कुशल संगठनकर्ता, ओजस्वी वक्ता, सरल एवं प्रेरणादायी व्यक्तित्व के धनी, भारत के यशस्वी रक्षा मंत्री एवं भारतीय जनता पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष,माननीय श्री @rajnathsingh जी को जन्मदिवस की हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनाएँ।
#NoTetBeforeRteAct
TET की अनिवार्यता ख़त्म करने के विषय में मा श्री सी आर पाटिल मंत्री भारत सरकार से अपने सहयोगी साथी श्री राम मूर्ति ठाकुर महासचिव,(झारखंड),श्री राहुल अंकुश गव्हाणे उपाध्यक्ष (गुजरात) एवं श्री राधे रमण त्रिपाठी उपाध्यक्ष (उत्तर प्रदेश) के साथ भेंट की ।
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@DrDCSHARMAUPPSS@TFI4India@UPPSS1921 पूर्व में भी कई बार सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को सरकार द्वारा मानने से इन्कार किया जा चुका है लेकिन दस महीने बीत जाने के बाद भी शिक्षकों इस अन्याय से राहत देने के बारे सरकार कोई ठोस पहल नहीं कर रही है अत्यन्त खेदजनक है ।
@DrDCSHARMAUPPSS@TFI4India@UPPSS1921 बदलते वक़्त के साथ परीक्षा का नाम बदल गया । सभी परीक्षाओं में नाम बदले , लेकिन बदले हुए नाम वाली परीक्षा सिर्फ शिक्षकों को देनी है ।
#NoTetBeforeRteAct
माननीय श्री राजनाथ सिंह जी रक्षा मन्त्री भारत सरकार से भेंट करके टेट के प्रकरण पर विस्तृत जानकारी दी ।माननीय जी को वार्ता के दौरान स्मरण कराया कि जब वर्ष 1998 में उत्तर प्रदेश के शिक्षकों की 36 दिन की हड़ताल और 167 शिक्षकों की सेवा समाप्ति के बाद भी जिस समस्या का समाधान नहीं हुआ था,उसका समाधान आपने उत्तर प्रदेश में अपने मुख्य मंत्रित्व काल में किया था,जिसके चलते आज उत्तर प्रदेश के शिक्षक केन्द्र के समान वेतनमान लेते हैं ।
आज भी प्रधानमन्त्री जी के नेतृत्व में संसद द्वारा क़ानून पारित करा कर,आरटीई लागू होने से पूर्व में नियुक्त शिक्षकों पर टेट की अनिवार्यता सम्बन्धी अन्याय को समाप्त किया जा सकता है ।देश के शिक्षकों को आप पर पूर्ण विश्वास है ।मेरे साथ teachers federation of india के उपाध्यक्ष श्री राधेरमण त्रिपाठी जी भी वार्ता में उपस्थित रहे ।
#NoTetBeforeRteAct
TET की अनिवार्यता समाप्त करने हेतु आरटीई में संशोधन सम्बन्धित ज्ञापन मा उप मुख्यमंत्री श्री ब्रजेश पाठक जी को दिया गया ।@brajeshpathakup
#NoTetBeforeRteAct
जो व्यवस्था देश के किसी कर्मचारी,अधिकारी या न्यायाधीश पर लागू नहीं है वो देश के बेसिक शिक्षकों पर लागू करना देश के 25 लाख शिक्षकों एवं उनके करोड़ों परिजनों के साथ अन्याय है ।
TFI के राष्ट्रीय अध्यक्ष आदरणीय डॉ दिनेश चन्द्र शर्मा जी द्वारा माननीय प्रधानमंत्री जी को ऐतिहासिक पत्र ,अकाट्य तर्क सहित प्रामाणिक तथ्य के साथ भेजा गया ।🙏
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आखिर बेसिक शिक्षकों के साथ ही ऐसा अन्याय क्यो?
1 सितंबर 2025 के माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के अनुसार पूर्व गामी प्रभाव से वर्तमान में कक्षा 1 से 8 तक के विद्यालयों में सेवारत सभी शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा(TET) उत्तीर्ण करना अनिवार्य किया गया है. एक विचित्र विडंबना यह भी है कि जिन शिक्षकों की सेवाएं 5 साल से कम है उन्हें तो 5 साल तक सेवा में बने रहने का अवसर प्रदान किया गया है अर्थात उन्हें योग्य माना गया है. परंतु जिन शिक्षकों की सेवाएं 5 वर्ष से अधिक हैं उन्हें 31 अगस्त 2028 तक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करनी है अर्थात वह अयोग्य हैं.
