पर्यावरण की तबाही कैसे रुकेगी?
जंगलों की कटाई, पेड़-��शुओं की प्रजातियों का विलुप्त होना, प्लास्टिक से सागर भर जाना—ये सब हमारे भीतर की हिंसा और बर्बादी का प्रतिबिंब हैं। जब तक इंसान के भीतर की सफ़ाई नहीं होगी, पर्यावरण की तबाही नहीं रुकेगी। बाहरी स्वच्छता, आंतरिक स्वच्छता की छाया है। अगर 1% लोग जागरूक हो जाएँ, तो ये 99% अपने आप ठीक हो जाएँगे क्योंकि ये जिधर हवा बहेगी, उधर ही बह निकलेंगे। इसलिए बस 1% जागरूक लोग चाहिए जो दिशा तय करें।
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जैन धर्म में अनेकांतवाद सिद्धांत क्या है? 🕊️🧠📜
जैन धर्म का अनेकांतवाद या स्यादवाद, अहिंसा की बुनियाद है। मैं दूसरे के विपरीत तभी खड़ा होऊंगा जब मुझे अपनी हस्ती में दृढ़ विश्वास होगा — और यही बड़ा विश्वास ही हिंसा है। अनेकांतवाद का अर्थ है: कुछ भी पूरी तरह पक्का या निश्चित नहीं। जब कुछ निश्चित नहीं, तो दूसरे को गलत कैसे ठहराएं? और जब दूसरे को गलत नहीं ठहरा सकते, तो उनके प्रति हिंसक कैसे ह�� सकते हैं? अनेकांतवाद अहंकार की जड़ पर चोट करता है। दूसरे के प्रति तुम हिंसक तभी हो सकते हो, जब कहोगे — मैं सही, दूसरा गलत।
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🎓 Acharya Prashant at BITS Pilani, Dubai : A Day of Transformation 🌟
On 9th April, last day of his Dubai Tour, Acharya Prashant graced the campus of BITS Pilani, Dubai, for a profound and inspiring session with students and faculty. The event was a blend of wisdom, curiosity, and exploration, as Acharya Prashant delved into the topics that resonate deeply with today’s youth.
✨ Highlights of the Session:
Discussions on conscious living, clarity, and breaking free from societal conditioning.
Practical insights into overcoming distractions and finding focus in a fast-paced world and choosing the right career.
A Q&A segment where students and faculty engaged Acharya Prashant with their heartfelt questions about life, purpose, and freedom.
The interactive session left the audience with not just answers but tools to question, introspect, and rise above the noise of daily life.
#AcharyaPrashant #BITSPilaniDubai
मनुस्मृति में लिखी हुई सभी बातों पर एक जोरदार तमाचा!👋👋
आचार्य जी(@Advait_Prashant) न होते तो इन सभी बातों पर यकीन करने के अलावा मेरे पास कोई विकल्प नहीं होता!
मेर��� सच में खून खोल उठा 😡😡 जब प्रश्नोत्तरी में मनुस्मृति की ये बातें साझा की गयी जो स्त्रियों के प्रति लिखी गयी !
मनुस्मृति लिखने वालो ने स्त्रियों के खिलाफ बहुत गन्दा लिखा हैं यार, ऐसे कमीनो की वजह से कई शताब्दियों तक हमारी चेतना का कभी विकास नहीं हो पाया और हमें गुलामी झेलनी पढ़ी और वही चीज़ लगातार आज भी की जा रही हैं तथाकथित धर्मगुरुओं द्वारा!
Posted by Dharmender Kumar on Gita Community Feed.
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भारत को और पूरी दुनिया को इस समय @Advait_Prashant की और उनकी शिक्षाओं की क्यों जरूरत है?
