मुख्यमंत्री जी ने भरे सदन में युवाओं के साथ छल किया है..!
एक और मुख्यमंत्री जी ने भरे सदन में हरियाणा कौशल रोजगार निगम के 1.24 लाख कर्मचारियों को जॉब सिक्योरिटी देने का दावा किय��, लेकिन दूसरी तरफ हजारों कर्मचारियों को अलग-अलग विभागों से बाहर कर दिया गया।
एक तरफ सरकार रोजगार सुरक्षा की बात करती है और दूसरी तरफ कहती है कि नियमित भर्ती आने पर HKRN कर्मचारियों को नौकरी छोड़नी पड़ेगी। यह कैसी जॉब सिक्योरिटी है, जिसमें हर युवा के सिर पर नौकरी जाने की तलवार लटकी हुई है?
हरियाणा के युवाओं को जुमले नहीं, स्थायी रोजगार और सुरक्षित भविष्य चाहिए। मुख्यमंत्री जी को सदन में किए गए अपने दावों का जवाब युवाओं के सामने देना होगा।
#नारनौंद_का_जस्सी
#जस्सी_का_नारनौंद
नेता विपक्ष श्री @RahulGandhi ने आदिवासी छात्रों के डेलिगेशन से मुलाकात कर उनकी समस्याओं पर चर्चा की।
इस डेलिगेशन में वो छात्र भी मौजूद थे, जो नासिक में अपनी मांग को लेकर भूख हड़ताल कर रहे हैं।
📍 महाराष्ट्र
नौजवान जब मैदान में उतरता है, तो बदलाव की शुरुआत होती है। ✊🔥
यमुनानगर में गूंजा युवा कांग्रेस का शंखनाद!
जोश भी है, जुनून भी है और अपने हक़ के लिए लड़ने का जज़्बा भी।
अब आवाज़ रुकेगी नहीं, संघर्ष झुकेगा नहीं!
@VarunMullana@TarunTewatia14@kataria_nishit
आज यमुनानगर में हरियाणा युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष @kataria_nishit के नेतृत्व में युवा कांग्रेस ने भाजपा की जनविरोध��� नीतियों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन करते हुए भाजपा कार्यालय का घेराव किया और अमित शाह के इस्तीफे की मांग बुलंद की।
इस संघर्ष में अंबाला के सांसद श्री @VarunMullana जी की गरिमामयी उपस्थिति ने युवाओं का हौसला बढ़ाया।
युवा जाग चुका है, अब भाजपा की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ आवाज़ और बुलंद होगी। ✊🇮🇳
@DeependerSHooda
@IYC
आज कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने हरियाणा के महामहिम राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा। जिसमें 27 अगस्त को विधानसभा सत्र के पहले दिन कांग्रेस विधायकों द्वारा लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण ढंग से अपना विरोध दर्ज करते हुए ���नहित के महत्वपूर्ण मुद्दों जैसे बेरोजगारी, महंगाई, कानून व्यवस्था, HKRN, सफाई कर्मचारियों की हड़ताल, मंदिरों में चंदा चोरी, पेपर लीक व भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष का जातिसूचक क्रिया-कलापों के जरिए अपमान आदि मुद्दों को लेकर निकाले गए मार्च के दौरान कांग्रेस विधायकों के साथ हुए दुर्व्यवहार, धक्का-मुक्की, उनके विधानसभा परिसर में प्रवेश के दौरान अवरोध पैदा करने और उनके लोकतांत्रिक अधिकारों के उल्लंघन के संबंध में निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई की मांग की गई।
सभी विधायकगण निर्धारित सुरक्षा नियमों का पालन करते हुए हरियाणा विधानसभा परिसर के प्रवेश बिंदु तक बिना किसी अवरो��� या अप्रिय घटना के पहुंचे थे। लेकिन, प्रवेश बिन्दु पर भारी पुलिस बल की तैनाती, विधानसभा के सुरक्षा कर्मियों का असामान्य असम्मानजनक, अनुचित एवं आक्रामक व्यवहार अभूतपूर्व था। हमें न केवल बलपूर्वक रोका गया बल्कि विधायकों के साथ धक्का-मुक्की भी की गई। पुलिस बल का प्रयोग प्रदेश में बढ़ते हुए अपराधों को रोकने के बजाय जनप्रतिनिधियों की आवाज दबाने के लिए किया गया, जो गंभीर चिंता का विषय है।
जब हमने विधानसभा में सरकार से पूछा कि यह सब किस नियम और किसके आदेशों पर किया गया, तो न ही विधानसभा अध्यक्ष महोदय ने और न ही नेता सदन ने कोई संतोषजनक उत्तर दिया और न ही इसकी जिम्मेदारी ली। हम पुलिस बल के सहारे सदन चलाने की नई परिपाटी का पुरजोर विरोध करते हैं, क्योंकि यह लोकतंत्र का मजाक है। विधानसभा की गरिमा और स्वायत्तता पर कार्यपालिका द्वारा अतिक्रमण किया जा रहा है, जो लोकतंत्र के लिए बड़ा खतरा है। विधानसभा की सुरक्षा, अनुशासन व्यवस्था के नाम पर निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की गरिमा एवं उनके लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन कदापि स्वीकार्य नहीं हो सकता।
अतः हम आपसे अनुरोध करते हैं कि राज्य का संवैधानिक प्रमुख होने के नाते इस गंभीर विषय पर निष्पक्षता, संवैधानिक मर्यादा तथा लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप तत्काल संज्ञान लेकर दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्यवाही सुनिश्चित करें। हम मांग करते हैं कि इस प्रकार क��� अलोकतांत्रिक घटना की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए एक संस्थागत ढांचा (Protocol) बनाने एवं निर्वाचित विधायकों तथा इस महान सदन की गरिमा व प्रतिष्ठा बनाए रखने हेतु ठोस उपाय किए जाने संबंधी आदेश जारी करें।
जनता की आवाज उठाने पर पहले पुलिस द्वारा रास्ता रोका गया, फिर मुझे नेम किया और अब मेरे खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव..!
