झामुमो-कांग्रेस सरकार ने झारखंड के लाखों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का अक्षम्य अपराध किया है।
JPSC और JSSC घोटाले में झारखंड के मुख्यमंत्री कब इस्तीफा देंगे ❓
JPSC और JSSC में हुए महाघोटाले के बाद, इन आयोगों के अध्यक्षों एवं संबंधित पदाधिकारियों की नियुक्ति के लिए जवाबदेह मुख्यमंत्री झारखंड नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तत्काल इस्तीफा दें!
युवा जागेगा, तभी व्यवस्था बदलेगी
न्याय नहीं, तो संघर्ष जारी रहेगी
अन्याय और भ्रष्टाचार के विरुद्ध #JPSC – #JSSC भ्रष्टाचार मुक्त भर्ती अभियान" का शुभारंभ किया जा रहा है।
आंदोलन का प्रथम चरण : अनिश्चितकालीन सत्याग्रह
बापू वाटिका 📍 मोराबादी , रांची में जारी है ।
झारखंड के युवाओं की कम से कम ये मांग होनी चाहिए, इससे कम कुछ नहीं
1. हेमंत सोरेन का इस्तीफा हो।
पिछले 6 साल में JPSC और JSSC के माध्यम से कोई ऐसी परीक्षा नहीं हुई है जिसपर कोई सवाल न उठा हो। किसी में पेपर लीक हुआ तो किसी में सीधा सीट बेचा गया।
2. JSSC CGL में चयनित 2000+ नियुक्ति रद्द हो, फिर से परीक्षा हो
या
कैबिनेट से CBI जांच का आदेश हो और तब तक CGL स्तर का 2000 नया वैकेंसी दिया जाए
3. हर विज्ञापन में यह लिखकर दिया जाए कि कब एडमिट कार्ड आएगा, कब परीक्षा होगा, कब रिजल्ट निकलेगा और कब नियुक्ति मिलेगा। (बैंक एग्जाम की तरह)
4. उत्पाद सिपाही भर्ती में दौड़ के कारण 15+ युवाओं की मृत्यु हुई है, उन्हें कम से कम एक करोड़ मुआवजा दिया जाए।
JPSC घोटाले का तार JSSC तक पहुंच गया है इसीलिए "JPSC- JSSC भ्रष्टाचार मुक्त भर्ती अभियान शुरू प्रथम चरण के आंदोलन "अनिश्चितकालीन सत्याग्रह" आज दिनाँक 25/07/2026 , समय- 11:00 बजे दिन मोरहाबादी रांची से शुरू, ज्यादा से ज्यादा संख्या में छात्र पहुँचें । छात्रों द्वारा आहूत आंदोलन को पूर्ण रूप से समर्थन करता हूँ।
@JharkhandCMO@Tigerjairam
झारखंड में JPSC और JSSC की पिछली कुछ परीक्षाओं को लेकर लगातार गंभीर सवाल उठते रहे हैं। विभिन्न म��ध्यमों से यह दावा सामने आया है कि इन परीक्षाओं में 100 करोड़ रुपये से अधिक के लेनदेन कर नौकरियां बेचे जाने का संगठित खेल हुआ। यदि इन आरोपों में तनिक भी सच्चाई है, तो यह केवल परीक्षा में अनियमितता का मामला नहीं बल्कि झारखंड के लाखों युवाओं के भविष्य और राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था पर सबसे बड़ा हमला है।
शक इसलिए भी गहराता है क्योंकि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के करीबी माने जाने वाले विनोद सिंह के यहां से कई अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड मिलने की बात सार्वजनिक रूप से सामने आई थी। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि उन एडमिट कार्डों का उद्देश्य क्या था? वे वहां कैसे पहुंचे? क्या इस पूरे मामले की निष्पक्ष, वैज्ञानिक और स्वतंत्र जांच कभी हुई? यदि हुई तो उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की गई?
