आज पूरे देश में BJP ने अघोषित इमरजेंसी लगा रखी है।
आज के अखबार में खबर छपी है कि जंतर-मंतर पर कोई भी प्रोटेस्ट करना है, तो कम से कम 10 दिन पहले आवेदन देना होगा।
⦿ अगर आज किसी के साथ अमानवीय अत्याचार हो जाए, किसी की हत्या हो जाए या लोकतंत्र के ऊपर हमला कर दिया जाए, तो क्या जनता अपनी आवाज उठाने के लिए 10 दिन तक इंतजार करेगी?
⦿ क्या एक आजाद देश में अपने Fundamental Rights का इस्तेमाल करने के लिए भी सरकार से 10 दिन पहले इजाजत मांगनी पड़ेगी?
भारत का संविधान हमें शांतिपूर्ण तरीके से धरना-प्रदर्शन करने और सरकार पर दबाव बनाने का अधिकार देता है।
BJP देश की जांच एजेंसियों और चुनाव आयोग का इस्तेमाल लोकत��त्र की हत्या में कर रही है। बीते दो दिनों में दिल्ली पुलिस ने देश के नेता विपक्ष श्री राहुल गांधी के साथ जैसा व्यवहार किया है- वह शर्मनाक है।
: यूपी कांग्रेस प्रभारी @AdvRajendraPal जी
📍 दिल्ली
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे विरोध के बीच विपक्षी INDIA ब्लॉक के सांसद आज संसद से चुनाव आयोग मुख्यालय तक मार्च कर रहे हैं।
विपक्ष लगातार मांग कर रहा है कि SIR, मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और आयोग के भीतर ज्ञानेश कुमार द्वारा कथित मनमाने फैसले लिए जाने के आरोपों पर कार्रवाई हो।
प्रधानमंत्री मोदी जी, आपकी कथनी आपकी करनी से मेल नहीं खाती। Gen Z आपका असली चेहरा पहचान चुका है। आपकी विदाई भी जल्द तय है। उल्टी-गिनती सुन��ा शुरू कर दीजिए।
इतना बड़ा Health Budget, इतने अधिकारी, Drug Inspectors, Regulatory Mechanism और पूरा स्वास्थ्य विभाग होने के बावजूद दवाइयों की कीमतों में इतना बड़ा अंतर कैसे आया?
मरीज दवाई खरीदे या अपनी बीमारी का इलाज कराए?
साहब कहते थे “न खाऊँगा, न खाने दूँगा।”
हमें क्या पता था कि बात दवाई की हो रही है मरीज न दवाई खा पाएगा, न महंगी दवाई खरीद पाएगा।
मजबूरी में खरीदेगा तो शायद जमीन, घर या जमा-पूंजी तक बेचनी पड़े और बेचनी पड़ती ही ह
सवाल ये है इस पूरे खेल में कमा कौन रहा है और मरीज को राहत कब मिलेगी?
और ये हालत किसी एक राज्य की नहीं है !
स्वास्थ्य विभाग बताए कि अब तक कितनी कार्रवाई हुई? कितनों पर कार्रवाई हुई? और अगर ये समस्या आज की नहीं, लंबे समय से चल रही थी तो इतने सालों तक निगरानी कहाँ थी?
@JPNadda जी बोलो सब चंगा सी 😤
बात-बात पे पूछते हैं- 2014 से पहले क्या होता था?
अरे भाई, भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन होते थे। सत्ता में बैठे लोगों पर भी आरोप लगते थे तो गिरफ्तारी होती थी। ए. राजा और कनिमोई जेल गए थे, जबकि उनकी पार्टी सरकार का हिस्सा थी।
आज अपनी सरकार के लोगों पर आरोप लगें तो जाँच और ज���ाबदेही माँगकर देख लो। सवाल पूछने वाले से ही पूछने लगते हैं- 2014 से पहले क्या होता था!
भाई, उसी भ्रष्टाचार को खत्म करने के नाम पर तो वोट लिया था। अब उसी का ��दाहरण देकर अपने लिए छूट क्यों माँगते हो?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने ऐसा कानून पास कराया है जिसमें भारत निर्वाचन आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त एवं चुनाव आयुक्त को जीवन में कभी भी (पद पर रहते अथवा पद से हटने के बाद) जेल नहीं हो सकती, उसे आख़िरी साँस तक गिरफ्तार भी नहीं किया जा सकता, पूछताछ भी नहीं हो सकती।
यह विशेषाधिकार तो पद से हटने के बाद देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और जज के पास भी नहीं है लेकिन मोदी-शाह ने चुनाव आयुक्त के लिए यह खास क़ानून बनवाया क्योंकि उसी से चुनाव में चोरी, डकैती, धांधली और ठगी करवानी है। EVM में हेरफेर कर ईवीएम बदलवाना और जलवाना है। मतदान के दिन सरकारी खजाना लुटवाना है। विपक्षियों के नाम कटवाने और भाजपाइयों के फ़र्जी वोटर जुड़वाने है।
ये लोग लोकतंत्र के कसाई है। बाबा साहेब अंबेडकर द्वारा निर्मित संविधान के हत्यारे है।