@Flipkart Why do you even hold sales if you can't deliver on time? Every morning, I receive a message saying the package will be delivered today, and then in the evening, I get another message stating that the delivery has been postponed—claiming that either I didn't answer
DUSU में ABVP का डंका
ढपली गैंग की लग गई लंका
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की तीन सीटों पर ऐतिहासिक जीत
अध्यक्ष पद पर यश डबास, सचिव पद पर रिया छाबड़ी और सह-सचिव पद पर लक्ष्य राज सिंह ने प्राप्त की शानदार विजय।
राहुल ग���ँधी के ‘झूठ की गूँज’ की बड़ी हार हुई है.
दिल्ली यूनिवर्सिटी पूरे भारत के छात्रों के मूड को रिफ्लेक्ट करता है, ये बताता है कि छात्रों का विश्वास प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी पर अटल है
#ABVPWinsDUSU #DUSUElection2026 #DUSU2026
जो राज्य सरकार पसंद न��ीं आई उसे बर्खास्त कर दिया
जिस दल से मनमुटाव हुआ उसे खंड-खंड तोड़ दिया
पार्टी में कोई नेता पसंद नहीं आया तो कांग्रेस ने स्वयं को भी तोड़ दिया... लेकिन गांधी नेहरू परिवार की बादशाहत बरकरार रखी
यही है कांग्रेस की राजनीति..
पहले अपने ही नेताओं को एक बड़े ग्लोबल इवेंट से दूर रखो, फिर अपने इकोसिस्टम के जरिए यह नैरेटिव चलाओ कि विपक्ष को “नज़रअंदाज़” किया जा रहा
#नाराज_फूफा : BRICS डिनर में अपने ही 3 मुख्यमंत्रियों को शामिल नहीं होने देंगे, और फिर शिकायत करेंगे कि नज़रअंदाज़ किया जा रहा है!
दोहरे मापद��ड और विरोधाभास की राजनीति, यही कांग्रेस की पहचान बन गई है।
सपा - हम जाति धर्म की राजनीति नहीं करते
भाजपा - जिस पार्टी का जन्म ही जातीय दल के रूप में हुआ और जिसका काम केवल मजहबी तुष्टीकरण हो, मजहबी तुष्टीकरण के लिए तो सजातीय को भी पीछे छोड़ देते हैं
निष्कर्ष - सपा की बात ठीक है, सपा केवल एक जाति को छोड़कर बाकी जातियों की राजनीति नहीं करती
सपा मजहब की राजनीति करती है, धर्म की राजनीति नहीं करती
सपा प्रवक्ता की बात ठीक है, आपको क्या लगता है ❓
मूँछ किसी जाति की परिचायक नहीं होती, बल्कि शूरवीरता की पहचान होती है. सेवा के जवान हो या पुलिस के जवान, अच्छी मूँछ रखने पर भत्ता देना पुरानी रवायत है.
कुछ नेताओं को मूँछ पर हाथ फेरना पसंद नहीं उन्हें तो माफिया के कुत्ते से हाथ मिलाना पसंद है.
यूपी के पूर्व डीजीपी प्रशांत कुमार जी अपनी मूंछों के लिए प्रख्यात रहे और वह क्षत्रिय बिरादरी के नहीं है.
बाबरी की पैरोकार कांग्रेस लगातार भारतीय सेना का अपमान और देश को बदनाम कर रही है।
आज कांग्रेस नेता राशिद अल्वी का जो बयान है, यही तो "दिमागी नक्सल" की असली पहचान है।
कभी ये लोग सेनाध्यक्ष को ‘सड़क का गुंडा’ कहते हैं, कभी जवानों की वीरता को ‘खून की दलाली’ बताते हैं तो कभी ‘ऑपरेशन सिंदूर’, ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ और ‘बालाकोट एयर स्ट्राइक’ पर सवाल उठाते हैं।
आतंकियों के लिए आंसू बहाने वाले और आतंकियों की सजा माफ़ करवाने आधी रात को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने वाले लोगों से उम्मीद ही क्या की जा सकती है!
सार्वजनिक मंच से इससे ज्यादा शर्मनाक स्वीकारोक्ति और क्या हो सकती है? भारत एक लोकतंत्र है, लेकिन वे इस तरह एक राजनीतिक राजसी परिवार स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं कि वे अपनी पार्टी को अपनी निजी संपत्ति की तरह मानते हैं। पार्टी के विधायक, सांसद और यहां तक कि उसके अध्यक्ष भी सिर्फ सैफई परिवार से ही आएंगे। सार्वजनिक रूप से ऐसी शर्मनाक स्वीकारोक्ति करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और खेदजनक है।
@yadavakhilesh