हमेशा जब भी उनसे उम्मीद थी कि वो अब मेरी सहायता करेंगे मैं उनसे अपने बेहतरी पर बात कर सकता हूँ या मुझे वे सहारा देंगे,उन्होंने कभी कुछ नहीं किया सिवाय इसके कि वे मुझे ब्लॉक कर दें या रिप्लाई करना बंद कर दें।आज भी वो यही कर रहे हैं।
ऐसी #दोस्ती से अच्छा था वे दुश्मनी निभाते।
अच्छे इंसान को चाहिए कि वह अपनी लड़ाई स्वयं लड़े। ख़ुद की लड़ाई वो खुद से ही जीत सकता है।किसी से कुछ कहने और सुनने का कोई मतलब नहीं है।आपकी कही बात को वो उस तरह नहीं लेगा जिसतरह आप सोचते हैं।इसमें उसकी भी गलती नहीं है।कुछ किसी से कहने पर सिर्फ तनाव हो��ा।
लाईफ बहुत हार्ड बहुत रफ और बहुत बहुत ज्यादा टफ है।जो भी पास आता है उसके पास रहने से ज्यादा दूर जाने का डर बना रहता है।मेरे साथ या मेरे शुभचिंतक हमेशा कष्ट में दिखते हैं।मुझसे उनका दर्द नहीं देखा जाता। मैं अगर भगवान होता तो उनके सारे दुःख दर्द पीड़ा को दूर कर देता।