15 वर्षों तक पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री रही आदरणीय @MamataOfficial जी पर गुंडों द्वारा किया गया जानलेवा हमला अत्यंत निंदनीय है। लोकतंत्र में हिंसा का कोई स्थान नहीं है। बीजेपी द्वारा अराजकता, नफ़रत और हिंसा का सामान्यीकरण करना जनतंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है।
बीजेपी शासित राज्य में असामाजिक तत्त्वों द्वारा भारत के सभ्य लोकतांत्रिक व संवैधानिक मूल्यों को तार-तार किया जा रहा है। ऐसी हिंसात्मक घटना पर केंद्र सरकार से प्रतिक्रिया नहीं आना दर्शाता है कि भारत सरकार का इस पर मौन समर्थन है।
हर घर तिरंगा
आजादी का अमृत महोत्सव
मेरी माटी मेरा देश
एक भारत श्रेष्ठ भारत
सबका साथ सबका विकास
डिजिटल इंडिया
मेक इन इंडिया
आत्मनिर्भर भारत
स्वच्छ भारत अभियान
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ
जन धन योजना
उज्ज्वला योजना
आयुष्मान भारत
गाँव का भारत,नारों वाले भारत से अलग है।
“अब मेरे पास कोई रास्ता नहीं बचा” - कल प्रयागराज में एक छात्र ने मुझसे यही कहा। सालों की तैयारी, घर की ज़मीन बेची, माँ-बाप का कर्ज़ और फिर भी हाथ में कुछ नहीं।
यह हार उसकी नहीं है। यह उस व्यवस्था की हार है जिसने उसकी मेहनत का दाम देने से इनकार कर दिया।
तेरह दिन हो गए - गृह मंत्री अमित शाह के मुंह से एक शब्द नहीं निकला। मोदी जी माफी मांगने की जगह क्षमा बाँट रहे हैं।
@AmitShah जी, यह मत समझिए कि हम जवाबदेही मांगना बंद कर देंगे। राजधानी की सड़कों पर बच्चों पर लाठियां और पैलेट चले - और आपने एक शब्द नहीं कहा। आज नहीं तो कल, इस जुर्म का जवाब आपको देना ही पड़ेगा।
छात्र देश की रोशनी हैं, और मैं उनकी पूरी शक्ति के साथ खड़ा हूं।
#ChhatronKiGoonj
एनडीए सरकार में अपराध चरम पर है। अपराधी सम्राट बनकर किसान-मजदूर, गरीब-निर्बल, शिक्षक-छात्र, कर्मचारी-व्यापारी-अधिकारी, युवा-महिला किसी की भी कहीं भी अकारण हत्या कर दे रहे है। प्रदेश में अपराधी प्रवृति की भाजपाई सरकार बनने से अपराधियों में क़ानून का डर समाप्त हो चुका है।
सरकार का मुखिया कंधे पर भगवा गमछा रखता है इसलिए इसे कोई जंगलराज नहीं कहता।
📍दिनारा, सासाराम
#Crime #Bihar #news #TejashwiYadav #RJD
सासाराम के दिनारा थाना क्षेत्र में 3 अगस्त को कानून से निडर आदतन अपराधी अजीत तिवारी ने मजदूरी का पैसा मांगने पर गरीब मजदूर 60 वर्षीय श्री चंदेश्वर चौधरी की गोली मारकर हत्या कर दी।
आज पीड़ित के गांव में उनके शोकाकुल परिजनों से मिलकर संवेदना व्यक्त की तथा गरीब परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान की।
बिहार सरकार के निठल्ले मंत्री AI की बातें करते हैं, प्रधानमंत्री विश्वगुरु बनने के सपने दिखाते हैं और यहां बिहार में मजदूरी मांगने पर मजदूरों को गोली मार दी जाती है!
वास्तविकता और NDA के सरकारी दावों में जमीन आसमान का अंतर है!
@yadavtejashwi#RJD#Bihar
रिजिजू जी, संसदीय कार्य मंत्री होने के नाते आपसे बेहतर यह कौन जानता होगा - महिला आरक्षण विधेयक 2023 में ही सर्वसम्मति से पारित हो चुका है, कांग्रेस के पूर्ण समर्थन के साथ।
सवाल यह है कि तीन साल बाद भी वह लागू क्यों नहीं हुआ और अब आप उसे परिसीमन से बेवजह क्यों जोड़ना चाहते हैं?
2023 का क़ानून लागू कीजिए। बिना किसी शर्त के।
"यूपी का हाल देख लीजिए, 21 पेपर लीक हुए हैं, 29 हज़ार प्राइमरी स्कूल बंद हुए हैं, लगभग 1 करोड़ बच्चे आज शिक्षा नहीं प्राप्त कर पा रहे हैं।"
- श्रीमती डिम्पल यादव जी, लोकसभा सांसद
जो न्यायालय में बैठे हैं वो मेरिट के आधार पर नहीं बल्कि जातीय प्रभुता और भाई-भतीजावाद के कारण हैं। 85% आबादी के 1% जज उच्च न्यायालय क्यों नहीं हैं ? कोलेजियम को ध्वस्त करना ही होगा।
~ @sanjuydv जी
जिन सवालों के जवाब वो देना नहीं चाहते वही सवाल मज़बूती से दागे गए हैं।
शानदार✊🏾
ये किसी एक शख़्सियत पर नहीं, बल्कि लोकतंत्र के चेहरे पर फेंकी गई एक स्याही है… ऐसी वारदात किसी शासन सत्ता की तानाशाही के ख़िलाफ़ लड़ने वाली शख़्सियतों को और मज़बूती और माद्दा देती हैं… सनद रहे
Pic @aisa_official_@neha_aisa
बनाने चले Brand, बज गया Band!
अब 7000 करोड़ एक साल में भी खर्च कर दें तो भी कुछ बदलनेवाला नहीं।
डबल इंजन के आपसी कम्पटीशन में गुरु गुड़ रह गया, चेला शक्कर हो गया… ये बात अलग है कि ज़्यादा मीठे के चक्कर में सब कड़वा हो गया।
अच्छे व्यवहार, अच्छे करम और जन हित के काम से बड़ा कोई और प्रचार नहीं होता है।
इनके अत्याचार, अन्याय, महिलाओं-अधिकारियों-पत्रकारों-प्रोफ़ेसरों से दुर्व्यवहार, दुर्वचन, सजातीय पक्षपात, पीडीए पर प्रहार, ‘हाता नहीं भाता’ के फ़ार्मूल के विस्तार, महा-भ्रष्टाचार के द्रव्य के स्वर्ण-ठोसीकरण, मंदिर चोरी के आरोपियों को दोषपूर्ण SIT से बचाने व प्रतिशोध की राजनीति के कारण घर-मकान-दुकान से लेकर यूनिवर्सिटी तक गिराने जैसी नकारात्मक-संकीर्ण राजनीति के कारणवश इनकी इमेज का एनकाउंटर हो गया है और उसके ऊपर से बुलडोज़र भी गुज़र गया है। इनकी छवि तो बनी नहीं, अधिकारियों के घर-महल ज़रूर बन गये।
जनता पूछ रही है लखनऊ से गोरखपुर कोई डाइरेक्ट ट्रेन है क्या क्योंकि अपने बनाए भाजपाई एक्सप्रेसवे से जाने का जोखिम तो वो उठाएंगे नहीं। ‘एक-दो’ आइटम छोड़कर बाक़ी सब वैध सामान ले जाने के लिए मूवर्स एंड पैकर्स भी तैयार बैठे हैं।