“मेरा ज़्यादा नंबर था, मगर मुझसे कम नंबर वा��े बच्चे का सेलेक्शन हो गया। ये मेरिट की हत्या है।”
आपने भी यह तर्क बार-बार सुना होगा।
पहली नज़र में यह शिकायत न्यायसंगत लग सकती है, लेकिन ज़रा ठहरकर पूरी चयन-प्रक्रिया की संरचना को समझिए। मान लीजिए 100 प���ों की वैकेंसी है। उनमें 40 पद सबके लिए खुले हैं। 10 पद आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के लिए हैं। यानी सामान्य वर्ग का अभ्यर्थी कुल 50 पदों पर प्रतिस्पर्धा कर सकता है। फिर भी यदि वह इन 50% सीटों में जगह नहीं बना पाता और अपनी असफलता का कारण आरक्षण को बताता है, तो यह तर्क कहाँ तक तार्किक है?
सच्चाई यह है कि ओपन कैटेगरी में प्रतिस्पर्धा सबके लिए होती है — अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा व���्ग और सामान्य वर्ग, सभी के लिए। अनेक बार आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार भी ओपन मेरिट में चयनित होते हैं। ऐसे में जो अभ्यर्थी चयनित नहीं हो पाया, वह प्रायः अपने ही सामाजिक-शैक्षणिक पृष्ठभूमि वाले प्रतिस्पर्धियों से पीछे रह जाता है, लेकिन दोष आरक्षण को देता है।
यह भी स��झना होगा कि “मेरिट” कोई निर्वात में पैदा होने वाली चीज़ नहीं है। वह सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संसाधनों की उपज होती है। सदियों तक ज्ञान, शिक्षा और सत्ता संस्थानों पर जिन वर्गों का वर्चस्व रहा, उन्हें पुस्तकालय, ज़मीन, सामाजिक सम्मान, शिक्षित परिवेश और नेटवर्क — सब कुछ सहज रूप में उपलब्ध था। दूसरी ओर जिन समुदायों को सामाजिक अपमान, शैक्षणिक वंचना और सांस्कृतिक बहिष्कार झेलना पड़ा, उनके ल��ए प्रतिस्पर्धा की शुरुआती रेखा ही अलग थी। ऐसे असमान प्रारंभ बिंदुओं को नज़रअंदाज़ करके केवल अंतिम अंकतालिका को “शुद्ध मेरिट” घोषित कर देना वस्तुतः इतिहास को मिटा देना है।
कैम्पसों में अव्वल रहने की जो लालसा “सर्वोच्च मेरिट” की अपेक्षा करती है, उसमें नाकाम रहने वाले अक्सर अपनी हार को स्वीकार करने के बजाय आरक्षण को दोषी ठहराते हैं। जबकि वस्तुतः वे ओपन कैटेगरी की प्रतिस्पर्धा में पराजित हो चुके होते हैं। आरक्षण उनकी सीट नहीं लेता; वह उन लोगों को अवसर देता है जिन्हें सदियों तक अवसर से दूर रखा गया। दरअसल इस देश में “मेरिट” और “आरक्षण” को किसी वैकल्पिक बहस की तरह नहीं, बल्कि अनिवार्य पाठ की तरह पढ़ाया जाना चाहिए। हर कैंपस में, हर सार्वजनिक मंच पर यह समझ विकसित होनी चाहिए कि समान अवसर का अर्थ क्या है और ऐतिहासिक अन्याय का प्रतिकार कैसे किया जाता है। जब तक यह बौद्धिक स्पष्टता नहीं आएगी, तब तक वर्चस्वशाली समूह अपनी असफलताओं को छिपाने के लिए आरक्षण को ही कठघरे में खड़ा करते रहेंगे — और दुनिया की एक ज़रूरी सामाजिक न्याय व्यवस्था का अपमान करते रहेंगे।
Via Shri @DrLaxman_Yadav
#reservation #ISupportReservation
सोनम वांगचुक जी 15 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हैं लेकिन कोई सरकार का प्रतिनिधि अभी इनसे मिलने तक नहीं आया है, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा तो बहुत दूर की बात है।
इस देश में जब किसान आंदोलन चल रहा था तब सैकड़ों किसानों की जान चली गई थी। इस सरकार को आपसे कोई फ़र्क नहीं पड़ता है।
Can I share a joke with you?
A coaching whose revenue last year was Rs 405 crore and profit was Rs 90 crore has been fined 5 lakh rupees by the government of India for showing 75% fake selections.
Is 5 lakh even a deterrent?
Two years back, the same coaching was fined 3 lakh for showing 90% fake selections.
