सिरोही के पूर्व विधायक व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता @SanyamLodha66 जी पर लॉरेंस गैंग की हमले की साजिश को विफल करने पर AGTF जोधपुर व सिरोही पुलिस का आभार।
लेकिन इस साजिश का पर्दा��ाश होना बहुत जरूरी है।
@PoliceRajasthan से आग्रह है कि जनता की आवाज संयम जी की सुरक्षा और मजबूत करे।
सिरोही
आंबेश्वर धाम में आयोजित रावल ब्राह्मण समाज खुणी परगना के प्रथम दीपावली स्नेह मिलन समारोह में शि��कत कर समाज का आशीर्वाद प्राप्त किया...
@INCRajasthan
माननीय मंत्री ओटाराम जी,
��हले तो आप अपनी भारतीय जनता पार्टी में तय कीजिए कि आपकी पार्टी वाडाखेड़ा कंजर्वेशन रिजर्व के साथ क्या करना चाहती हैं ? जिस दिन आपकी पार्टी के क्षेत्रीय सांसद दिल्ली ��ें केंद्रीय वन मंत्री जी से मिलकर वाडाखेड़ा कंजर्वेशन रिज़र्व को निरस्त करने की मांग कर रहे थे, उसी समय आप अपने ही भाजपा कार्यकर्ताओं को आगे करके सिरोही की देवतुल्य जनता के सामने वाड़ाखेड़ा को दो टुकड़ों में बांट कर पशुपालकों को गुमराह कर रहे थे।
वाडाखेडा वनक्षेत्र को राज्य सरकार ने कंजर्वेशन रिजर्व वाइल्डलाइफ प्रोटक्शन एक्ट 1972 की धारा 36 ए के अंतर्गत घोषित किया। इसके चारो तरफ कुल 8 पंचाय��� लगती है। सभी पंचायतों से नियमानुसार अनापत्ति प्राप्त की। कंजर्वेशन रिजर्व घोषित करते समय स्थानीय लोगों का न केवल पारम्परिक अधिकार जैसे 2500 किमी से ज़्यादा क्षेत्र मे चराई का ध्यान रखा गया है एवं साथ ही भविष्य की संभावनाओं को देखते हुए पर्यटन, स्वरोजगार इत्यादि सीधे एवं अप्रत्यक्ष लाभ देने वाले बिंदुओं को भी क्षेत्र क�� मैनेजमेन्ट प्लान में सम्मलित किया गया है।
उक्त क्षेत्र में चराई का ठेका कंजर्वेशन क्षेत्र घोषित होने के बाद भी वर्ष 2023 मे किया गया। अब चराई का ठेका 2024 में नहीं हुआ, आपको लोगों को बरगलाना था इसलिए आपने नहीं होंने दिया क्योंकि आप सरकार के मंत्री महोदय हैं।
वाडाखेड़ा क्षेत्र का संपूर्ण रिकॉर्ड संबंधित फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के पास में रहता है न कि पूर्व विधायक या वर्तमान विधायक के पास। वाडाखेड़ा फॉरेस्ट क्षेत्र 1960 में रिजर्व फॉरेस्ट घोषित किया गया था जिसमें 4331 हेक्टेयर क्षेत्रफल है, उसमें 36 कॉम को बराबरी के अधिकार दिए गए थे। कंजर्वेशन रिजर्व में मॉनिटरिंग कमेटी धारा 36 बी के अंतर्गत बनाने का प्रावधान है। कमेटी में वन विभाग, कृषि विभाग, पशुधन विभाग तथा पंचायत प्रतिनिधि, तीन नॉन गवर्नमेंट ऑर्गेनाइजेशन के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। इसका 10 वर्ष का मैनेजमेंट प्लान वित्तीय स्वीकृति ए��ं संवर्धन और संरक्षण हेतु बनाकर केंद्र सरकार को भेजते हैं। यह निर्धारित प्रक्रिया एक अनिवार्य रूप से कई दशकों से चली आ रही है लेकिन अब आप द्वारा यह श्रेय लेना कि आपने जनप्रतिनिधियों या लोकल बॉडीज को इसमें शामिल करवाया है। यह पूर्ण रूप से हास्यास्पद है।