इसी प्रकार यह भी गंभीर प्रश्न है कि जिस ब्लैकलिस्टेड कंपनी को झारखंड में परीक्षा आयोजित करने की जि���्मेदारी दी गई, उसी कंपनी का मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी बाद में अधिकारी बन गया। उसके सगे-संबंधियों के भी अधिकारी बनने की बातें सामने आईं। इतना ही नहीं, इसी कंपनी के खर्च पर आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष के विदेश दौरे की चर्चाएं भी सार्वजनिक हुईं। यदि ये तथ्य सही हैं तो यह जानना आवश्यक है कि यह सब केवल संयोग था या फिर एक सुनियोजित नेटवर्क के तहत ��ूरी प्रक्रिया संचालित की गई।
जिस प्रकार राज्य में अवैध खनन, शराब घोटाले, ट्रांसफर-पोस्टिंग और जमीन कारोबार को लेकर विभिन्न व्यक्तियों की भूमिकाओं को लेकर लगातार राजनीतिक आरोप लगते रहे हैं, उसी प्रकार यह प्रश्न भी उठ रहा है कि क्या JPSC और JSSC में नौकरी बेचने के इस कथित नेटवर्क का संचालन भी आयोग के तत्कालीन अध्यक्षों सुधीर गुप्ता और खंग्याते के माध्यम से किया गया? यह एक गंभीर आरोप है और इसका उत्तर केवल निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच से ही सामने आ सकता है।
वर्तमान में CID और ACB द्वारा की जा रही जांच को लेकर भी अनेक सवाल उठ रहे हैं। अब तक की कार्रवाई में ऐसा प्रतीत होता है कि छोटे स्तर के लोगों पर कार्रवाई कर बड़े और प्रभावशाली लोगों तक जांच पहुंचने से पहले ही उसे सीमित कर दिया जाता है। यदि JPSC और JSSC में वास्तव में व्यापक अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं, तो केवल इस्तीफा लेकर या कुछ निचले स्तर के लोगों पर कार्रवाई कर पूरे मामले को समाप्त करने का प्रयास नहीं होना चाहिए। पूर्व अध्यक्षों सहित जिस किसी की भी भूमिका रही हो, उसकी निष्पक्ष, समयबद्ध और कानून के अनुरूप जांच होनी चाहिए।
इसी बीच यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि CID की वर्तमान कार्रवाई का उद्देश्य वास्तविक दोषियों तक पहुंचना नहीं, बल्कि कथित घोटालेबाजों के पास मौजूद डिजिटल साक्ष्यों को अपने कब्जे में लेकर उन्हें निष्प्रभावी या नष्ट करना हो सकता है, ताकि भविष्य में यदि कोई केंद्रीय एजेंसी—जैसे CBI या ED—इस मामले की जांच करे, तो उसके पास बड़े आरोपियों तक पहुंचने के पर्याप्त प्रमाण उपलब्ध न रहें। यदि ऐसे आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है, तो सरकार और जांच एजेंसियों को स्वयं आगे आकर पारदर्शिता के साथ इन आशंकाओं का खंडन करना चाहिए।
यह भी सवाल उठ रहा है कि CID की छापेमारी में क्या-क्या बरामद हुआ, इसकी जानकारी मीडिया से क्यों छिपाई जा रही है? यदि अधिकारियों को वास्तव में यह निर्देश दिया गया है कि छापों से संबंधि�� कोई जानकारी सार्वजनिक न की जाए, तो इससे संदेह और गहरा होना स्वाभाविक है। किसी भी निष्पक्ष जांच में आवश्यक गोपनीयता और जनता के जानने के अधिकार के बीच संतुलन होना चाहिए। जांच की प्रगति और बरामद साक्ष्यों के बारे में उचित समय पर आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक करना सरकार और जांच एजेंसियों की जिम्मेदारी है।
झारखंड के लाखों बेरोजगार युवाओं ने वर्षों तक कठिन परिश्रम कर इन परीक्षाओं की तैयारी की है। यदि उनकी मेहनत, योग्यता और सपनों की कीमत भ्रष्टाचार के बाजार में तय की गई, तो यह केवल एक वित्तीय घोटाला नहीं बल्कि युवाओं के विश्वास, संविधान में निहित समान अवसर के अधिकार और लोकतांत्रिक व्यवस्था के साथ विश्वासघात है।
इसलिए आवश्यकता केवल औपचारिक जांच की नहीं, बल्कि ऐसी स्वतंत्र, निष्पक्ष और विश्वसनीय जांच की है जो किसी भी राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव से मुक्त हो। जांच का दायरा इतना व्यापक होना चाहिए कि परीक्षा आयोजन से लेकर प्रश्नपत्र निर्माण, अभ्यर्थियों के चयन, डिजिटल रिकॉर्ड, वित्तीय लेनदेन, संबंधित अधिकारियों, बिचौलियों तथा कथित लाभार्थियों तक हर कड़ी की जांच हो।
झारखंड के युवा पूछ रहे हैं कि JPSC और JSSC परीक्षा में हुए घोटाले की जिम्मेदारी लेते हुए शिक्षा मंत्री और राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपना इस्तीफा कब देंगे?
