कई मीडिया संस्थानों में खबर है कि राममंदिर के चढ़ावे में गबन हुआ है। अखिलेश यादव जी ने तो सिर्फ उसकी जांच की मांग की है। एंकर्स को जांच की मांग इतनी खराब क्यों लग रही है कि शोर मचाकर असली मुद्दे को ही दबा देना चाहते हैं। ऐसे समय दो मुहावरे बार बार याद आते हैं:-
1.चोर मचाए शोर
2.चोर-चोर मौसेरे भाई
मानहानि के मुकदमे के जरिए क्या अंजना ओम, टीचर्स और पत्रकारों की आवाज दबाना चाहती है?
अंजना ��े 4PM चैनल पर भी मानहानि का केस किया है। क्या अंजना समझती है कि बोलने की आजादी सिर्फ उन्हें ही है? और उनके मालिक आजतक को है?
जो भी अंजना की घटिया पत्रकारिता पर सवाल उठाएगा क्या अंजना उसे कोर्ट में ले जाएगी?
अंजना दीदी कोई मामूली स्त्री नहीं है आजतक पे है ।अंजना दीदी कह रही हैं ।तो अंजना दीदी को कहीं न कहीं स��� इंस्ट्रक्शन जरूर मिला है ।
अंजना दीदी ख़ुद से क्यों कहेंगी ?जब बाली ने सुग्रीव को मारा पटक पटक कर ,बाली भाग कर आए रामचंद्र जी के पास और कहे भैया हम तो मर जाते तुम क्या कर रहे थे ।
अब अवध ओझा सर भी बिल्कुल खुल कर अंजना ओम कश्यप और ख़ान सर की लड़ाई में शामिल हो चुके हैं ।वीडियो 6:47 का है तो टाइम निकाल कर देखिये ।
@khan__sir_patna अंजना अपनी शक्ल देखो कैसी हो गई हो। ये 53 वर्षीय महिला के लिए खान सर का कमेंट्स को नस्लीय माना जाएगा या नहीं। खान सर अपने आप को आलोचना से परे मान चुके है।जो एक शिक्षक के लिए निंदनीय है।वैसे खान सर मै अभी भी आपकी इज्जत करता हूं। लेकिन थोड़ा संयमित बयान दिया करे ओझा सर से कुछ सीखो।
@khan__sir_patna अब गोबर खाने वाले और गौमूत्र पीने बाले मानसिक रूप से रोगी लोग बताएंगे कि खान सर ने गलत किया है। खान सर ने देश के लाखों छात्र-छात्राओं का भविष्य बन���या है, अस्पताल बनाया, सस्ता इलाज दिलाया। इनके n..j..y... ब/ प नहीं कर सका जो खान सर ने अकेले किया ।
#we_support_khan_sir
माननीय न्यायालय में आज हुई सुनवाई के दौरान Anjana & Anr. मामले में कोई Interim Relief प्रदान नहीं की गई। मामले की अगली सुनवाई 17 जून को निर्धारित की गई है।
हम न्यायिक प्रक्रिया का पूर्ण सम्मान करते हैं और न्यायालय के समक्ष अपना विस्तृत उत्तर प्रस्तुत करेंगे। आवश्यकता पड़ने पर उपलब्ध तथ्यों, साक्ष्यों एवं विधिक सलाह के आधार पर अपने अधिकारों की रक्षा हेतु उचित कानूनी कदमों तथा Counter Claim पर भी विचार किया जाएगा।
हमें भारतीय न्यायपालिका पर पूरा विश्वास है। हमारा मानना है कि किसी भी विवाद का समाधान न्यायालय में तथ्यों और कानून के आध���र पर होना चाहिए, न कि मीडिया ट्रायल या सोशल मीडिया की बहसों के आधार पर।
अब 17 जून को न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष रखने की प्रतीक्षा करेंगे।
😂 गज़ब का धर्म मॉडल चल रहा है भाई! एक बुजुर्ग शंकराचार्य को सड़क पर रात गुजारनी पड़े तो फिर सबको अचानक नेटवर्क प्रॉब्लम हो जाती है।
वोट चाहिए तो "सनातन बचाओ" 🚩
वोट चाहिए तो "गौ माता हमारी मां है" 🐄🙏
वोट चाहिए तो "संतों का सम्मान करो" 🕉️
लेकिन ज़मीन पर क्या हो रहा है? 🤔
इस स्टोरी को ही गोदी चैनल दस दिन रिपोर्ट कर दें। सारी एजेंसियाँ हरकत में आ जाए। ऐसा होगा नहीं । प्रधानमंत्री आम जनता से पैसा बचाने की अपील कर रहे हैं और पचास अफ़सर 3200 करोड़ ज़मीन के धंधे से बना रहे हैं। बाद में इसी टाइप के अफ़सर लोकतंत्र की हत्या की सुपारी लेकर सरकार के काम आते हैं। अगर देश में राष्ट्रवाद और धर्म की लहर चल रही है तो इन अफ़सरों के आँगन ���ें नैतिकता की बूंदा बांदी भी नहीं हुई क्या ?
क्या सोना-चाँदी विक्रेता संघ ने एक साल तक सोना न ख़रीदने की अपील का स्वागत किया है? उन सभी को एक साल तक सोना न बेचने की सौगंध लेनी चाहिए। इस धंधे में लगे लोगों का क्या होगा ?