The owner of the coaching takes lectures on Ethics, spirituality, philosophy and basically everything under the Sun.
He is Mr "Know-it-all".
He has a large number of self-claimed "honest" journalists in his pocket some of whom even do foreign tours with him.
He has hundreds of so called fan channels which are actually run by his own company to create his "larger than life" image.
#JagoGrahakJago
70वीं बीपीएसी:
2027 कुल चयनित अभ्यर्थी।
333 अभ्यर्थी अन्य राज्यों के, कुल 16.43% बाहरी राज्यों के।
यूपीपीएससी 2024:
932 कुल चयनित अभ्यर्थी।
68 अभ्यर्थी अन्य राज्यों के, कुल 7.3% बाहरी राज्यों के।
यूपीपीएससी में सीटें अधिक होती तो वहां भी अन्य राज्यों के अभ्यर्थियों का चयन अधिक होता।
लेकिन मूल समस्या जो अभ्यर्थियों ने बताया है वो ये है कि, BPSC ने अब बिहार से जुड़े प्रश्न पूछने बहुत कम कर दिए हैं। और इंटरव्यू में सेटिंग तो चलती ही है वो हम पहले ही बता दिए। ये सब भी कारण है कि 333 अन्य राज्यों के सफल हुए हैं।
लोग साल में, कुछ हजार सरकारी ���ौकरी के लिए डोमिसाइल जैसी नीति लागू करने बोल रहे हैं। लेकिन किसी को ये नहीं पड़ी की राज्य के लाखों प्राइवेट जॉब कहाँ हैं? सरकारी नौकरी का रोग बिहार के युवाओं को बर्बाद ही कर रहा है।
#Bihar #BPSC
@Bihar_se_hai 2000 वैकेंसी में लगभग 330 लोग दूसरे राज्यों(यूपी, झारखंड, MP, WB, HR,RJ etc) से केवल योग्यता के आधार पर सेलेक्ट हुए व लगभग 16% के बराबर है,इसका मतलब 84% नौकरियां केवल बिहार के लोगों ��ो ही मिली हैं
how much reservation you want in PCS level exam? 100% ? Stupid post.
UPPCS 2024 (जिसका रिजल्ट 2026 में आया) में कुल 932 अभ्यर्थियों का चयन हुआ था।
इनमें:
864 उम्मीदवार उत्तर प्रदेश के थे (92.7%)
68 उम्मीदवार अन्य 10 राज्यों से थे (7.3%)
बिहार के 12 उम्मीदवार चयनित हुए थे (लगभग 1.29%)
और इधर बिहार के बच्चो का हक up वाले बच्चे खा रहे
@curioussoulind@CivilsNetwork@Bihar_se_hai Do research properly. In UP, UR cutoff is low in both prelims and mains stage...to kaisa discrimination outsiders ke sath ?? UP ke ews/obc bahar ho jate h jyada number lake in prelims+mains.
Some days feel like walking through a fog that never clears,roads ahead seem endless,no direction feels right.
smiles become shorter, thoughts become heavier & silence starts saying more than words ever could.Every step forward feels uncertain & every plan fades before it begins!
British public school Gaya , where Subham kumar (AIR -01 ) studied, had already predicted in 2024, that that he is going to be a topper in JEE advanced.
His school also gave 2 lacs scholarship at that time for his IIT preparation.