>झारखंड के बच्चों का जीवन खराब करने वाले
>उनको नौकरी का चूर्ण देने वाले
>एक भी परीक्षा ठीक से न करवा पाने वाले
>भर्तियों में अपने लोगों को लाभ देने वाले
@HemantSorenJMM कब इस्तीफा दोगे और कब इस्तीफा लोगे?
झारखंड के हर ईमानदार छात्र को कमिशन के बाहर बैठ कर धरना देना चाहिए,
क्योंकि भाजपा साथ देगी नहीं, कॉंग्रेस और अन्य पार्टियाँ कभी बोलेंगी नहीं, अगर अपना हित चाहते हो तो निष्पक्ष जाँच, शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मांगों ,
मैं लिख के देता हूँ इस देश का भांड और बिका हुआ मी���िया तुम्हारा साथ नहीं ��ेगा, आवाज उठाने से कुछ नहीं होगा, अपने हक की लड़ाई लड़ने जाओ।
Delhi Police Constable Exam में हुई
घांधली अब बर्दाश्त नहीं ❌
ईमानदार मेहनत करने वाले युवाओं के साथ अन्याय हुआ है।
पूरी जांच होनी चाहिए।
#Delhi_Police_Scam@SSC_GOI@DoPTGoI
दिल्ली पुलिस परीक्षा 2025 में हुई गड़बड़ियां केवल एक परीक्षा का मुद्दा नहीं हैं, बल्कि लाखों मेहनती युवाओं के सपनों पर चोट हैं।
जब तक निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय नहीं होती, यह लड़ाई रुकेगी नहीं।
युवाओं के भविष्य से खिलव��ड़ बंद होना चाहिए।
@DoPTGoI @SSC_GoI
#Delhi_Police_Scam
JSSC -CGL का रिजल्ट होगा जारी.. JSSCCGL पेपर लीक मामले की जांच CBI से कराने की मांग के लिए दायर याचिका प��� हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है।
बुधवार को हाईकोर्ट ने इस याचिका को खारिज करते हुए जेएसएससी को रिजल्ट जारी करने का निर्देश दिया है।
10 छात्र की रिजल्ट को रोक कर बाकी को जारी करने का मतलब है 10 लोग ने चोरी किया है?
हाई कोर्ट को पूरी रिजल्ट खारिज करना चाहिए था। ये बहुत ही गलत डिसीजन है । जब छात्र मांग कर रहे है CBI जॉच की तो PIL खारिज क्यो?
#jssc
यह बेहद दुःखद है कि झारखंड में छात्र स्कॉलरशिप न मिलने के कारण अपनी फीस भरने के लिए मजबूरी में मजदूरी कर रहे हैं। किसी को बारातों में रोड लाइट ढोनी पड़ रही है, तो कोई शादी समारोहों में खाना परोस कर अपनी पढ़ाई जारी रखने की कोशिश कर रहा है।
जिन हाथों में किताबें होनी चाहिए थीं, वे मेहनत-मजदूरी के बोझ तल��� दबते जा रहे हैं। आखिर कहां मर गई है सरकार की संवेदना?
@BJP4India @narendramodi @JPNadda @AmitShah @blsanthosh @BJP4Jharkhand