फेसबुक पर ऋतुराज मिश्रा नामक व्यक्ति लगातार दलित समुदाय की महिलाओं पर अभद्र पोस्ट कर रहा है।
बलात्कारी मानसिकता से ग्रसित यह व्यक्ति झांसी का रहने वाला है। पुलिस इस पर कार्रवाई क्यों नहीं कर रही?
क्या महिला आयोग अंधा हो गया है, जो उसे दलित समुदाय की महिलाओं के खिलाफ की जा रही अभद्र पोस्ट्स एवं रेप की धमकियाँ दिखाई नहीं दे रही हैं? या फिर मह��ला आयोग सिर्फ सवर्ण महिलाओं के लिए है। दलित महिलाएं उनकी नजर में अछूत हैं? क्या BJP सरकार में ब्राह्मणों को इतनी छूट मिल गई है कि वे दलित महिलाओं को अपमानित करते रहें और पुलिस तमाशबीन बनी रहे? यह अत्यंत भयावह है। खुद को कट्टर हिंदू बताने वाला चंदनधारी ब्राह्मण क्या इसी तरह अपने धर्म की रक्षा करता है?
सोचिए, यह अपने घर की बहन-बेटियों को कैसे ट्रीट करता होगा। पूरी तरह से बलात्कारी मानसिकता से ग्��सित है। इसके घर की महिलाएँ भी इससे असुरक्षित महसूस करती होंगी। प्रशासन से अनुरोध है कि इस पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
"डॉ. अंबेडकर का सम्मान करने पर आचार���य प्रशांत को मिली मौत की धमकी" ~ दैनिक भास्कर रिपोर्ट
"यह कोई पहली घटना नहीं है। बीते वर्षों में भी आचार्य प्रशांत को विभिन्न सोशल मीडिया माध्यमों से कई बार जान से मारने की धमकियां मिल चुकी हैं। फाउंडेशन के प्रवक्ता ने बताया कि जब वे स्त्रियों के समर्थन में बोलते हैं, तो एक सम्प्रदाय की ओर से धमकियां आती हैं, जब वे अंधविश्वास के विरुद्ध बोलते हैं, तो जनसंख्या का दूसरा वर्ग आक्रमण करता है और जब वे आतंकवाद के विरुद्ध बोलते हैं, तो किसी अन्य दिशा से धमकियां आरंभ हो जाती हैं।"
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@aajtak RGHS में दवाईयाँ नहीं मिल रही
हॉस्पिटल में स्ट्रेंचर नहीं मिल रहे
कॉलोनियों में साफ़ पानी नहीं मिल रहा
निगम-जेडीए में पट्टा नहीं मिल रहा
कॉलेज में फैकल्टी नहीं मिल रही
कॉन्वोकेशन में डिग्री नहीं मिल रही
पुलिस को सुबोध अग्रवाल नहीं मिल र���े
ज़िले में दो-तीन महीने तक कलेक्टर
>नाम रिंकू सिंह
>2004 में PCS परीक्षा पास की
>2009 में 100 करोड़ का पेंशन और स्कॉलरशिप घोटाले का पर्दाफाश
>इनाम में 7 गोलियां मारी गईं
>दो गोलियां चेहरे पर लगीं
>ठीक हो��े के बाद 2022 में IAS बने
>लेकिन अब उन्होंने ने इस्तीफा दे दिया है
>फील्ड पोस्टिंग न मिलने की वजह से नाराज थे
>शायद उनको नहीं पता कि फील्ड पोस्टिंग बेईमानों को मिलती है
>और ईमानदारों के हिस्से डेस्क जॉब आती है
>देश की जनता को ईमानदार अधिकारियों के साथ खड़ा होना चाहिए
>तभी किसी को ईमानदारी से काम करने की प्रेरणा मिलेगी।
आपका नाम स्वीटी बोहरा है,आप FSSAI के डायरेक्टर पद पर तैनात हैं, ले��िन कुछ हरामखोर लोग आपकी नियुक्ति पर तरह तरह के सवाल उठा रहे हैं,
अभी हाल में हुई जांच प्रक्रिया में आपका एक्सपीरियंस लेटर और CTC क्राइटेरिया से कम पाए गए हैं फिर आपका सलेक्शन कैसे हो गया ?
प्रश्न 1 : मैडम ने अपने एक्सपीरियंस लेटर में दिखाया कि आपने नेस्ले इंडिया में साल 2006 से 2020 तक कार्य किया , जबकि ये दावा और मैडम एक्सपीरियंस लेटर फर्जी है, आप वहां 2007 से कार्यरत थीं ,
प्रश्न 2 : नियमों के अनुसार पांच वर्षों का सुपरवाइजरी अनुभव चाहिए थे उसके भी दस्तावेज भी मैडम के पास नहीं ��े फिर मैडम को नौकरी कैसे मिली ? उसी इंटरव्यू में दस्तावेज की कमी के कारण कई SC कैंडिडेट्स को रिजेक्ट कर दिया गया था?
प्रश्न 3: FSSAI ने इनको आउट ऑफ द बॉक्स जाकर रिलेक्सेशन दिया कि और सूटेबल कैंडिडेट्स नहीं थे जबकि बहुत सारे कैंडिडेट्स इनसे ज्यादा अनुभवी और एफिशिएंट थे?
जब धांधली करके घुसे लोगों को @fssaiindia में जगह मिल रही है तो वो देश कल्याण कैसे करेंगें? @MoHFW_INDIA