Class 9 की Student Asmita जब अपनी गोद में डेढ़ साल के भाई को लेकर School पहुँची, तो पहले सबको ये थोड़ा अजीब लगा।
लेकिन जब उसने इसकी वजह बताई, तो पूरी Class खामोश हो गई।
Asmita ने बताया कि कुछ समय पहले उसकी माँ का निधन हो गया। Father काम पर जाते हैं और घर में उसके छोटे भाई को संभालने वाला कोई नहीं था। इसलिए वह उसे अपने साथ School ले आई।
सोचिए, जिस उम्र में बच्चे खुद सहारे ढूंढते हैं, उस उम्र में ये लड़की अपने छोटे भाई का सहारा बन गई। यह सिर्फ Responsibility नहीं, बल्कि Brother-Sister के रिश्ते की सबसे खूबसूरत मिसाल है।
दुआ है कि Asmita की ज़िंदगी में आगे सिर्फ खुशियाँ और आसानियाँ आएँ।
राजेश एक्सपोर्ट्स मामला केवल एक कंपनी की कहानी नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल है।
नियामक कहाँ थे?
ऑडिटर क्या देख रहे थे?
बड़े संस्थागत निवेशकों ने क्या जांच की? 🤔
सबसे पहले फंसे वो भोले-भाले निवेशक, जिन्होंने कंपनी के चमकदार आंकड़ों और बड़े-बड़े दावों पर भरोसा करके अपनी मेहनत की कमाई लगा दी। 💔
फिर सवाल LIC पर भी उठते हैं। आखिर हजारों करोड़ रुपये निवेश करने से पहले क्या पर्याप्त जांच-पड़ताल की गई थी? क्योंकि यह किसी एक संस्था का पैसा नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की बचत का पैसा है।
और सबसे बड़ा सवाल ऑडिटर्स पर है। यदि वर्षों तक कथित तौर पर इतने बड़े स्तर पर गड़बड़ियां चलती रहीं, तो ऑडिट रिपोर्ट में सब कुछ सामान्य कैसे दिखता रहा? आखिर ऑडिट हुआ क्या था — खातों का या सिर्फ कागजों का?
हर बार की तरह सबसे बड़ा नुकसान छोटे निवेशकों ने उठाया, जबकि जिम्मेदार लोग वर्षों तक सम्मान, पुरस्कार और मंचों पर तालियां बटोरते रहे।
निवेशकों को अब सिर्फ कार्रवाई नहीं, जवाब चाहिए। 🔥
SEBI जवाब दो
The golden glow of the evening, the graceful beauty of the trees, and the calming waves of the sea come together to create a breathtaking scene that fills the heart with joy and the soul with peace. These beautiful colors of nature remind us that beauty exists in every moment when we look at it with gratitude and appreciation.
Job nahin mil raha tha sasural walon Ne Hi Kam per Rakh liya hai.
349 ka recharge karva dete Hain.
Donon time ka khana aur rahana free.
Year mein 2-4 Jodi kapde bhi dila dete Hain.
Bechare bahut hi bhale log Hain.
kyon bhai @grok
🚨 In Virat Kohli absence, Rishabh Pant should get a chance in the ODI series 🚨
Rishabh Pant deserves a chance in the Ind vs Afg odi match because he was not included in the ODI series. At a time when the team management is looking for the right options, a talented player like Pant should get an opportunity to prove himself.
Rishabh Pant is one of the biggest wicket-keeper Batters in the world and has already shown his ability in big Matches. He has been part of the ODI setup for years, but he has not received consistent opportunities.
Now is the time to show faith in him and give him a place in the playing XI . Give him one chance, Pant will prove himself.
ग्राहकों की जेब पर डाका: दिल्ली के 'ग्लोबस होंडा' शोरूम में फाइनेंस के नाम पर खुली लूट!
मेरे साथ हुआ यह स्कैम ने मेरा दिल तोड़ दिया। सारे फाइनेंस वालों
नई दिल्ली: गाड़ी खरीदना ह ने। र व्यक्ति के लिए एक खुशी का मौका होता है, लेकिन दिल्ली के कुछ ऑटोमोबाइल डीलर ग्राहकों की इस खुशी और मजबूरी का फायदा उठाकर उनकी जेब पर सरेआम डाका डाल रहे हैं। ऐसा ही एक गंभीर मामला दिल्ली के गुर्जनवाला टाउन (Gujranwala Town) में स्थित होंडा के आधिकारिक शोरूम 'ग्लोबस होंडा' (Globus Hond) GT Karnal road delhi से सामने आया है, जहां वाहन फाइनेंस कराने वाले ग्राहकों से नियमों को ताक पर रखकर अवैध वसूली की जा रही है।
क्या है पूरा मामला?
हाल ही में जब एक जागरूक ग्राहक गुर्जनवाला टाउन स्थित ग्लोबस होंडा शोरूम में टू-व्हीलर खरीदने और उसे फाइनेंस कराने पहुंचे, तो वहां के स्टाफ और मैनेजमेंट की मनमानी देखकर हैरान रह गए। शोरूम की तरफ से निर्धारित ₹6,000 के भारी-भरकम फाइल चार्ज के अलावा, ग्राहक से 2.5\% अतिरिक्त (Extra Charge) रकम की मांग की गई।
जब ग्राहक ने इस अतिरिक्त 2.5\% चार्ज का कारण पूछा, तो शोरूम मैनेजर ने जो तर्क दिया वह बेहद चौंकाने वाला और गैर-कानूनी था। मैनेजर ने साफ शब्दों में कहा:
"यह 2.5\% चार्ज हम इसलिए लेते हैं क्योंकि हम फाइनेंस कंपनी के कर्मचारियों को अपने शोरूम के अंदर बैठने की जगह देते हैं।"
आरबीआई (RBI), उपभोक्ता मंत्रालय और खुद ऑटोमोबाइल कंपनियों (HMSI) के नियमों के मुताबिक, शोरूम के भीतर फाइनेंस कंपनी को बिठाने का कोई भी 'सिटिंग चार्ज' या 'कमीशन' ग्राहक की जेब से वसूलना पूरी तरह प्रतिबंधित और 'अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस' (Unfair Trade Practice) के दायरे में आता है। शोरूम और फाइनेंस कर्मियों की यह मिलीभगत सीधे तौर पर ग्राहकों के साथ धोखाधड़ी है।
जब ग्राहकों से इस अवैध रकम को लिखित में देने या रसीद पर चढ़ाने को कहा जाता है, तो शोरूम प्रबंधन आनाकानी करने लगता है, क्योंकि उनके पास इस अवैध वसूली का कोई आधिकारिक नियम या दस्तावेज नहीं होता।
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