आरक्षण हटे या न हटे, इसपर चर्चा से क्यों भाग रहे?
कोई कह रहा कि लिखकर रख लो नहीं हटेगा, कोई गृहयुद्ध की धमकी दे रहा, कोई वही घिसी-पिटी 5000 साल पानी न पीने देने वाली कहानी लेकर आ रहा, कोई ललकार रहा कि सड़क पर उतरकर दिखाओ, कोई रीच के लिए लिख रहा कि कुछ नहीं हो��ा तो कोई सचमुच निराश है कि किसी राजनीतिक दल का समर्थन इस आंदोलन को नहीं मिलेगा।
लेकिन, मेरा प्रश्न केवल इतना है कि आओ चर्चा तो करो। बहस करो। साबित करो कि क्या जायज है या क्या नहीं। चर्चा से क्यों भागना, अगर तथ्य व तर्क हैं तुम्हारे तरकस में तो? चर्चा हो जाए, भारत शास्त्र��र्थ की भूमि रही है।
सीधा फ़ैसला मत सुनाओ न, इसके पीछे तर्क दो। 4 फैक्ट्स बताओ। फ़िलहाल तो एटीट्यूड ऐसा है कि ग़लत है फिर भी जारी रहेगा, हटाकर दिखा दो दम है तो।
सवाल यह है कि तुम आरक्षण किस आधार पर मांगते हो?
आखिर तुम्हारे बच्चे का फीस हमलो�� क्यों भरे?
तूने ऐसा क्या कर दिया देश के लिए कि हम लोन लेकर तुम्हारे बच्चे का फीस भरे?
रही बात भेद भाव की तो भेद भाव तुम्हारे बच्चे से ज्यादा मेरा साथ होता है भेद भाव!
इसे कहते हैं.. विशुद्ध धुलाई..🔥
जब सड़क की गंदगी कॉकरोच के सामने
एक NEET स्टूडेंट बैठ गया तो जरा इस
छक्के ( ग्रांड मरे ) विजेता दहिया का मुँह देखिये..
आपको इनकी मंशा समझ आ जाएगी 🖐️
आरक्षण पर चर्चा किसी भी पार्टी को असहज करेगी, और अब वही करना पड़ेगा। पटरी उखाड़ कर आरक्षित हो जाना, सामाजिक न्याय नहीं, राजनैतिक गिरोहबाज़ी है। अब जबकि प्रताड़ित वर्ग इस पर लामबंद हो रहा है, तो सत्ता के चाटुकारों को स���स्या होने लगी है कि ये 'मूर्खता' है।
UGC, NEET, CBSE पर बोलना भी सबको मूर्खता और षड्यंत्र ही लग रहा था, फिर एक भीड़ आई, आप पर थूका और आपको चाटना पड़ा। अंततः, हुआ वही जो हम आपको बता रहे थे।
अब आरक्षण पर भी एक संगठित, सघन और गंभीर चर्चा होगी। इसके चक्कर में चुनावों पर असर पड़ना चाहिए कि कौ�� इन विषयों पर चर्चा से भाग रहे हैं, कौन इसे नकार रहे हैं, और कौन एक ही श्वास में 'विकसित भारत' और निजी क्षेत्र में आरक्षण ढूँढ रहे हैं।
अब मुझे यह मैटर नहीं करता कि कौन सत्ता में है और किसको होना चाहिए, मैंने पिछले 7 महीनों में जो देखा और फिर गत शनिवार को जो हुआ, उस से में आश्वस्त हूँ कि बिखरा हुआ, बिका हुआ नैरेटिव काम नहीं आता। सत्ता में रहने या निकाले जाने की चिंता राजनैतिक दलों को होनी चाहिए, आम न��गरिक को नहीं।
आरक्षण की पूर्ण समाप्ति लक्ष्य है, जो की संविधान का भी लक्ष्य है, तो हम तो वही कर रहे हैं जो संविधान निर्माताओं ने सोचा था। ठीक है, समय सीमा नहीं थी, पर OBC आरक्षण भी तो नहीं था? उस समय के वंचित-पीड़ित-शोषित यदि आज भी वंचित-पीड़ित-शोषित ही हैं, तो इस पर सर्वेक्षण होना चाहिए कि तथाकथित सामाजिक न्याय तक पहुँचने क�� लिए कोई और मार्ग है क्या?