सबसे पहले शिक्षक पात्रता परीक्षा की संकल्पना उच्च शिक्षा में की गई थी. उस समय डिग्री कॉलेज या विश्वविद्यालय में लेक्चरर के पद पर नियुक्ति हेतु नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट (NET) उत्तीर्ण करना अनिवार्य किया गया था. परंतु उस समय भी किसी माननीय न्यायालय द्वारा या किसी सरकार द्वारा यह नहीं कहा गया कि उसके पूर्व के नियुक्त शिक्षकों को सेवा में बने रहने के लिए नेट उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा . इसी तरह से अभी हाल ही में कुछ वर्षों से उत्तर प्रदेश राज्य में तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों की नियुक्ति हेतु प्राइमरी एलिजिबिलिटी टेस्ट (PET) पास करना अनिवार्य किया गया है. राज्य सरकार की किसी भी तृतीय सेवा में नियुक्ति के लिए वही लोग पात्र होंगे जिन्होंने प्राइमरी एलिजिबिलिटी टेस्ट(PET) उत्तीर्ण किया होगा. लेकिन यहां भी यह प्रावधान नहीं किया गया की जो कर्मचारी पूर्व में नियुक्त हैं उन्हें भी सेवा में बने रहने के लिए प्राइमरी एलिजिबिलिटी टेस्ट(PET) उत्तीर्ण करना होगा.
कुल मिलाकर किसी भी विभाग में भर्ती के लिए नियम समय-समय पर बनते रहते हैं और उनमें परिवर्तन होता रहता है. लेकिन आज तक के इतिहास में यह कभी नहीं देखा गया की जो पूर्व में नियुक्त कर्मचारी या शिक्षक हो वह वर्तमान मैं जारी की गई भर्ती नियमों के अधीन आते हों. केवल बेसिक शिक्षकों के लिए यह अभूतपूर्व निर्णय किया गया है. एक बड़े चिंतन का विषय है कि आखिर बेसिक शिक्षकों से परेशानी क्या है? जो देश के नागरिकों का निर्माण करते हैं उन्हीं शिक्षकों को क्यों इस तरह से हताशा में डाला जा रहा है. आज पूरे देश का 25 लाख शिक्षक एक हताशा की स्थिति से गुजर रहा है. उसको अपने तथा अपने परिवार के भविष्य को लेकर इतनी चिंता है कि वह अन्य किसी विषय में सोच भी नहीं सकता है. अब मानसिक रूप से बीमार शिक्षक किस तरह की शिक्षा प्रदान करेगा क्या यह बात सोचने की नहीं है. माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय को अंतिम नहीं माना जा सकता है. भारत की संसद को किसी भी नियम में परिवर्तन करने का अंतिम अधिकार प्राप्त है.
अब इतना कुछ होने के बाद भी केंद्र की सरकार कान में तेल डालकर क्यों बैठी है? ऐसा नहीं है कि प्रकरण केंद्र सरकार के संज्ञान में नहीं है. दर्जनों माननीय सांसदों द्वारा इस प्रकरण को संसद में उठाया जा चुका है. इसके अतिरिक्त टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के बैनर तले दिल्ली के रामलीला मैदान में देश भर के लाखों शिक्षकों ने धरना प्रदर्शन करके सरकार को जगाने का भी प्रयास किया है. परंतु केंद्र सरकार के किसी जिम्मेदार द्वारा अभी तक इस विषय में किसी भी तरह का कोई बयान नहीं दिया गया. यह अत्यंत ही दुखद है. कहने में कोई संकोच नहीं कि देश के कर्णधारों का निर्माण करने वाले बेसिक शिक्षकों के प्रति केंद्र सरकार की संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है. इस विषय पर एक लोक कल्याणकारी सरकार को तुरंत कोई ना कोई कार्रवाई करनी चाहिए जिससे देश के लगभग 25 लाख शिक्षक और उनके परिवारों ( जो कि निश्चित रूप से इसी देश के नागरिक हैं ) का भविष्य संकट में न पड़ने पाए.
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@DrDCSHARMAUPPSS न्यायाधीश जैसे महत्वपूर्ण पदों पर बिना परीक्षा पास किए लोग न्याय की सही अवधारणा नहीं समझ पाते है और शब्दों के जाल में उलझ जाते हैं और न्याय की जगह बहुत अधिक अन्याय कर जाते है ।
इस पद पर अवश्य परीक्षा होनी चाहिए ।
#NoTETbeforeRTEact
*IAS, IPS, IFS ,IRS,IES की exam यूपीएससी के माध्यम से भारत में आयोजित होती है। तो IMS (Indian Medical Services) के साथ-साथ IJS (Indian Judiciary Services) या IAS(J) की परीक्षा भी होनी चाहिए। जिससे सभी को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ एक समान न्याय भी मिलें। और जो पूर्व से नियुक्त अधिकारीगण/ न्यायधीश इन परीक्षाओं को पास किए बिना नियुक्त हैं। उन्हें भी 2 वर्ष के भीतर इस परीक्षाओं को पास करना चाहिए। अन्यथा उन्हें भी शिक्षकों की भाँति अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जाएगी क्या?
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