जब पत्रकारों ने अपना काम करना बंद कर दिया बल्कि negative काम करने लगे तो देश की असली चिंता करने वालों ने mobile और mic पकड़ा!
आज youtube media fact check करके बताता है कि tv media कैसे झूठ नफरत फैला रहा!
CJI साहब ने tv channels के सरकार का गुणगान करने और trp सनसनी के अंधेपन में जो fake news चलायी उस पर comment नहीं किया जो कितना जरूरी है!
दुःखद 💔 @CJI
I am so happy that some residences of Shivaji park are getting sensitive about the noise pollution and asking the authorities to cancel the protest of CJP today at Shivaji park . I am hundred percent sure that they will raise the same objection with the same intensity if not more when ever there is any jalsa of any political party of Maharashtra is planned at Shivaji park ,
अभी तक आपने फूड सेक्टर में IAS तुकाराम मुंडे जी को तबाही मचाते देखा होगा लेकिन एक और विभाग है Judiciary Department का
जिसमें जज रवि कुमार दिवाकर तबाही मचा रखे हैं।🔥
ये वही Judiciary Department है जहां पर कहा जाता है कि न्याय के नाम पर सिर्फ तारीख मिलती है। लेकिन
रवि कुमार दिवाकर जी जो उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में जज हैं जिन्होंने अभी तक ताबड़तोड़ सुनवाई करते हुए कुल 22 फांसी की सजा सुना चुके हैं।
कल उन्होंने 23 वीं फांसी की सजा सुनाते वक्त कहा कि
"मैं डरपोक जज कहलवाने के बजाय मरना पसंद करूंगा लेकिन अपने सिद्धांतों से पीछे नहीं हटूंगा।"
असम की घटना देखी थी फिर नेपाल की तस्वीरें आईं, वो उससे भी ज्यादा भयानक थीं।
और आज दिल्ली के सत्य निकेतन में ये हादसा हुआ।
ऐसी खबर सुनते ही दिल सच में सहम जाता है।.......
जो बच्चे पढ़ने आए थे, वो मलबे के नीचे दबे हैं
मन नहीं मान रहा।.
भगवान सबकी रक्षा करे, रेस्क्यू टीम को ताकत दे।
आज मैंने 13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देते हुए IAS से त्यागपत्र दे दिया है।
साधारण परिवेश में पलते हुए मैंने एक अच्छे, सफल जीवन का सपना देखा था। दिन-रात एक कर IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ने के बाद, लंदन में नौकरी लग गयी। पर 'सब कुछ' पा लेने पर भी कुछ अधूरा था। अपने देश में न होना खलता था। मेरी पढ़ाई, आत्मविश्वास, दुनिया में कहीं भी सिर उठाकर चलने की ताक़त, सब इस मिट्टी का कर्ज़ था मुझ पर। वो कर्ज़ चुकाना था। चाहती थी जिस भारत का सपना देखा था, उसे बनाने वाली ईंटों पर मेरे भी हाथों के निशान हों। सो लौट आई, और IAS अधिकारी बनने का सौभाग्य मिला।
बहुत कुछ करने का मौका मिला और बहुत सीखा। देवरिया ने सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना विकल्प नहीं, कर्तव्य है। मीरजापुर ने सिखाया कि 'असंभव' कोई तथ्य नहीं, बस एक राय है। और माँ विंध्यवासिनी के चरणों में बैठकर सीखा कि शक्ति किसी पद से नहीं, उनकी कृपा और लोगों के विश्वास से आती है। सबसे बड़ी सीख यह थी कि अपने लिए देखे सपने तो पूरे हो चुके थे, अब अपने लोगों के लिए देखे सपनों को जीना था। इस जीवन का असली सुकून उन आँखों में दिखा, जिस परिवार को पहली बार ज़मीन का हक़ मिला, जिस दिव्यांग को सम्मान से जीने का अवसर मिला, और जिस किसान के खेत को पानी मिला। उनके संघर्षों में साथ चलते हुए मैंने सीखा कि हर सरकारी फ़ाइल के पीछे एक व्यक्ति है, और उसकी गरिमा बनाये रखना ही न्याय है।
मूर्ख थी जो सोचा था कि कुछ देने आयी हूँ। सच यह है कि सबसे ज़्यादा मैंने ही पाया, और वो कर्ज़ और भी बढ़ता गया। लोग मेरी ख़ुशी में मुझसे ज़्यादा ख़ुश हुए। उन्होंने मुझे तब भी उसी विश्वास से देखा, जब मैं खुद ही थकी या टूटी थी। और इसी ने आगे बढ़ते रहने की हिम्मत दी। इतना प्यार, इतना सम्मान, इतना अपनापन मिला, कि मेरी झोली पूरी भर गयी। और इसमें उन साथियों, अधिकारियों और कर्मचारियों का भी बहुत बड़ा श्रेय है जिन्होंने मेरे कंधे से कंधा मिलाकर काम किया और साथ डटे रहे।
आज आभार से आँखें नम हैं। बस एक दृश्य इनमें बसा है। लहुरिया दह की पहाड़ी की वो वृद्ध माँ, जो अपने गाँव में पहली बार पानी पहुँचता देख कुछ नहीं बोली, बस काँपते हाथों से मेरा सिर छूकर आशीर्वाद दे गई। पद तो आज छूट गया, पर वह स्पर्श जीवन भर नहीं छूटेगा। और वह सपना भी नहीं छूटेगा, जो देश की इस मिट्टी ने मुझे दिया है।
आपकी अपनी,
दिव्या मित्तल
. @JPNadda जी, यह सिर्फ़ मिलावट या कालाबाज़ारी का नहीं, बल्कि इंसान की ज़िंदगी से खिलवाड़ है।
एक Cancer patient और उसका परिवार लाखों रुपये जुटाकर जिस Injection को जिंदगी की उम्मीद समझकर खरीदता है, अगर उसमें दवा की जगह सिर्फ़ पानी निकलने का आरोप सामने आए, तो सोचिए कितने परिवारों ने अपनी जिंदगी की जमा-पूंजी, उम्मीद और शायद अपनों को खो दिया होगा।
उन Cancer patients और उनके परिवारों को न्याय कैसे मिलेगा जो इस कथित धोखाधड़ी के शिकार हुए?
