सर @TexMinIndia क्या आपको पता है कि यार्न की कीमतों में भारी बढ़ोतरी वाराणसी, सूरत, मालेगांव, मुबारकपुर आदि के MSMEs और माइक्रो पावरलूम बुनक��ों को बुरी तरह प्रभावित कर रही है। इसके कारण यूनिट्स बंद हो रही हैं और बेरोज़गारी बढ़ रही है।
क्या आप एक मंत्री के रूप में कॉटन यार्न के निर्यात पर रोक लगा सकते हैं और रॉ कॉटन पर इम्पोर्ट ड्यूटी खत्म कर सकते हैं? फैब्रिक्स और RMG एक्सपोर्ट्स के लिए इस सेक्टर को incentives की आवश्यकता है।
क्या @narendramodi सरकार चीन पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगा सकती है?
आप सरकार में हैं, पावरलूम सेक्टर को बचाइए।
अपने शपथ ग्रहण को याद रखिए, और “शुद्ध अंतःकरण” शब्द को भी याद रखिए।
भाजपा की पर्ची सरकार राजस्थान में स्थायी नौकरियां ख़त्म कर युवाओं को असुरक्षा, शोषण और अस्थायी रोजगार की तरफ धकेल रही है। असिस्टेंट प्रोफेसर की जगह टीचिंग एसोसिएट की संविदा पर भर्ती नौकरी नहीं, "ठेका" प्रथा पर का�� बांटना है।
सत्ता के लिए युवाओं को भ्रमित करने वाली भाजपा अब युवाओं को करियर नहीं, कॉन्ट्रैक्ट जॉब दे रही है। नियमित नौकरी की जगह सरकारी कॉलेजों में 3540 पदों पर टीचर एसोसिएट की भर्ती और वो भी 5 साल की संविदा और 28,850 वेतन पर। ये न सिर्फ UGC मापदंड़ों की अनदेखी है, बल्कि युवाओं के भविष्य, शिक्षा, योग्यता और काबिलियत से साथ कुठाराघात है। भाजपा सरकार ने इससे पहले राजमेस के मेडिकल और नर्सिंग कॉलेजों मे�� भी 1267 पद संविदा पर निकाले थे।
भाजपा जब विपक्ष में थी तो संविदा भर्ती को युवाओं के साथ अन्याय बताकर विरोध करती थी। और आज जब सत्ता में है तो यही भाजपा संविदा और ठेका व्यवस्था की सबसे बड़ी समर्थक बन गई है। जबकि हमारी कांग्रेस सरकार ने 1.10 लाख से अधिक संविदाकर्मियों को नियमित किया और ठेका पर नौकरियों को बंद किया।
RGHS में दवाईयाँ नहीं मिल रही
हॉस्पिटल में स्ट्रेंचर नहीं मिल रहे
कॉलोनियों में साफ़ पानी नहीं मिल रहा
निगम-जेडीए में पट्टा नहीं मिल रहा
कॉलेज में फैकल्टी नहीं मिल रही
कॉन्वोकेशन में डिग्री नहीं मिल रही
पुलिस को सुबोध अग्रवाल नहीं मिल रहे
ज़िले में दो-तीन महीने तक कलेक्टर नहीं मिल रहे
यूनिवर्सिटी में वीसी नहीं मिल रहे
निगम बोर्डों में अध्यक्ष मेम्बर नहीं ���िल रहे
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