‘संविधान हत्या’ ये दो शब्द कभी एक साथ जा ही नहीं सकते क्योंकि इस देश में संविधान की हत्या करने वाला आज तक कोई पैदा ही नहीं हुआ है
हत्या की जगह 'रक्षा' या 'बचाओ' भी तो कह सकते थे. लेकिन यह हत्या शब्द BJP के अंदर की नफ़रत, उनकी कुंठा, उनका असली चेहरा और उनके अंदर की हिंसा का परिचायक है
असलियत यह है कि संविधान बदलने की BJP की साज़िश नाकाम हो गई और इस देश की जनता ने उनके षड्यंत्र का पर्दाफ़ाश कर दिया - और इस तरह की ऊल जलूल हरकतें हार की झुँझलाहट और ध्यान भटकाने की नाकाम कोशिशें हैं
जब बात अग्निवीर पर होनी चाहिए, मणिपुर पर होनी चाहिए, ब���रोज़गारी पर होनी चाहिए, महँगाई पर होनी चाहिए - तो बात करेंगे 50 साल पहले की!
अगर ऐसा ही है तो क्यों ना हर दिन इस देश में रोज़गार हत्या दिवस, किसान हत्या दिवस, महिला सुरक्षा हत्या दिवस ना मनाया जाये?
'बेरोज़गारी की बीमारी' भारत में महामारी का रूप ले चुकी है और भाजपा शासित राज्य इस बीमारी का 'एपिसेंटर' बन गए हैं।
एक आम नौकरी के लिए कतारों में धक्के खाता ‘भारत का भविष्य’ ही नरेंद्र मोदी के ‘अमृतकाल’ की हकीकत है।
मणिपुर को अस्थिर हुए एक साल से ज्यादा समय हो चुका है। यहां के लोग हिंसा, हत्या, दंगा और विस्थापन झेल रहे हैं। हजारों मासूम राहत कैंप में रहने को मजबूर हैं। आखिर प्रधानमंत्री मणिपुर पर अपना मुंह कब खोलेंगे? आखिर सरकार ने मणिपुर में शांति के प्रयास क्यों नहीं किए?
Those lecturing on political discourse - how many of you were dismayed and called out Modi when he used word like Mujra?
मुजरा, मंगलसूत्र, भैंस पर चुप. नेता प्रतिपक्ष को बालक बुद्धि बोलने पर चुप. तो अब भी चुप रहिए, ज्ञान मत दीजिए
सम्मान देंगे, तो सम्��ान मिलेगा
व��देश में भी PM नेहरू PM मोदी का पीछा नहीं छोड़ रहे
पंडित जवाहर लाल नेहरू जी की ठोस मध्यस्था की वजह से 1955 में ऑस्ट्रिया स्वतंत्र देश बना।
मोदी जी के सामने बोले ऑस्ट्रिया के चांसलर।
लोकसभा चुनाव के तुरंत बाद आए विधानसभा उपचुनाव के नतीजों ने बता दिया कि भगवान बीजेपी से रुष्ट हो गए हैं।
अयोध्या हार चुकी भाजपा इस उपचुनाव में बद्रीनाथ सीट भी हार गई है और बद्रीनारायण ��गवान का आशीर्वाद कांग्रेस को मिला।
इसका साफ-साफ यह मतलब है कि बीजेपी का हर कदम पतन की ओर बढ़ रहा है। आगे जैसे-जैसे चुनाव होंगे बीजेपी रसातल में नजर आएगी।