मंत्री जी, आप सिरोही की भोली भाली जनता को गुमराह करने एवं आपको सच्चाई बताने वाले लोगों की आवाज को दबाने का प्रयास कर रहें हैं। वाडाखेड़ा वर्ष 2022 में कंजर्वेशन रिजर्व घोषित हुआ है। इसमें एक समय हिरण की संख्या 20 के आसपास थी जो वर्तमान में 140 से 150 हो गई है इसी के साथ भालू, पैंथर, सियार आदि सैकड़ो पशु पक्षी स्वतंत्र रूप से विचरण कर बसेरा कर रहे हैं।
यह क्षेत्र पूर्व मुख्यमंत्री माननीय वसुंधरा राजे के द्वारा स्थापित सुंधामाता कंजर्वेशन रिजर्व एवं माउंटआबू सेंचुरी तथा जवाई कंजर्वेशन रिजर्व का गलियारा है जो कि अधिनियम की धारा 36 ए अंतर्गत प्रावधान के अनुस��र इसे भी कॉरिडोर होने के नाते शामिल किया गया है।
म���ं बताना चाहूंगा कि संपूर्ण राजस्थान वन विभाग में 1 जुलाई से 31 अक्टूबर तक चराई पर पूर्णत प्रतिबंध रहता है। इसमें किसी भी क्षेत्र में चराई नहीं होती है, शुल्क से या बिना शुल्क के भी चराई नहीं होती है और 1 नवंबर से चराई हेतु खुल जाता था। परंतु आपने अपनी ही पार्टी के लोगों को आगे करके अपनी ही सरकार के खिलाफ अगस्त में धरना प्रदर्शन करवाकर आमजनता को गुमराह करने का प्रयास किया।
मुझे उम्मीद हैं कि आप ���वं आपकी पार्टी केंद्र और राज्य सरकार के वन क्षेत्र वन्य जीव प्रकृति की धरोहर आदि को बचाकर संवर्धन के लिए प्रयास करेंगे और आप भी राजस्थान फॉरेस्ट एक्ट, 1953 फॉरेस्ट वाइल्डलाइफ प्रोटक्शन एक्ट 1972 फारेस्ट कंजर्वेशन एक्ट, 1980 पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 सेंट्रल फॉरेस्ट पॉलिसी, 1988 राज्य फॉरेस्ट पॉलिसी आदि का अध्ययन कर एक्ट की भावना के अनुसार देश की प्रगति में भागीदार बनकर ग्लोबल वार्मिंग को रोकने ��ें सहयोग कर जन प्रतिनिधित्व धर्म को निभाने का प्रयास करेंगे।
@BhajanlalBjp @byadavbjp @Sanjay4India1 @RajGovOfficial @RajCMO @INCRajasthan @BJP4Rajasthan
श्री प्रवीण रावल को शिवगंज ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद पर नियुक्त होने पर बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष गोविंद सिंह जी डोटासरा का आभार।
@GovindDotasra@INCRajasthan
गौतम ऋषि मंदिर सड़क का 17 अगस्त 2023 को लोकार्पण हुआ था!
असामाजिक तत्व द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री @ashokgehlot51 जी एवं पूर्व विधायक @SanyamLodha66 जी के नाम की लोकार्पण शिलालेख पट्टीका को तोड़ा गया है!
प्रशासन से निवेदन है कि पट्टिका को ठीक करवायें व उचित कार्यवाही करें!