#Reservation
आरक्षण गरीबी हटाओ योजना नहीं‚
सामाजिक न्याय का साधन है।
यह आर्थिक कमजोरी नहीं‚
ऐतिहासिक सामाजिक वंचना के प्रश्न से जुड़ा है
“इसका उद्देश्य प्रतिनिधित्व और अवसरों में असमानता को कम करना है”
रही बात गरीबी हटाओ उन्मूलन की तो उसके लिए सरकारें अपनी अपनी सहूलियत के हिसाब से पॉलिसीज बगैरा चलाती हैं।
जय भीम 🌿
आरक्षण गरीबी हटाने की योजना नहीं है, बल्कि उस सामाजिक भेदभाव का जवाब है जो पीढ़ियों से लोगों के अवसर छीनता रहा है।
अगर आर्थिक स्थिति सुधर जाने से जाति खत्म हो जाती, तो शायद आरक्षण की बहस भी खत्म हो जाती।
सवाल है क्या आज भी समाज किसी व्यक्ति को उसकी जाति के आधार पर देखना बंद कर चुका है?
आरक्षण पर राय देने से पहले उसके उद्देश्य को समझना जरूरी है।
#Reservation #CasteDiscrimination #SocialJustice #India
Tukaram mundhe had been transferred 25 times in 21 years.
I am pretty sure now Maharastra goverment is scared of the backlash and hence is unable to transfer him 26th time.
So they are biding time till Mundhe goes out of the news cycle.
आप सब अपने अपने गुनाहों का हिसाब रखिए क्योंकि आज नहीं तो कल आप जैसों का भी नाम आयेगा कि आपने इस देश को मौलिक सरोकारों से भटकाने में सत्ता प्रतिष्ठान की अभूतपूर्व मदद की है।
जय हिन्द
मज़ाल है इन Vacant Posts को भरने के लिए कोई गंभीर बैठक हो जाए, कोई ठोस Timeline बने। ख़ाली पद बढ़ते जा रहे है ……
सच कहूँ तो Students को भी ये लगता है कि इन पदों को भरने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को युवाओं की थोड़ी सी भी चिंता है,
पद खाली रखना लाखों युवाओं के भविष्य को Waiting List में डालने जैसा है। और शिक्षा व्यवस्था का क्या ही कहना ।
NTA आखिर कब सुधरेगा......???
आज फिर एक परीक्षा #AIAPGET2026#AIAPGET में ऐसी अव्यवस्था सामने आई कि छात्रों की सालों की मेहनत पर सवाल खड़ा हो गया।
कहीं Paper Leak, कहीं Server Down, कहीं Centre पर अव्यवस्था तो कहीं बिजली तक चली जाती है।
आपको लगेगा कि ये एक-दो बार हो जाता है, लेकिन ऐसा नहीं है। सिर्फ इसी परीक्षा में लगभग हर साल कोई न कोई दिक्कत सामने आती ही रही है।
आखिर @NTA_Exams की परीक्षा व्यवस्था में कब सुधार होगा?
जर्नलिस्ट राजीव रंजन ने बताया कि पहले हेल्थ इंश्योरेंस पर 18% GST लगता था अब वो 0% हो गया है,
फिर भी उनका प्रीमियम 58,000 रुपया से बढ़कर 62,000 रुपया से ऊपर हो गया।
यानी GST हटने के बाद भी पैसा 18% GST वाले दौर से ज्यादा लग रहा है।
वजह यह कि कंपनियों को इनपुट टैक्स क्रेडिट मिलना बंद हो गया तो उन्होंने रेट खुद बढ़ा दिए।
उन्होंने यह भी बताया कि एक रिश्तेदार का इलाज बिना इंश्योरेंस कार्ड के 42,000 रुपया का था
लेकिन कार्ड दिखाते ही बिल 77,000 रुपया का बन गया।
कुल बात यही कि हेल्थ सेक्टर पर कोई असरदार निगरानी नहीं है
और
टैक्स राहत का फायदा आम आदमी तक नहीं पहुंच रहा है।