मेरा उद्देश्य प्रथम चरण में चर्चा का है, सरकार से इस पर संसद में आँकड़े रखवाने का है कि किस जाति समूह कि किन जातियों में कितनों को आरक्षण मिला, उनकी आर्थिक और सामाजिक स्थिति क्या है, उन्हीं जाति समूहों में कौन ऐसे लोग हैं जो अभी तक घिसट कर जीने को विवश हैं?
सामान्य वर्ग के लोगों में कितने लोग आर्थिक रूप से विपन्न हैं, उनके लिए सरकार की क्या नीतियाँ हैं, उन्हें फॉर्म भ��ने से ले कर हॉस्टल और कोर्स की फीस में छूट क्यों नहीं है? यदि आरक्षण EWS से दिया है तो यह इतना घटिया रूप में क्यों है कि निर्धन सामान्य वर्ग का विद्यार्थी लोन चुकाने में ही जवानी खपा देता है?
इसके बाद, हर राजनैतिक व्यक्ति को, दल को हम चुनावों के समय पूछेंगे कि उन्हें सामान्य वर्ग वोट क्यों दे? उनका मेरिट को ले कर क्या स्टैंड है, विकसित भारत में मेरिट की कितनी जगह है और शिक्षा व्यवस्थ�� में आरक्षण के कारण राष्ट्र को कब तक नकारात्मक दिशा में ले जाया जाता रहेगा?
यही आरम्भ है, और यदि आवश्यकता पड़ी तो हम और भी विकल्प देखेंगे। हमें इस से अब मतलब नहीं है कि कौन आ जाएगा तो क्या हो जाएगा, उसका लोड वो लें जिनकी विधायकी और सांसदी जाएगी। हमें अपने बच्चों और इस समाज की चिंता हैं। हम बस अपने हिस्से की चिंता कर रहे हैं।
"JEE Main में आए 96% फिर भी नहीं मिला IIT Delhi, दोस्त के आए 79% तो उसे मिल गया"
CJP Protest में छलका छात्र का दर्द, "रिजर्वेशन पर क्यों नहीं बात कर रहे लोग"
@RitikaChandola
UGC कानून वापस लो 600km की यात्रा कर रहे महिपाल सिंह मकराना राजपूत करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष। लगातार बढ़ रहा है जनाधार जिंदा स्वर्ण निकल रहे हैं बाहर मुर्दा कर रहे हैं बीजेपी की गुलामी
“आप मोदी जी से असहमत हो सकते हैं। आप BJP से असहमत हो सकते हैं। आप मुझसे भी असहमत हो सकते हैं। लेकिन राजनीतिक मतभेद कभी भी आपको देश के खिलाफ खड़ा नहीं करना चाहिए।
हर भारतीय को भारत-विरोधी बयानबाज़ी का स्पष्ट विरोध करना चाहिए।”
— पवन कल्याण🔥🔥
My request to all General Category
If you are going to student protest, please raise the issue of Reservations.
Use this opportunity. This is your time.
हक मीडिया हाउस के एक बात लगातार बोलनी चाहिए कि @DelhiPolice विद्यार्थियों पर हुए FIRs वापस ले ले, उन्हें काउंसलिंग के उपरांत छोड़ दे।
विद्यार्थी से तात्पर्य है वैसे बच्चे जिन्होंने NEET/CBSE परीक्षा दी है इस वर्ष। जिन्होंने RE-NEET दिया है। बाकियों को पुष्ट प्रसाद दिया जाए।