करोड़ो लोगों के जीवन के प्रेरक रहे पूर्व मुख्यमंत्री अशोक जी गहलोत को जन्मदिन की ���ेरों बधाई एवं शुभकामनाएं।
ईश्वर से प्रार्थना यही हैं कि आपका जीवन हमेशा खुशियों से भरा रहे।
@ashokgehlot51 @INCRajasthan
संविधान में वर्णित अनुच्छेद और विद्यमान कानून का पालन हर सरकार को करना होगा।
नवंबर 2024 में अपना कार्यालय पूरा कर चुकी 55 नगरपालिकाओं के राज्य सरकार द्वारा चुनाव नहीं करवाने के मामले में मेरे द्वारा राजस्थान उच्च न्यायालय में प्रस्तुत जनहित याचिका पर ���ुनवाई करते हुए न्यायाधीश श्री चंद्र शेखर एवं श्री आनंद शर्मा की खंडपीठ ने राज्य सरकार व राज्य निर्वाचन आयोग को चार सप्ताह में जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
@kharge @RahulGandhi @kcvenugopalmp @DrAMSinghvi @ashokgehlot51 @GovindDotasra @TikaRamJullyINC @INCRajasthan @INCIndia
जनप्रतिनिधित्व के विरुद्ध प्रशासकीय कुर्सियां : संविधान की अनदेखी पर संयम लोढ़ा का प्रहार
— जब लोकतंत्र को चुपचाप किनारे किया जा रहा हो, तब कानून की आवाज़ बुलंद करना ही सच्चा राष्ट्रधर्म है।
राजस्थान में 55 नगरपालिकाओं का कार्यकाल 25 नवंबर 2024 को समाप्त हो चुका है। लेकिन, समय रहते चुनाव न कराकर सरकार ने इनमें प्रशासक नियुक्त कर दिए—यह निर्णय प्रशासनिक सुविधा के पक्ष में लिया गया प्रतीत होता है, किंतु विधिक दृष्टिकोण से यह सीधा-सीधा संविधान के अनुच्छेद 243(U) और नगर पालिका अधिनियम, 2009 की धारा 11 व 7 का उल्लंघन है, जैसा कि लोढ़ा बताते हैं।
इस पूरे प्रकरण में राजस्थान में लोकतांत्रिक चेतना के एक दुर्लभ प्रहरी थोड़े से ही हैं। राजनीतिक दल सत्ता में आने के बाद अपनी तरह से करते हैं। ऐसे में प्रतिपक्ष के लोगों की सजगता ही लोकतंत्र को बचाती है�� इस मामले में कांग्रेस का रिक��र्ड बहुत ही ख़राब है, लेकिन भाजपा जहाँ भी प्रतिपक्ष में रहती है, वह अपनी भूमिका को कांग्रेस के नेताओं से कहीं अधिक अच्छे से निभाती है। ऐसे में काँग्रेस के पास कम ही लोग ऐसे हैं, जो निरंतर सक्रिय रहते और ज़रूरी हस्तक्षेप करते हैं।
कांग्रेस की मुख्य लीडरशिप आम तौर पर ट्विटर योद्धा है। ऐसे में अभी का निर्भीक बलशाली एक हनुमान है, जो लंका में अपनी आग लगी पूंछ लिए गदा घुमाता रहता है और उससे सब डरते ���ी हैं। एक किरोड़ीलाल मीणा है, जो बालि की तरह दूसरों के सांस आधे कर देता है।
इन हालात में कांग्रेस के पास जो गिनती के लोग हैं, उनमें संयम ही ऐसे हैं, जो सियासी मुद्दों के आने पर अपने संयम को तोड़कर लड़ने का साहस दिखाते हैं।—कांग्रेस के वरिष्ठ नेता संयम लोढ़ा—ने जिस तरह से हस्तक्षेप किया है, वह केवल एक राजनीतिक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि संविधान की आत्मा से उठी एक सटीक विधिक प्रतिध्वनि है।
