विज्ञान वह व्यवस्थित ज्ञान या विद्या है जो विचार, अवलोकन, अध्ययन और प्रयोग से मिलती है, जो किसी अध्ययन के विषय की प्रकृति या सिद्धान्तों को जानने के लिये किये जाते हैं। ऐसा कहा जाता है कि विज्ञान के 'ज्ञान-भण्डार' के बजाय वैज्ञानिक विधि विज्ञान की असली कसौटी है। ...
सामान्यतः ज्ञान से तातपर्य मानव जाति की उस जानकारी से लिया जाता है जो उसे भौतिक जगत एवं आध्यात्मिक जगत के बारे में है। 'ज्ञान' शब्द 'ज्ञ' धातु से बना है जिसका अर्थ 'जानना' ,बोध,अनुभव एवं 'प्रकाश' से माना गया हैकिसी वस्तु के स्वरूप का,जैसा वह है,वैसा ही अनुभव या बोध होना ज्ञान है।

भागवत ६.१.४० में लिखा है कि जो वेद में कहा गया है ये करो ये करो वो धर्म है और जो कहा गया कि ये न करो ये न करो उसका नाम अधर्म। जैसे वेद ने कहा तैत्तिरीयोपनिषत् १.११ "सत्यं वद । धर्मं चर ।" अर्थात् सत्य बोलों वर्णाश्रम धर्म का पालन करो - ये धर्म है। ... इसी का नाम धर्म अधर्म।