हमारे जीवन के सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर उन्होंने बात की है।जहाँ आज का युवा धर्म, गीता, वेदांत, उपनिषद् से दूर भाग रहा है और सस्ते इंटरनेट के माध्यम से खुद को व्यर्थ के मनोरंजन में व्यस्त रखे हुए है, उस समय में आचार्य प्रशांत घर घर गीता और उपनिषद् पहुँचा रहें है।
इस समय सबसे बड़ी गीता श्रृंखला आचार्य ��्रशांत द्वारा ही चलाई जा रही है । और मुझे खुशी इस बात की है कि मैं भी उन 50,000 लोगों में शामिल हूँ। इस श्रृंखला में अगर देखा जाए तो सबसे ज़्यादा युवा ही हैं। और मैं अपने सामने लोगों की जिंदगियाँ बदलते देख रही हूँ।
इस समय दुनिया कई जटिल और परस्पर जुड़े कारणों से परेशान है। मैं आपको वो 5 महत्वपूर्ण मुद्दों से अवगत करना चाहती हूँ जिनकी बात कोई नहीं कर रहा -
1. *जलवायु संकट*: बढ़ता ता��मान, चरम मौसम की घटनाएँ जैसे बाढ़, सूखा और जंगल की आग, और समुद्र के स्तर में वृद्धि पर्यावरण और मानव जीवन को खतरे में डाल रही हैं। यह खाद्य सुरक्षा, पानी की कमी और विस्थापन जैसी समस्याएँ पैदा कर रहा है।
2. *आर्थिक असमानता*: अमीर और गरीब के बीच बढ़ती खाई, महंगाई, बेरोजगारी और संसाधनों तक असमान पहुँच ने सामाजिक तनाव को बढ़ाया है। इससे कई देशों में अशांति और असंतोष फैल रहा है।
3. *युद्ध और संघर्ष*: यूक���रेन-रूस युद्ध, मध्य पूर्व में अस्थिरता और अन्य क्षेत्रीय विवादों ने वैश्विक शांति को भंग किया है। इससे शरणार्थी संकट, ऊर्जा संकट और आर्थिक अस्थिरता बढ़ रही है।
4. *मानसिक स्वास्थ्य संकट*: तनाव, चिंता और अवसाद जैसी समस्याएँ महामारी के बाद से बढ़ी हैं। सोशल मीडिया का दबाव, अकेलापन और अनिश्चित भविष्य ने इसे और गंभीर बनाया है, खासकर युवाओं में।
5. *सूचना का दुरुपयोग और ध्रुवीकरण*: फर्जी खबरों, सोशल मीडिया पर गलत सूचनाओं और राजनीतिक ध्रुवीकरण ने समाज को बाँट दिया है। लोग सच्चाई और झूठ के बीच अंतर करने में असमर्थ हो रहे हैं, जिससे विश्वास का संकट पैदा हो रहा है।
ये समस्याएँ वैश्विक स्तर पर आपस में जुड़ी हुई हैं और इनका समाधान सिर्फ़ सही शिक्षा और आत्मज्ञान से ही संभव है।
आचार्य प्रशांत ने अपनी शिक्षाओं के माध्यम से कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की है, जो न केवल व्यक्तिगत विकास के लिए बल्कि समाज और विश्व की बेहतरी के लिए भी अत्यंत आवश्यक हैं। उनकी शिक्षाएं अद्वैत वेदांत पर आधारित हैं और आध्यात्मिकता को तर्कसंगत व व्यावहारिक रूप से प्रस्तुत करती हैं।
यहाँ दस ऐसे महत्वपूर्ण टॉपिक्स हैं जिन पर उन्होंने बात की है और जिन पर ��्यान देना बहुत जरूरी है:
1. अंधविश्वास और पाखंड का विरोध
2. युवाओं को दिशा और स्पष्टता
युवाओं को आत्म-ज्ञान और जीवन के उद्देश्य की समझ प्रदान करना उनका एक प्रमुख लक्ष्य है। यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आज का युवा परंपरा और आधुनिकता के बीच संशय में है, और इसे स्पष्टता से ही मानसिक शांति और सही निर्णय लेने की क्षमता मिल सकती है।
4. महिला सशक्तिकरण
महिलाओं को उनकी वास्तविक पहचान—शरीर या साम��जिक भूमिकाओं से परे—समझने में मदद करना, ताकि उनका आत्मविश्वास और स्वायत्तता बढ़े। यह सामाजिक बंधनों से मुक्ति और लैंगिक समानता के लिए आवश्यक है।
5. तर्कसंगत आध्यात्मिकता
धार्मिक कट्टरता और विभाजनकारी विचारधाराओं के बीच, आध्यात्मिकता को तर्क और विज्ञान के साथ जोड़ना।
6. आत्म-ज्ञान और आत्म-जागरूकता
आत्म-ज्ञान उनकी शिक्षाओं का केंद्र है।
7. जीवन का उद्देश्य
लोगों को उनके जीवन के वास्तव��क उद्देश्य को समझने में मदद करना, ताकि वे अनावश्यक तनाव से मुक्त होकर सार्थक जीवन जी सकें��� यह आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में बेहद जरूरी है।
8. सामाजिक न्याय और समानता
सामाजिक असमानताओं और अन्यायों के खिलाफ आवाज उठाना और समाज में न्याय व समानता की स्थापना के लिए प्रेरित करना।
9. शिक्षा के महत्व पर जोर देना और ज्ञान के प्रसार के माध्यम से समाज को सशक्त बनाना। शिक्षा ही समाज को प्रगति की ओर ले जा सकती है, इसलिए इस पर ध्यान देना अनिवार्य है।
10. मानसिक स्वास्थ्य और तनाव प्रबंधन
मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाना और तनाव प्रबंधन की तकनीकों को साझा करना। आज के तनावपूर्ण जीवन में यह व्यक्तिगत और सामाजिक स्तर पर बेहद जरूरी है।
He’s Our last and disappearing chance.