अनुच्छेद 243(U)(1) यह अनिवार्य बनाता है कि किसी भी नगर निकाय का कार्यकाल समाप्त होने से पूर्व ही चुनाव कराए जाएं। नगर पालिका अधिनियम की धारा 11(2)(i) और धारा 7 में भी यह प्रावधान दोहराया गया है। इसके बावजूद, यदि चुनावों को टालकर प्रशासक बैठाए जाते हैं तो यह जनप्रतिनिधि प्रणाली का अपमान और विधिक मर्यादा का हनन है।
संयम लोढ़ा ने न केवल इस संवैधानिक चूक की ओर ध्यान दिलाया, बल्कि यह ���ी बताया कि सरकार ने बिना किसी बाध्यता के चुनाव नहीं कराए और जनप्रतिनिधित्वविहीन तंत्र को बढ़ावा दिया। उनकी याचिका पर राजस्थान उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार व राज्य निर्वाचन आयोग को चार सप्ताह में जवाब देने का आदेश दिया—यह भी संकेत है कि न्यायपालिका इस विषय को हल्के में नहीं ले रही।
संयम लोढ़ा राजस्थान के उन गिने-चुने विधायकों में हैं जो केवल राजनीति नहीं, बल्कि विधिशास्त्र को भी गहराई स��� जानते हैं और सार्वजनिक हित में उसका प्रखर उपयोग करते हैं। वे लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की तकनीकी गहराइयों को न केवल समझते हैं, बल्कि जब ��े कहीं त्रुटिपूर्ण होती हैं, तो पूरे आत्मविश्वास के साथ उन्हें सार्वजनिक करते हैं—चाहे वह अदालत हो या विधानसभा।
राज्य सरकार ने 25 नवंबर 2024 को कार्यकाल समाप्त होने वाले निकायों में चुनाव टालते हुए प्रशासक नियुक्त कर दिए। यह निर्णय उन लाखों नागरिकों के मताधिकार का मूक अपहरण है, जिन्होंने अपने स्थानीय प्रतिनिधियों को चुना था। अब उनके शहरों की नीतियां ऐसे अधिकारी बना रहे हैं, जिन्हें जनता ने चुना नहीं, और जो जनता के प्रति जवाबदेह नहीं हैं।
यह केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि लोकतंत्र के मूलभूत ढांचे को दरकिनार करने की प्रवृत्ति है। और इसी प्रवृत्ति का विरोध करने वाले संयम लोढ़ा जैसे नेता ही आज की लोकतांत्रिक राजनीति की रीढ़ हैं।
विधिशक्ति बनाम कार्यपालिका की सुविधा
यदि चुनावों को सुविधानुसार टाला जा सकता है और प्रतिनिधित्वविहीन तंत्र को बिना बाधा के चलाया जा सकता है तो ��ंविधान केवल कागज बन जाएगा और उसकी आत्मा केवल अदालतों में बंद फाइलों में सिसकती रहेगी।
संयम लोढ़ा ने इस मसले को उठाकर यह सिद्ध किया है कि लोकतंत्र को जीव��त बनाए रखने के लिए केवल सत्ता नहीं, संविधान का गहरा बोध और विधिक साहस भी चाहिए। वे ना केवल एक सजग विधायक हैं, बल्कि एक सजग संविधानप्रहरी भी हैं।
जब संवैधानिक व्यवस्था को कमजोर करने के प्रयास हों, तब न्यायपालिका और राजनीति दोनों से ऐसी ही हस्तक्षेपकारी आवाज़ों की आवश्यकता है। लोढ़ा ने यह दिखाया है कि लोकतंत्र को बचाने के लिए सिर्फ जुलूस और नारे नहीं, धारदार संवैधानिक तर्क और विधिक हस्तक्ष��प भी जरूरी हैं। राजस्थान को उनके जैसे विधिवेत्ताओं की उपस्थिति पर गर्व होना चाहिए।
