जो #अतीत में ही जीते हैं
उनका वर्तमान पिछड़ा है
जिनका ��र्तमान पिछड़ा, उन
का आगे भविष्य बिगड़ा है !
वर्तमान में जीने को ही
मैं असली जीना कहता हूँ,
बीते युग में जीते रहना
सिर्फ पलायन ही होता है !
~ द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी
#अतीत #लेखनी ✍️
@pareeknc7 @Lekhni_
@madhuleka
इन्द्र का #आयुध पुरुष जो झेल सकता है,
सिंह से बाँहें मिलाकर खेल सकता है,
फूल के आगे वही असहाय हो जाता ,
शक्ति के रहते हुए निरुपाय हो जाता।
विद्ध हो जाता सहज बंकिम नयन के बाण से,
जीत लेती रूपसी नारी उसे मुस्कान से..!!
~ दिनकर
#आयुध ⚔️ #लेखनी ✍️
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