'जय जवान-जय किसान' के उद्घोष से देश के सैनिकों व अन्नदाता किसानों में अदम्य ऊर्जा भरने वाले, पूर्व प्रधानमंत्री, 'भारत रत्न' लाल बहादुर शास्त्री जी की पावन जयंती पर विनम्र श्रद्धांजलि।
आपका दृढ़ नेतृत्व, ईमानदारी और सादगीपूर्ण जीवन देश वासियों के लिए युगों-युगों तक अनुकरणीय रहेगा।
प्रशासन स्वयं ही रैंडम बातों पर ‘ले चलो इसको SC वाला लगाओ’ कह कर कार्य करे तो समझ जाइए कि न्याय कितना हो रहा है। मोदी एक्ट पु��िस, प्रशासन और दलित के लिए धनोपार्जन का माध्यम बन गया है।
पिछले कुछ ���र्षों से हिमालय क्षेत्र में पर्यावरणीय आपदाओं और हिमालय की संधारण क्षमता से अधिक बोझ डालने के कारण समस्त जनजीवन भारी संताप से गुजर रहा है। हिमालय के गाँवों से पलायन भी निरंतर बढ़ता जा रहा है, विभिन्न निर्माण कार्य प्राकृतिक आपदाओं के कारण टूट रहे हैं और सड़कें व अन्य विनिर्माण भारी रूप से क्षतिग्रस्त हो रहे हैं।
अंतर्राष्ट्रीय समुदाय बार-बार चेतावनी दे रहा है और ऐसे में जब हिमालय हमारी ���ंस्कृति संरक्षण, प्राकृतिक संपदा और अर्थव्यवस्था का प्रमुख स्रोत है, तब उसकी उपेक्षा करना देश के लिए भारी संकट बन सकता है।
अभी यह आवश्यक है कि हिमालय की तलहटी के सभी राज्यों द्वारा इस पर गंभीरता से विचार कर संपूर्ण हिमालय के लिए एक समेकित सर्वांगीण विकास योजना बनाने पर तत्काल विचार करें, हिमालय केवल इन राज्यों से ही संबंधित नहीं है बल्क�� हिमालय के कारण सारा देश संरक्षित एवं जीवित है।
ज्ञातव्य है कि हिमालय से देश की 20% जीडीपी (GDP) प्राप्त होती है, इसलिए हिमालय समूचे देश की थाती है और उसकी रक्षा करना देश की जिम्मेदारी है।
इस स्थिति में भी कुछ सरकारों द्वारा वैज्ञानिकों, भूगर्भशास्त्रियों, भू-वैज्ञानिकों, कृषि एवं जैव विविधता के विद्वानों के प्रतिवेदनों की उपेक्षा करके, विभिन्न यात्राओं, पर्यटन कार्यक्रमों एवं बिना सोचे-समझे हिमालय क्षेत्र में विकास की ऐसी योजनाओं को संचालित किया जा रहा हैं, जिससे हिमालय की संधारण क्षमता तेजी से समाप्त होती जा रही है।
अतः मैं केंद्र एवं हिमालयी राज्यों की सरकारों से आग्रह करता हूँ कि वे ऐसी योजनाओं को बल देने के लिए कदम उठाएँ जिससे हिमालय का संरक्षण हो तथा पर्यावरण, विकास, प्रतिरक्षा व संस्कृति का संवर्धन हो सके
मैं मानता हूँ “हिमालय है तो हम हैं”
बद्रीनाथ धाम में संगीत समारोह ( DJ concert) को अनुमति प्रदान करना ना केवल सांस्कृतिक मर्यादाओं का उन्लंघन है अपितु धाम की पवित्रता पर भी सीधा आघात है। आदि गुरु शंकराचार्य महाराज जी द्वारा इस धाम की स्थापना हिमालयी पर्यावरण मे शांतिपूर्ण तरीके से भगवत भजन के लिए की थी उल्लेखनीय है की इस स्थान पर शंख बजाना भी मना है परंतु हम उसे भूलकर शोर शराबे वाले संगीत कार्यक्रमों का आयोजन कर भारतीय आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, पर्यावरणीय मूल्यों की घोर उपेक्षा तो कर ही रहे है साँथ में इतनी ऊचाई पर हजारों लोगो के नाचने से उनके स्वास्थ पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों की भी उपेक्षा कर रहे है। यह इस बात का प्रतीक है कि अब देवभूमि को बाजारू संस्कृती के रूप में परिणीत किया जा रहा है।
मैं भारतीय संस्कृति के अनुयायीयों तथा विशेषकर पूजनीय शंकराचार्यों तथा महात्माओं से यह अनुरोध करता हूँ कि वह संस्कृति के इस क्षरण को रोकने के लिए प्रभावी आवाज उठाये, मैं केंद्र एवं राज्य सरकार से भी आग्रह करूँगा कि वह ऐसे आयोजनों पर प्रतिबंध लगा कर देवभूमि की मर्यादा को बनाये रखें,
हिमालय देवात्मा है भगवान शंकर का निवास माँ गंगा का उद्गम है इसे नाच ग्रह बनाना करोड़ो भारतीयों की आस्था पर गहरा आघात है।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने आज मोदी एक्ट की धारा 18 और 18ए(2) के अंतर्गत वैधानिक रोक को देखते हुए मेरी अग्रिम जमानत याचिका को निरस्त कर दिया। हायकोर्ट का यह निर्णय अपनी जगह है, पर मैं इस से सम्मानपूर्वक असहमत हूँ।
