@RebornManish एकदम सत्य वचन ठाकुर साहब,
बस एक बात ठीक करनी है।
अधिकतर मुसलमान भी इसी मिट्टी के थे। कुछ को विदेशी धर्म ��च्छा लगा उन्होंने उसे अपनाया। इस से वे बाहरी/विदेशी नहीं हो गए।
@viks_1011@shail_bse@news24tvchannel बंधु vvpat में बूथ कैप्चरिंग कहां से आ गई।
और च��नाव आयोग को इससे क्या फर्क पड़ता है कि पर्ची गिनने में कई दिन लग जायेंगे। अभी भी चुनाव में महीनों लग ही जाते हैं।
@INDVivekPandey_ इस लेख से यह समझ नहीं आया कि आज़ादी की लड़ाई मे उनका योगदान क्या था। माफ़ी मांग कर रिहा होने के बाद उन्होंने देश की आज़ादी में किस प्रकार सहयोग दिया। बोस और भगत उनसे मिले, उनको पढ़ा पर उनको विचारों को सिरे से खारिज किया। उन्हें कभी अपना गुरु तो दूर की बात है, साथी भी नहीं कहा।
@ronak_parihar03@suryapsingh_IAS काश यह सब आप और हम भी सीख लेते कि किस प्रकार धर्म को हर जगह नहीं घुसाया जाता। इसे अपनी आस्था के साथ ही देखना चहिए न कि किसी दूसरे को हेय बनाने के लिए।