पढ़े-लिखे लोगों की बात ही अलग होती है।
दुनिया ही अलग होती है।
थैंक यू अंजना ओम कश्यप।
कितने टीचर सामने आ गए।
सबका अलग अंदाज लेकिन एक बात कामन की सब मुद्दों पर डटे हुए हैं।
स्टूडेंट, शिक्षा, पेपर लीक, परीक्षा में गड़बड़ी, नौकरी और बच्चों का भविष्य।
12 साल से देश में जो डर का माहौल था उसे तोड़ दिया।
सबसे बड़ी बात।
यह काम उन्होंने खतरा उठाकर किया।
शिक्षकों के साथ कुछ भी हो सकता है मगर बच्चों और देश की भविष्य के लिए वे खुलकर सामने आ गए।
सैल्यूट है देश के टीचरों को।
बोल तो हमारे यहां बहुत जाता है गुरु की महिमा, गुरु गोविंद से भी बड़े मगर दो बातें पहली बार हुई एक टीचरों के लिए इतने अपमानजनक श��्दों का प्रयोग और दूसरी टीचरों ने इसे चुपचाप सुनने से इनकार कर दिया और खुलकर सामने आ गए।
शिक्षकों की ऐसी एकजुटता पहले कभी नहीं देखी गई।
इसका असर होगा।
पॉजिटिव।
देश शिक्षा युवा स्टूडेंट सबके हित में।
BPSC 70वीं का प्रीलिम्स दिसंबर 2024 में, मेंस अप्रैल 2025 में और इंटरव्यू 10 अप्रैल 2026 को समाप्त हो चुके हैं।
आज लगभग 50 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अंतिम परिणाम अब तक जारी नहीं हुआ।
आयोग के कैलेंडर में अप्रैल–मई 2026 का वादा था। इंटरव्यू के दौरान भी अप्रैल में रिजल्ट आने की बात कही गई थी। अब न रिजल्ट है, न कोई स्पष्टीकरण।
सबसे हैरानी की बा��� यह है कि 70वीं का अंतिम परिणाम लंबित रहते हुए 71वीं की प्रीलिम्स और मेंस परीक्षा भी करा ली गई, जबकि 72वीं की परीक्षा भी अगले महीने प्रस्तावित है।
UPSC ने इंटरव्यू खत्म होने के 7 दिन के भीतर, UPPSC ने 8 दिन में और RPSC ने सिर्फ 1 दिन में अंतिम परिणाम जारी कर दिया।
फिर BPSC अभ्यर्थियों को आखिर किस बात की सजा दी जा रही है?
युवा अपने करियर, पोस्टिंग और भविष्य को लेकर अनिश्चितता में हैं। BPSC तत्काल 70वीं का अंतिम परिणाम जारी करे।
#ReleaseBPSC70thResult
@BPSCOffice माननीय आयोग से निवेदन है कि परिणाम घोषित करने की संभावित तिथि के संबंध में जानकारी प्रदान करें। साक्षात्कार प्रक्रिया पूर्ण हुए लगभग दो माह बीत चुके हैं, किंतु अभी तक परिणाम को लेकर कोई स्पष्ट सूचना जारी नहीं की गई है।
#Declare70thBPSCResult#BPSCCalenderFailure#BPSC
70वीं BPSC सिविल सेवा परीक्षा के अभ्यर्थी लंबे समय से परिणाम की प्रतीक्षा कर रहे हैं। प्रारंभिक परीक्षा हुए लगभग डेढ़ वर्ष और साक्षात्कार संपन्न हुए दो महीने से अधिक समय बीत चुका है, फिर भी आयोग की ओर से कोई स्पष्ट सूचना नहीं है। इस अनिश्चितता ने अभ्यर्थियों को मानसिक तनाव में डाल दिया है और इससे उनकी आगे की तैयारी भी प्रभावित हो रही है।
आयोग को शीघ्र परिणाम जारी कर अभ्यर्थियों की चिंताओं का समाधान करना चाहिए। युवाओं का समय, श्रम और भविष्य किसी भी व्यवस्था की प्राथमिकता होना चाहिए। जय हिन्द
#BPSC #70thBPSC #StudentsFirst
माननीय आयोग से निवेदन है कि परिणाम घोषित होने की समय-सीमा के बारे में आधिक��रिक सूचना जारी की जाए। परिणाम में हो रही देरी से अभ्यर्थियों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
#Declare70thBPSCResult
#BPSCCalenderFailure
#BPSC
70वीं BPSC सिविल सेवा परीक्षा के अभ��यर्थी लंबे समय से परिणाम की प्रतीक्षा कर रहे हैं। प्रारंभिक परीक्षा हुए लगभग डेढ़ वर्ष और साक्षात्कार संपन्न हुए दो महीने से अधिक समय बीत चुका है, फिर भी आयोग की ओर से कोई स्पष्ट सूचना नहीं है। इस अनिश्चितता ने अभ्यर्थियों को मानसिक तनाव में डाल दिया है और इससे उनकी आगे की तैयारी भी प्रभावित हो रही है।
आयोग को शीघ्र परिणाम जारी कर अभ्यर्थियों की चिंताओं का समाधान करना चाहिए। युवाओं का समय, ���्रम और भविष्य किसी भी व्यवस्था की प्राथमिकता होना चाहिए। जय हिन्द
