One of the most important stories in recent times. @IndianExpress's @RitikaChopra__ exposes the autocratic / undemocratic way in which CEC Gyanesh Kumar has been working - with undeniable proof from within the Election Commission.
(Even the denial from the @ECISVEEP is meek!)
Gyanesh must Go ! विपक्ष की बात छोड़िए—अब तो चुनाव आयोग के भीतर ही घमासान है।दोनों चुनाव आयुक्तों ने साफ कह दिया है कि ज्ञानेश कुमार के निर्देश पर ही करोड़ों नाम वोटर लिस्ट से काटे गये है और SIR प्रक्रिया अवैध और गैरकानूनी है।
ज्ञानेश कुमार अब पूरी तरह बेनकाब हो चुके हैं और उनके सामने इस्तीफा देने के अलावा कोई विकल्प नही है।
यह रामपुरा का वही स्कूल है जो भैंसों के तबेले में चल रहा था। वहाँ अब काम शुरू हो गया है।
निरीक्षण के दौरान हम पर पत्थर फेंके गए, महिलाओं से मारपीट हुई, गाड़ियों के कांच तोड़े गए। लेकिन जब हमारे बच्चों के लिए एक अच्छा स्कूल बन जाएगा, तो सब worth it होगा!
'सारी मांगें सरकार ने मानी
5 सितंबर का प्रोटेस्ट कैंसिल'
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने हम 5 सितंबर को इंडिया गेट से नए पुलिस मुख्यालय तक होने वाले अपने शांतिपूर्ण विरोध मार्च को रद्द करने को लेकर क्या कहा, सुनिए...
ખેડૂતો માટે હંમેશા મારી શક્તિ પ્રમાણે લડતો રહ્યો છું અને આગળ પણ સતત લડતો રહીશ કેમ કે ખેડૂતો મુશ્કેલીમાં છે એ મારાથી જોવાતું નથી.
આજે સૌની ફરજ છે ખેડૂતો માટે એક થઈ અવાજ ઉઠાવવાની.
દાદાની સરકાર એવી હોવી જોઈએ જ્યાં દારૂ તો શું, પાણી પણ ખરાબ ન મળે. પરંતુ ગુજરાતમાં દર વર્ષે લઠ્ઠાકાંડ થાય છે, પરિવારો ઉજડી જાય છે અને પછી થોડા દિવસની કાર્યવાહી બાદ દારૂના અડ્ડા ફરી શરૂ થઈ જાય છે.
સૌથી ચિંતાજનક વાત એ છે કે ગુંડાઓ, માફિયાઓ અને બૂટલેગરો બેફામ રહે છે, જ્યારે સરકારની કડકાઈ માત્ર થોડા દિવસો પૂરતી જ દેખાય છે.
@Gopal_Italia
दूसरों को गौमूत्र और गोबर से इलाज की सलाह देने वाले कथावाचक खुद अमेरिका के अस्पताल में आधुनिक चिकित्सा लेते नजर आ रहे हैं। यह मनुवादी पाखंडियो का दोहरा मापदंड नहीं तो और क्या है?
मैडम मैं सुन्नी हूं सुनता ज़्यादा हूं बोलता कम लिहाजा आज तो बोलने दीजिए यह शब्द है आजमगढ़ की उस शख्सियत का बा
भारतीय पार्लियामेंट में जिसे मौलवी मसूद खान कहते हैं
जिसे आज का युवा सिर्फ नाम सुनता है
ना पढ़ा हूँ ना पढ़ने दूँगा ।।
फ़र्ज़ी डिग्री वाली सरकार में पेपरलीक होना बहुत स्वाभाविक है।
पहले NEET, फिर CBSE, SSC और अब CUET.
सरकार चाहे जितना पीआर करा लें पर सच्चाई तो यही है कि ये एक परीक्षा ठीक से नहीं करा पा रहे।
अबकी बार फ़र्ज़ी डिग्री वालों की निक्कमी सरकार।