सुनिए माननीय मंत्री "ओमप्रकाश राजभर" जी,
पहली बात तो मैं किसी का चेला नहीं हूं।
दूसरी बात,
आपके 2 चेले जो गुलाबी गमछा गले में पहन कर दिन भर आपके लिए कड़ी धूप में रैली आयोजित करवाते हैं, उनको तो आपने 2022 में धोखा दे ही दिया था।
अब सुनने में आ रहा है कि आपने उनको राज्यसभा भेजने का वादा किया है!
उन्हे�� राज्यसभा तो छोड़िए विधान परिषद ही भेज दीजिए तो मैं मान जाऊंगा कि आप उनके सच्चे गुरु हैं।
धन्यवाद,
भूल -चुक माफ़ करते हुए रोड बनवाइए।
सड़क निर्माण के माँग को लेकर पानी के टंकी पर चढ़ा एक जागरूक युवा🔥
अपने साथी नितिन प्रजापति जो ग्राम व पोस्ट लालनपुर,थाना मधुबन,जिला– मऊ के रहने वाले हैं वो सड़क निर्माण की मांग करते अपने गांव की पानी के टंकी पर चढ़ गए हैं।
उनके गांव को जाने वाले 250 मीटर को सड़क जर्जर अवस्था में है जिसके निर्माण को लेकर नितिन भाई सभी जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि के दरवाजे के फ़रियाद लेकर का चुके हैं लेकिन किसी ने नहीं सुना।
ये सड़क पासी और प्रजापति बस्ती को जोड़ती है।
आखिर में थक हारकर नितिन अपनी मांग को पूरा करवाने के लिए गले में तिरंगा बांधकर पानी के टंकी पर चढ़ गए हैं।
मैं घोसी सांसद @RajeevRai ji @DMMau1@Uppolice@maupolice से निवेदन करता हूं कि जल्दी संज्ञान लीजिए, और नितिन भाई को सकुशल पानी टंकी से नीचे उतारिए।
एक सड़क की ही तो मांग है मंत्री जी,
आपके विभाग की ही अनदेखी है, आप ही क्यों नहीं बनवा देते?
— आपके विभाग के DPRO पत्र जारी करते हैं कि जल्द ही रोड बना दिया जाएगा।
—आपके विभाग के BDO कहते हैं कि अनुपात नहीं बन रहा है।
—ग्राम पंचायत सचिव फोन ही नहीं उठाते हैं।।
और प्रधान जी का तो पूछिए ही मत
ऐसे माननीय मंत्री जी का क्या फायदा?!
जो एक गांव की सड़क ही ना बनवा पाए!!
किसी को लगता होगा कि नितिन प्रजापति पानी की टंकी पर चढ़कर कोई ड्रामा कर रहे हैं…
लेकिन शायद किसी ने ये नहीं देखा कि वो वहां पहुंचने से पहले कितनी सरकारी सीढ़ियां चढ़ चुके थे।
उनकी मांग सिर्फ इतनी है
गांव की कच्ची सड़क पक्की हो जाए।
जब दफ्तरों में सुनवाई नहीं हुई, तो उनकी मजबू��ी उन्हें पानी की टंकी तक ले आई।
@Prajapat204 भाई, रोइए मत।
एक गांव की टूटी फूटी सड़क बनवाने के लिए
—प्रधान से कहा
—BDO से कहा
—1076 मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत की
—विधायक ने अपने सूची लिख दिया
तमाम नेताओं, जनप्रतिनिधियों से कहा लेकिन सड़क नहीं बन पाई।
इसी उत्तर प्रदेश में स्वागत है आपका
UPSSSC की तानाशाही और लेटलतीफी ने प्रदेश के युवाओं के संघर्ष को मजाक बना दिया है!
जूनियर अस��स्टेंट (3284 पद) की जिस भर्ती के फॉर्म दिसंबर 2024 में भरे गए थे, आज ल��भग 20 महीने बीत जाने के बाद भी छात्र इसके रिजल्ट के लिए दर-दर भटक रहे हैं।
फरवरी 2026 में परीक्षा हुई और जून में रिवाइज़्ड आंसर की जारी की गई।
रिजल्ट आने में जब लेट लतीफी होने लगी तो छात्रों ने जून में आयोग के सामने रिजल्ट जारी करने के लिए प्रदर्शन किया तो उस वक्त आयोग के ज़िम्मेदार अधिकारियों ने छात्रों से स्पष्ट वादा किया था कि जुलाई में रिजल्ट आ जाएगा और अगस्त में टाइपिंग करवा ली जाएगी।
आज अगस���त का आधा महीना भी बीत चुका है, लेकिन रिजल्ट का कहीं कोई अता-पता नहीं है!
शहरों में रहकर सालों से तैयारी कर रहे ये छात्र आखिर कब तक रूम का किराया भरेंगे।
जब ये परेशान और हताश युवा अपने हक़ का जवाब मांगने आयोग के दफ्तर पहुँचते हैं,
तो उन्हें कोई ठोस जवाब नहीं मिलता।
उलटा, उन्हें मुक़दमे और गिरफ़्तारी की धमकियां देकर वहां से भगाने का प्रयास किया जाता है।
छात्रों का यह दर्द कि हमें गिरफ़्तार करवा दीजिए, मुक़दमा लगा दीजिए, पर जवाब दीजिए,
सरकार और आयोग युवाओं के सालों की तपस्या का इस तरह मजाक ना बनाएं।
जल्द से जल्द जूनियर असिस्टेंट का रिजल्ट घोषित कर टाइपिंग टेस्ट कराएं।
प्रदेश के युवाओं के धैर्य की और परीक्षा ना ले, उन्हें उनका हक दीजिए!
@UPGovt @UPSSSC
#JuniorAssistant
सम्माननीय @ChiefSecyUP जी वर्तमान में उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह जी द्वारा विधानसभा में अपने जबबा में स्पष्ट किया है की प्राथमिक शिक्षा विभाग के नगरीय क्षेत्रों में 12075 एवं ग्रामीण क्षेत्रों में 48883 पद रिक्त हैं लेकिन 7 वर्ष वाद भी 60958 पद रिक्त होने के बावजूद अभी बेसिक शिक्षा विभाग में भर्ती की घोषणा सिर्फ 11508 नगरीय क��षेत्रों के पदों के लिए हुई है , महोदय बाकी रिक्त पद का क्या?@spgoyal @AwasthiAwanishK
सर ये युवा पिछले 7 वर्षों से बेसिक शिक्षक भर्ती का इंतेज़ार कर रहा है , कृपया समस्त रिक्त 60958 पदों पर भर्ती देकर पिछले 7 वर्षों की कमी को दूर किजिए...!!
नाम 'मिड-डे मील' से बदलकर 'पीएम पोषण' (PM Poshan) कर देने से ज़मीनी हकीकत नहीं बद��� जाती।
यूपी के सीतापुर के प्राथमिक विद्यालय का यह वीडियो देखिए। मासूम नौनिहालों को 'पोषण' के नाम पर महज़ पीला पानी परोसा जा रहा है।
एक तरफ कागज़ों पर दूध, ताज़े फल, दाल ��र सोयाबीन वाला 'शानदार सरकारी मेन्यू' है, और दूसरी तरफ बच्चों की थाली का यह कड़वा सच।
क्या यही है सरकार का 'PM पोषण' मॉडल।
#Sitapur #PMPoshan #MidDayMeal #UPGovt #EducationSystem