#प्रभुश्रीराम #सनातनधर्म
हिंदुओं, पहचानिए ऐसे लोगों को इन्हें ही कालनेमि कहा जाता है, जो आस्था का सम्मान नहीं, बल्कि भड़काने और समाज को बाँटने का माध्यम बनाते हैं। यदि विशेष धर्म की आस्था का इस प्रकार उपहास होता, तो पूरे देश में आग लग जाती।उठिए, जागिए और अपने अधिकारों व आस्था के सम्मान के लिए आवाज़ बुलंद कीजिए।
@SanjayAzadSln@amitmalviya "सिर्फ़ भाषणों से नहीं, सबूतों से सच सामने आता है। यदि प्रमाण हैं तो जांच एजेंसियों और सदन के सामने रखिए। लोकतंत्र में आरोप नहीं, प्रमाण और न्यायिक प्रक्रिया तय करती है कि कौन दोषी है।"
@ArvindKejriwal@amitmalviya@AmitShah@RahulGandhi ये वही व्यक्ति है न जो 2013 में दिल्ली में रोज बिजली का बिल काटने पोल पर चढ़ता था कहता था मेरे पास कागज है सरकार अंबानी चला रहा सब अंबानी को बेच दिया शीला दीक्षित चोर है ..केजरीवाल सर कागज तो दे दो??
@abhijeet_dipke@abhijeet_dipke@RahulGandhi
कहाँ-कहाँ जाओगे इंसाफ़ का परचम लेकर, अभिजीत दीपके, झारखंड और पंजाब की राह भी देख लेना। अगर दर्द सचमुच छात्रों का है, तो वहाँ भी कदम बढ़ाकर देख लेना। न्याय की आवाज़ तभी बुलंद होती है, जब हर प्रदेश के छात्रों के लिए एक-सी हो।
@BBCHindi@BBCHindi
क्या हमारे देश की सरकार को पूछने का अधिकार नहीं ये पैसे कहा से आये है??
पाकिस्तान के गुलाम कश्मीर में अत्याचार हो रहा बच्चियों का बलातकार नौजवानों को गोली मारना लोगो का कहानी पानी बंद करना वो क्यों नहीं दिखा रहे।
@SanjayAzadSln@SanjayAzadSln जरा सोचिए—अगर यही भाषा आपके अपने बच्चों ने सड़क पर इस्तेमाल की होती, तो क्या आप उन्हें शाबाशी देते या संस्कार और मर्यादा का पाठ पढ़ाते? और जिन बच्चों ने इस तरह की गंदी गालियाँ दीं और तोड़फोड़ की, उन्हें सज़ा क्यों न मिले?
@aajtak छात्रों के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए, लेकिन छात्रों के नाम पर हिंसा और तोड़फोड़ करने वालों को बचाना भी सही नहीं है। शांतिपूर्ण छात्रों और उपद्रवियों में फर्क करें। कानून सबके लिए बराबर होना चाहिए
@abhijeet_dipke@Wangchuk66@RahulGandhi
Don’t use students as a tool for political agendas. Peaceful protests are a democratic right, but violence and vandalism cannot be justified. Innocent students must be protected, but those who break the law must face action. Justice should be equal for all.
@RahulGandhi@abhijeet_dipke
"कानून व्यवस्था का विरोध करना और अराजकता फैलाने वालों का समर्थन करना लोकतंत्र नहीं है। अभिव्यक्ति की आज़ादी का मतलब यह नहीं कि किसी को गाली, अपमान या हिंसा की छूट मिल जाए। जो गलत करेगा, उस पर कार्रवाई होना ही एक सभ्य समाज की पहचान है। संस्कार और संविधान दोनों का सम्मान जरूरी है।"
@CJP_for_India@Wangchuk66
अगर आंदोलन शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक है, तो निर्दोष छात्रों और वॉलंटियर्स को परेशान करना या बेवजह FIR दर्ज करना उचित नहीं है। लेकिन यदि किसी ने हिंसा, तोड़फोड़ या कानून का उल्लंघन किया है, तो उसकी निष्पक्ष जांच और कानूनी कार्रवाई भी उतनी ही आवश्यक है। लोकतंत्र में न न्याय से समझौता होना चाहिए, न कानून से।
@suryapsingh_IAS
बिल्कुल सही। Gen Z अब किसी भी राजनीतिक दल का वोट बैंक बनने को तैयार नहीं है। उसे सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि व्यवस्था में वास्तविक बदलाव चाहिए। यदि कोई दल सच में युवाओं का विश्वास जीतना चाहता है, तो उसे युवाओं को केवल वोटर नहीं, बल्कि नेतृत्व में भी उचित भागीदारी देनी होगी। सकारात्मक एजेंडा, जवाबदेही और युवा नेतृत्व ही भविष्य की राजनीति तय करेंगे।