I don't believe in a theory that 'belonging to a particular group is required to be the voice of people'. This is bogus in a democracy. Be the person who can collectively lead everyone and then no one will ask you which particular group you belong. Jai Hind 🇮🇳
कांग्रेस ने 1896 में वंदे मातरम पूरा गाया. हर सम्मेलन में गाया गया. सबने गाया. इस बीच आधा दर्जन मुस्लिम कांग्रेस अध्यक्ष आए. हर रिलीजन के अध्यक्ष बने. गांधी भी अध्यक्ष बने. गीत पर कोई विवाद नहीं.
वंदे मातरम की छंटाई 1937 में हुई.
कौन था उस समय कांग्रेस अध्यक्ष?
बताइए.
@sunnysingh_001@SupriyaShrinate कुल मूल प्रश्न ये है कि तब क्यों ऐसा करना पड़ा था? जवाब है कि तब मुस्ल��म लीग को साथ रखना था क्योंकि आजादी का आंदोलन था तो कोई बिखराव नहीं चाहिए था। लेकिन मुस्लिम लीग को तो नया देश मिल गया। तो क्या अब भी आप उन्हीं को खुश करने के लिए अपने मन से तय करेंगे? वंदे मातरम
जब आपतकाल थोप क��� लोकतंत्र की हत्या हुई,गरीब लोगों की जबरन नसबंदी हुई,1984 में पॉलिटिकल पर्जिंग अभियान चला; तब इन महापुरुषों के मूल्य कहां थे?
@SupriyaShrinate जी इसलिए भारत के महापुरुषों के नाम आप तो मत ही गिनवाइए.
जिन्ना चले गए लेकिन उनका भूत अब तक कांग्रेस को सता रहा है.
कांग्रेस की मीटिंगों में पारित प्रस्तावों से देश नहीं चलेगा। देश चलेगा संविधान से।
1937 में कांग्रेस की CWC मीटिंग में मुस्लिम तुष्टिकरण के चलते ये प्रस्ताव पारित हुआ कि वंदे मातरम् के दो पद ही गाये जाएँगे।
वंदे मातरम् राष्ट्र की नव चेतना का मंत्र था जिसे कांग्रेस ने खंडित किया। वंदे मातरम् का मंत्र खंडित हुआ तो देश को खंडित होने में समय नहीं लगा।
इस बार कांग्रेस को वंदे मातरम् गीत को खंडित नहीं करने देंगे।
#WATCH | Ranchi, Jharkhand: JPSC-JSSC aspirants sing and dance as they celebrate after the state government accepted their demands. The JSSC CGL exam and all exams conducted by TDPL have been cancelled.
#WATCH | Raipur, Chhattisgarh: Former women Naxals, who once carried weapons in the dense forests of Bastar, walked the ramp to huge applause at a National Handloom Day event in Raipur after joining the mainstream. (07.08)
नसीरुद्दीन शाह सुध-बुध खो बैठे हैं क्या? राँची में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर उनकी कोई पीड़ा, ग़ुस्सा नहीं दिखा? बेसुध पड़े होंगे कहीं, वरना जरूर बोलते
सोचिए अगर जंतर-मंतर पर लाइट काट दी जाती, जनरेटर हटा दिया जाता, तो देश में किस तरह का हल्ला मचाया जाता? लेकिन रांची में ये सब किया जा रहा है. लाइट काट दी गई है, जनरेटर के तार निकाल दिए गए हैं, और साथ ही खाना भी रोका जा रहा है. लेकिन जंतर-मंतर पर हल्ला मचाने वाला इकोसिस्टम पूरी तरह खामोश है, क्यों?
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झारखंड पुलिस ने छात्रों पर लाठी चार्ज किया।
अगर यही दिल्ली पुलिस होती तो आज राहुल गांधी से लेकर अरविंद केजरीवाल सब चिल्ला रहे होते।
क्योकि झारखंड मे��� सोरेन की सरकार है इसलिए सब शतुरमुर्ग बने हुए है।