मैं और ईश्वर बस अब किसी के साथ की ज्यादा कामना भी नहीं
हां थोड़ा दुःख होता है शुरुआत में पर इंसान अकेले आया है और अकेले जाना भी निश्चित है
इसलिए बेहतर है खुद का दोस्त बना जाए
बजाय इसक�� कि झूठी संगति में जीवन व्यतीत हो❤️
जैसे जैसे जीवन आगे बढ़ रहा है वैसे वैसे लोगों के चेहरों से मुखौटे हटते चले जा रहे है
जिनको मैं अपना समझता था एकाएक सब जीवन से दूर चले गए |
कभी सोचा नहीं था लोग जलन में इस हद तक गिर सकते है पर जीवन है और मुझे खुशी है कि जीवन में अब भीड़ नहीं |
जब जब जो जो होना है तब तब सो सो होता है फिर फर्क नहीं पड़ता कि तुम कौनसा व्रत रखते हो कहा अपना माथा टेकते हो शिवलिंग पर कौनसा पत्ता चढ़ाते हो कौनसी दरगाह में कितने की चादर चढ़ाते हो
नियति has its own plan 💫
ज़िन्दग�� के द्वारा मिले गए संघर्ष के ज़ोरदार तमाचे ने मुझे इतना तो समझा दिया है
कि आपके अच्छे समय में सारा जहां आपका है, पर मुसीबत के समय बस मां बाप का साथ ही काम का हैं ....