हरियाणा विधानसभा के इतिहास में यह पहला ऐसा अवसर है, जब सोशल मीडिया पर कही गई किसी बात को आधार बनाकर सदन के अंदर विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाया ग���ा है। ऐसा उदाहरण हरियाणा विधानसभा के इतिहास में पहले कभी देखने को नहीं मिला।
कांग्रेस के युवा विधायकों की आवाज दबाने और उन्हें डराने के लिए भाजपा सरकार हर तरह के हथकंडे अपना रही है। लेकिन मैं साफ कहना चाहता हूं, मैं इस तानाशाही और दमन की राजनीति से डरने वाला नहीं हूं।
मैं नारनौंद विधानसभा के सवा दो लाख लोगों का प्रतिनिधित्व हरियाणा विधानसभा में करता हूं।
जब हमें और चुने हुए विपक्षी सदस्यों को विधानसभा के गेट पर रोका गया और नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी भूपेंद्र सिंह हुड्डा जी के साथ पुलिस द्वारा दुर्व्यवहार किया गया, तब मैंने इस पूरे घटनाक्रम के साथ-साथ, अपने क्षेत्र और प्रदेश की जनता के हक की आवाज मजबूती से सदन में उठाई तो जब सरकार के पास मेरे सवालों का कोई ठोस जवाब नहीं था, तो पहले मुझे सदन में नेम किया गया और अब मेरे खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव पास किया गया।
जिस विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव का कोई औचित्य ही नहीं है, उसके जरिए सरकार विपक्ष के चुने हुए जनप्रतिनिधियों को डराने और उनकी आवाज दबाने का प्रयास कर रही है।
लेकिन सरकार को यह समझ लेना चाहिए कि विधा��क की आवाज उसकी अपनी नहीं, बल्कि उन लाखों लोगों की आवाज होती है, जिन्होंने उसे चुनकर विधानसभा भेजा है।
नारनौंद की जनता के हक की लड़ाई पहले भी मजबूती से लड़ी है और आगे भी पूरी ताकत के साथ लड़ता रहूंगा।
न डरेंगे, न झुकेंगे, जनता की आवाज बनकर सदन में लड़ते रहेंगे।
#नारनौंद_का_जस्सी
#जस्सी_का_नारनौंद
#HaryanaVidhanSabha
#jassipetwar
@BhupinderShooda
@DeependerSHooda
@INCHaryana
दीपेंद्र सिंह हुड्डा जी का बयान मैंने खुद सुना है। उसमें ऐसा कुछ भी नहीं था, जैसा भाजपा द्वारा तोड़ मरोड़कर पेश किया जा रहा है। किसी के निधन पर शोक प्रकट करने जाना सामान्य मानवीय बात है, इसे राजनीति का मुद्दा बनाना भाजपा की सोच को दिखाता है।
:- @raonarenderinc जी।
अपने बेटे को मनोहरलाल से सेटिंग करके विधायक बनवाएंगे ओर प्रदेश के भोले भाले कुछ बच्चों से बीजेपी मुर्दाबाद के नारों का नाटक क���वाएंगे।
यही चाल, चरित्र ओर चेहरा रह गया है चौटाला परिवार का :- @Jassipetwar_inc
��ज्जन कुमार के निधन के बाद हुड्डा परिवार को जिस तरह बीजेपी द्वारा निशाना बनाया जा रहा है, वह दुर्भाग्यपूर्ण है।
@BJP4India की कोशिश है कि सिख समाज और हुड्डा परिवार के बीच दूरी पैदा की जाए, लेकिन यह उनकी भूल है।
सिख समाज व हुड्डा परिवार का साथ है और आगे भी रहेगा।
मुख्यमंत्री को काले झंडे दिखाना कोई अपराध नहीं है। लोकतंत्र में विरोध करने का अधिकार है। गुरुग्राम में मुख्यमंत्री जी को काले झंडे दिखाने के बाद सरकार के इशारे पर पुलिस ने हमारे नेताओं/कार्यकर्ताओ�� को बेवजह परेशान किया, सोशल मीडिया पेजों को बंद कराया। लेकिन जब हम मैदान में उतरे और प्रशासन से जवाब मांगा, तो सरकार को बैकफुट पर आना ही पड़ा।
कांग्रेस का एक-एक कार्यकर्ता हमारी ताकत है, किसी के साथ अन्याय नहीं होने देंगे।
तानाशाही नहीं चलेगी...