https://t.co/cAYFzMiFHI
Is it not necessary to make such a map for India as well in the benifit of our India and our future generations ?
क्या हमारे भारत और हमारी आनेवाली पीढ़ियों के हित में भारत के लिए ऐसा नक्शा बनाना आवश्यक नहीं लग रहा है ?
... सनातन स्वकुलपरंपरागत कर्म करते है, उनकी आत्मबुद्धिमें ज्ञानवैराग्यादिके परिपाकके प्रसादसे जो सुख मिलता है उसे ही सात्त्विक सुख कहा गया है। (गीता 18.37 शांकर भाष्य)
आपद्धर्म/भक्ति/शरणागति आदिके नाम पर स्वधर्म का त्याग निंदनीय ही बताया गया है ।
देखें गीता 3.35 आदि।
(3/n)
चाहे जीविका हो या बाकी जीवनयापन, सभी विषयमें शास्त्रीय विधा (विधि-निषेध) का आलंबन लेकर ही स्वधर्म/स्वकर्म पथ पर डटे रहने में जो कष्ट सहना होता है, उसका नाम तप है ।
श्रीकृष्ण-
यः शास्त्रविधिमुत्सृज्य वर्तते कामकारतः।
न स सिद्धिमवाप्नोति न सुखं न परां गतिम्।।
गीता 16.23।।
(1/n)
Myth:
Hindu scriptures force us to follow difficult dharma and cause discomfort.
Truth:
Hindu scriptures tell us to perform dharma as per our ability and with ease.
Misunderstanding the intention of Hindu scriptures has led to an aversion to their teachings.
[1/3]
यत्तदग्रे विषमिव परिणामेऽमृतोपमम्।
तत्सुखं सात्त्विकं प्रोक्तमात्मबुद्धिप्रसादजम्।।गीता 18.37।।
आज शास्त्रीय विधासे अपने पूर्वजोके बताये स्वधर्म पथ पर चलना अत्यन्त श्रमसाध्य होनेके कारण आरम्भमें विषसदृश दुःखात्मक जान पड़ता है। परंतु फिर भी जो बिरले मनुष्य कष्ट सहकर भी ...
(2/n)
@ShastraBodhak @sharmasatyan@halleyji जैसे बिना वैद्य- शरणागतिके ही सड़क किनारेसे गम्भीर औषधियाँ बेची खरीदी जायेंगी तो उनको खाने बेचनेवालोंमें जानलेवा कलहपूर्ण प्रतिक्रियाऐं आयेंगी ही। वैसे ही वेद पुराण शास्त्र हैं, जो अधिकृत गुरु परंपरा से दूर है, वे उल्टे गम्भीर संक्रमित रोगी बन रहे हैं।
#सन्मार्ग से साभार ।
कुमारीकन्या भी माता समान पूज्य !
ब्रह्मवैवर्त पुराण- किसी आठ वर्षकी कुमारी कन्याका वस्त्राभूषणोंसे पूजन करना, वस्तुतः प्रकृति देवीका ही पूजन करना
सनातन परंपरा में #कुमारीपूजा का विधान।
जब समाज हर बच्चीमें माँ देखे, तो बच्चियों पर अपराध कैसे होगा? #BetiBachao#ChildSafety (5/n)
🌸क्या भारतीय सनातन वैदिक आर्य हिन्दु धर्म-परंपराने हज़ारों साल पहले ही मातृशक्ति-स्त्री के सम्मानकी ऐसी व्यवस्था दी थी(है), जिसे अपनानेसे समाजमें बढ़ते स्त्री-अपराध समाप्त हो सकते हैं? #iks#indianknowledgesystems कौन है सोलह प्रकार की माताएं? क्या कहते हैं हमारे शास्त्र? (1/n)
#JusticeSystem#IndianKnowledgeSystems#iks
Unless society develops a sense of internal responsibility for Karma-fala, rather than external punishment, will
1. legal codes be reduced to mere technical games and
2. it be impossible to stop the commercialization of justice?
(1/n)
#न्यायतंत्र#भारतीयज्ञानपरंपरा#iks
क्या जब तक समाजमें बाह्य दंड के स्थान पर 'कर्मफल' के प्रति आंतरिक उत्तरदायित्व का बोध जागृत नहीं होगा, तब तक
1. वैधानिक संहिताएँ तकनीकी खेल बनाई जा सकेगी और
२. न्याय के बाजारीकरण को रोकना असंभव होगा ?
(1/n)
४. अधर्म चाहे कितना भी प्रबल क्यों न हो जाए, अंतमें नष्ट होता है।
५. विपरीत,संकटपूर्ण परिस्थितियों में भी सत्य-धर्म-शास्त्र के मार्ग पर अडिग रहना चाहिए।
६. श्रुति-स्मृतिसम्मत दैवीय न्याय-व्यवस्था पर पूर्ण विश्वास रखते हुए स्वधर्म-पथ पर विनम्रता से आगे बढ़ते रहना चाहिए । (3/3)
भगवान ��्री #नृसिंहजयंती की अनेक शुभकामनाएं
#वैशाखशुक्लचतुर्दशी 2026
#भारतीयज्ञानपरंपरा #iks
यह पर्व क्या #शिक्षा देता है?
१. मनुष्य का मनमर्जी-अहंकार, दुष्टता और चालाकी ये सब, धर्म-शास्त्र-ईश्वर और ईश्वर की शक्ति प्रकृति के सामने व्यर्थ है।
(1/3)
२. जब जब सत्ता के दुरुपयोग के द्वारा अधर्म चरम पर होता है, तो उसका विनाश निश्चित है।
३. ईश्वर अधार्मिक दुष्टों के लिए मृत्यु के समान कठोर हैं, प��न्तु धर्मपारायण भक्तों के लिए अत्यंत कोमल व स्नेहभरा हैं।
(2/3)
महाभारत -
न गृहे मरणं तात क्षत्रियाणां प्रशस्यते॥ ...
क्योंकि तात! वीर क्षत्रियोंका घरमें मरण हो, यह उनके लिये प्रशंसाकी बात नहीं है। कुलीन सनातनी क्षत्रिय वीरोंके लिये यह कायरता और दीनता अधर्मकी बात है॥
हतो वा प्राप्स्यसि ���्वर्गं जित्वा वा भोक्ष्यसे महीम्।... गीता 2.37।।
(6/n)
श्रीमद्भगवद्गीता में जिस स्वधर्म-स्वकर्म-जातिधर्म-कुलधर्म-वर्णधर्म की अपार महिमा गाई गई है वह क्या है ?
देखें गीता - 3.35, 18.41 से 18.47, 16.23, 16.24
(1/n)
खाटपर सोकर मरना क्षत्रियके लिये अधर्म है। जो क्षत्रिय कफ-मल-मूत्र छोड़ता, दुखी होकर विलाप करता हुआ बिना घायल हुए शरीरसे मृत्यु पाता है, उसके इस कर्मकी प्राचीनधर्मको जाननेवाले विद्वान् पुरुष प्रशंसा नहीं करते हैं॥
...क्षत्रियो नास्य तत् कर्म प्रशंसन्ति पुराविद:॥
-महाभारत।
(5/n)