आइंदा आदरणीय @kharge जी का नाम जब भी ले, पूरी इज़्ज़त के साथ।