साथ ही, यह भी स्पष्ट है कि न्यायालय ने कहा है कि इसकी टिप्पणियाँ केवल जमानत आवेदन तक सीमित हैं और मेरी आपराधिकता इससे सिद्ध नहीं हो जाती। इस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष चुनौती दूँगा और आशा करता हूँ कि देश की न्यायिक व्यवस्था में सर्वोच्च विश्वास बना रहे।
मुझे एक नीच, अधम, पतित ट्रोल के विरुद्ध अपने परिवार के सम्मान की रक्षा करने के लिए, इस घटिया और दमनकारी मोदी एक्ट (जिसे SC/ST एक्ट भी कहा जाता ह���) के प्रावधानों के तहत एक आपराधिक मामले में झूठा फँसाया गया है।
मैंने ऐसा कुछ नहीं कहा है जो किसी व्यक्ति या समुदाय का जाति के आधार पर जानबूझकर अपमान या अपमानजनक व्यवहार माना जा सके। मैं उन किसी भी निहित स्वार्थ वाली ताकतों से लड़ने के लिए तैयार हूँ जो इस देश में स्वतंत्र अभिव्यक्ति और सत्य कथन को दंडित करना चाहती हैं, भले ही इसके लिए मुझे जेल जाना पड़े।
एक नेता द्वारा अपनी राजनैतिक वोटबैंक को साधने के लिए, सामान्य जनता से बिना किसी सोच-विचार के, संशोधित किए गए इस पूरे कानून और इसके संशोधित नियमों का मैं तब तक विरोध करूँगा जब तक इसे पूरी तरह से निरस्त न किया जाए।
और हाँ, पुनः कहूँगा कि हमारी की माँ-बहनें सड़कों पर चलती-फिरती वस्तु नहीं है जिस पर कोई भी टिप्पणी करे और बच जाए। उनके सम्मान की रक्षा हेतु, ���ौ बार जेल जाना पड़े जाऊँगा और 101वीं बार वही करूँगा जो मैंने किया है।
PS: जो भी इस निरस्तीकरण पर स्खलित हो रहे हैं, तुम्हारी माँ-बहन पर भी हर दिन ऐसी टिप्पणी होती है। उस पर भी मैं ही स्टैंड लूँगा क्योंकि तुम अपनी कायरता में दो शब्द नहीं लिख पाओगे।
नियुक्ति पाने वाले नवचयनितों से अगर किसी प्रबंधक ने पैसा मांगा या लेनदेन का प्रयास किया तो उन्हें जेल में सड़ना पड़ेगा।
—मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी
आज माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी द्वारा निष्पक्ष एवं पारदर्शी चयन प्रक्रिया से चयनित 3,567 प्रधानाचार्यों, प्रधानाध्यापकों, प्रवक्ताओं एवं सहायक अध्यापकों को नियुक्ति-पत्र प्रदान किया जाना हम सभी के लिए गौरव का क्षण है। सभी चयनित अभ्यर्थियों को हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ।
प्रदेश में निष्पक्ष, पारदर्शी एवं योग्यता-आधारित भर्ती व्यवस्था सुनिश्चित करने की माननीय मुख्यमंत्री जी की दृढ़ प्रतिबद्धता और सतत मार्गदर्शन के लिए मैं हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ।
उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने वर्ष 2022 से लंबित चारों परीक्षाएँ अल्प अवधि में संपन्न कराई हैं, जिनमें से तीन के परिणाम घोषित किए जा चुके हैं। साथ ही, छह आगामी परीक्षाओं का कैलेंडर भी जारी कर दिया गया है।
निष्पक्षता, पारदर्शिता और समयबद्धता के साथ योग्य प्रतिभाओं को प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था से जोड़ना हमारा संकल्प है।
#UPESSC
अवसरों के खुले द्वार, रोजगार से यूपी में नया निखार!
मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी के नेतृत्व में मिशन रोजगार के तहत उत्तर प्रदेश में युवाओं को रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने के साथ ही शिक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ एवं गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में निरंतर प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं।
इसी क्रम में उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा निष्पक्ष एवं पारदर्शी चयन प्रक्रिया के माध्यम से अशासकीय सहायताप्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में चयनित 3,567 प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक, प्रवक्ता (पी.जी.टी.) एवं सहायक अध्यापकों (टी.जी.टी.) को नियुक्ति पत्र वितरित किए जाएंगे।
🗓️ दिनांक: 22 सितंबर, 2026
🕙 समय: पूर्वाह्न 10:30 बजे
📍 स्थान: जुपिटर हॉल, इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान, लखनऊ