#BPSC #70thBPSC #StudentsFirst
नमस्ते भैया,
मेरा नाम … है और मैं एक मह्त्वपूर्ण मुद्दे के तरफ आपका ध्यान आकृष्ट कराना चाहता हूँ।
Bpsc 70 वीं सिविल सेवा परीक्षा 2024 का prelims dec24 में हुआ तथा mains April25 हुआ किन्तु अबतक इसका अंतिम परिणाम नहीं आया है जब कि साक्षात्कार 10 अप्रैल 2026 को ही सम��प्त हुआ था।(approx 50 days हो गए)
Bpsc आयोग के कैलेंडर में परिणाम अप्रैल-मई 2026 दिया गया ��था परीक्षा नियंत्रक के द्वारा साक्षात्कार के दौरान अप्रैल 2026 में परिणाम जारी करने की बात कही गयी किन्तु अभी तक परिणाम जारी नहीं हुई।
आमतौर पर BPSC द्वारा साक्षात्कार समाप्ति के एक सप्ताह में परिणाम जारी कर दिया जाता है,किंतु इसबार कोई सूचना भी नहीं दिया जा रहा आयोग के तरफ से परिणाम को लेकर।
यही नहीं 70 वीं के अंतिम परिणाम के बिना ही 71 वीं prelims और mains करा लिया गया तथा 72 वीं भी अगले माह में कराया जा रह��� है।
भैया, 2026 में ही UPSC ने अपने साक्षात्कार समाप्ति के 1 सप्ताह के अंदर ,
UPPSC ने 8 दिन के अंदर और
RPSC ने 1 दिन के अंदर अंतिम परिणाम जारी कर दिया है।
बहुत मानसिक रूप से तनाव में है...बहुत उम्मीद से msg भेज रहे।
*क्यों BPSC, क्यों?*
मैंने अपने स्तर पर इसकी जाँच परख नहीं की है। एक पीड़ित छात्र ने यह मैसेज किया है। जिन्हें ध्यान देना चाहिए वो अगर देख रहे हैं तो ध���यान दें। ऐसा मत करें कि छात्र अवसाद का शिकार हो जाए।
नमस्ते सर
आपका ध्यान मै 70वी बीपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के रिजल्ट पर लें जाना चाहता हूं। सर प्री एग्जाम हुए लगभग 1.5 साल हो गए और इंटरव्यू हुए 2 महीना पर अभी तक आयोग के तरफ से रिजल्ट को लेकर कोई अपडेट नहीं है। आगे की परीक्षा कराई जा रही है लेकिन पहले वाले का रिजल्ट नहीं । इसके वजह से काफी मेंटल प्रेशर है और आगे के एग्जाम का तैयारी भी नहीं हो पा ��हा है। कृपया सर इस मुद्दे पर अपना ध्यान दीजिए एक बार
जब पति से ना बन रही हो तो देवर से इतनी बात कौन करता है कि वो सीधे शादी के लिए प्रपोज कर दे...क्या पता इनडायरेक्टली ही सही इस औरत ने उकसाया हो और बोला हो कि बच्चा है इसीलिये शादी नहीं कर सकती...बच्चा ना होता तो शादी कर लेती...
कलयुग को देखते हुए सख्ती से पुछताछ हो इस औरत से...
#उत्तर_प्रदेश ��इससे बड़ा निर्दयी और कोई नहीं
👉🏾 महिला के बुआ सास का लड़का शादी के लिए कह रहा था, महिला ने शादी से मना कर दिया, कहा मेरा डेढ़ साल का बच्चा है, उसी वक्त जितेन्द्र पाठक बच्चे को टॉफी दिलाने को कहकर गोद में लेकर बाहर निकल गया, कुछ दूर जाकर सुनसान जगह देखकर बच्चे को जमीन में पटकना शुरू कर दिया, बच्चे को तब तक पटका जब तक उसकी मौत नहीं हो गई।
👉🏾 फिरोजाबाद जिले में मासूम बच्चे को 8 बार जमीन पर पटककर मौत के घाट उतारने वाला जितेंद्र पाठक अब गिरफ्तार हो गया है। पुलिस ने दोनों पैरों में गोली मारी है, लेकिन वो जिंदा है, और सुरक्षित है।
👉🏾 ऐसे कई मामलों में आप देखें होंगे जहां पुलिस पैरों में नहीं सीधे सीने में गोली मारकर इनकाउंटर किया है, लेकिन यहां ऐसे नहीं किया।
अभी-अभी खान सर ने अंजना ओम कश्यप को तगड़ा जवाब दिया है
अंजना ओम कश्यप और ऑनलाइन कोचिंग पढ़ाने वाले टीचरों के बीच काफी तगड़ा विवाद हो गया है
अंजना ओम कश्यप का तो ऐसा हिसाब हो गया है एक तो चोरी ऊपर से सीनाजोरी।
A revealing chat with my fellow “anti-national Soros agents.”
Vedant and his friends are brilliant, brave young Indians who asked CBSE and the Modi government simple questions - but got insults instead of answers.
They deserve a bright and secure future. We will make sure they get it.