@SanyamLodha66 #HanumanBeniwal #KirodiLalMeena #Congress #RajasthanPolitics
राजस्थान विधानसभा में भरतपुर से माननीय विधायक डॉ सुभाष गर्ग के ख़िलाफ़ सरकारी मुख्य सचेतक श्री जो���ेश्वर गर्ग के द्वारा विशेषाधिकार हनन प्रस्त���व लाना और माननीय अध्यक्ष के द्वारा इसकी अनुमति देना अपने आप में बेहद चकित करने वाला निर्णय हैं। गर्ग और देवनानी जी दोनों ही सदन के वरिष्ठ सदस्य हैं, वो बताए की सदन में सदस्य के बोलने पर ऐसा इन्होंने अपने विधायक कार्यकाल में कभी राजस्थान विधानसभा में देखा हो।
जिस तरह की गतिविधियां विधानसभा में हो रही हैं वो नियमों से परे हैं, संवैधानिक प्रावधानों के विपरित हैं बल्कि सदन की गौरवशाली परम्पर��� को धूमिल करने वाली हैं। सदन में माननीय विधायक द्वारा दिए गए वक्तव्य को संविधान के अनुच्छेद 212 का संरक्षण प्राप्त हैं।
1964 में तत्कालीन मुख्यमंत्री के एक वक्तव्य में तथ्यात्मक त्रुटि को लेकर भेरूसिंह जी शेखावत ने विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया था लेकिन तब भी स्पीकर ने उसे निरस्त कर दिया था।
राजस्थान के इस सर्वोच्च सदन की मर्यादा, परपंरा दिन प्रतिदिन धूमिल हो रही हैं और विधानसभा के माननीय अध्यक्ष को अपने पद की गरिमा को समझते हुए कोई भी निर्णय करने चाहिए, जल्दबाज��� और भावुकता के आधार पर नहीं।
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आदरणीय अग्रवाल जी, प्रधानमंत्री @narendramodi जी एवं @JPNadda जी की जोड़ी भाजपा में कार्यकर्ता को मौका देने के नाम पर कठपुतली मुख्यमंत्री नामित करने के लिए याद की जाएगी।
मंडल अध्यक्ष एवं जिला अध्यक्ष के चुनाव में संगठन पर्व के नाम से आवेदन लेने का पाखंड तो आपने खूब किया, लेकिन मुख्यमंत्री एवं प्रदेश अध्यक्ष के लिए यह प्रक्रिया भाजपा क्यों भूल जाती हैं ?
कठपुतली ���ुख्यमंत्रियों से जनता की ताकत कमजोर हुई हैं और जनता का, जनता के लिए, जनता के द्वारा शासन का मूल मंत्र दम तोड़ रहा हैं। मोहन भागवत जी ने पिछले दिनों कहा था कि मेरी जगह सर संघचालक वही बनेगा जिसका नाम मैं तय करूंगा और भाजपा की राज्य सरकारों में वो काम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी कर रहे हैं। हम चाहेंगे कि हमारी विरोधी भाजपा में प्रजातांत्रिक मूल्य जीवित रहें।
@RahulGandhi @kcvenugopalmp @priyankagandhi @kharge @SupriyaShrinate @ashokgehlot51
@GovindDotasra @TikaRamJullyINC
@INCIndia @INCRajasthan @BJP4Rajasthan
@SanyamLodha66@narendramodi@JPNadda@BJP4Rajasthan प्रभारी जी आप मर्यादा की बात ना करो तो ही अच्छा है
@SanyamLodha66 जी ने तो चाय की पर्ची काटने वाला ही कहां है लेकिन आपतो इतने नीचे ��िर गए थे कि @ashokgehlot51 जी के कपाल क्रिया तक की बक लोली कर चुके हों
और इतना ही दम हैं तो मेरा ब्लॉक हटा दो जवाब अच्छा मिलेगा..