>Cutie Muskan was a model.
>Cutie was liberal minded and didn’t believe that dating a MuZlim meant betraying her religion.
>Cutie used to abuse the Bajrang Dal online.
>Cutie used to call RW men misogynists and brain d€ad.
>Cutie befriended Imran at the gym. After spending 1.5 years with him and being treated like a s|ave, she thought, He’s just another guy, I’ll ditch him and marry a Hindu guy now.
Imran Bhai stabb€d her to d€ath. 😭😭
मैंने तो पहले ही कहा था दुबे जी को पैराशूट से उतारा ही इसी लिए गया था। ये लुक्का-छिपी राजनीति अब काम नहीं आएगी, दरार चौड़ी हो रही है, और ये बैंड-एड लगा कर छुपाना चाह रहे हैं।
बता दें कि जिन हर्ष दुबे से नड्डा जी मिले हैं उनके डिमांड हैं:
"सभी छात्रों में बौद्धिक क्षमता का समान विकास हो, नए अवसर मिलें"
तो अब नड्डा जी नई दवा का रिसर्च करवाएंगे जिससे लोगों का बौध्दिक विकास होगा और शायद नई दवा कम्पनी भी बनेगी, जिससे नए अवसर भी मिलेंगे!😂
वैसे हर्ष दुबे तो कल कह रहा था कि मुझे किडनैप कर लिया था!
तो आज की मीटिंग को क्या समझें?
अगर सरकार सोच रही है कि एक व्यक्ति को फुसलाकर सवर्ण समाज की पूरी माँगों से बच जाएगी और UP चुनाव तक टालमटोल करती रहेगी, तो यह भ्रम जल्द टूटेगा।
RHA Reforms की माँगें स्पष्ट हैं। जब तक सभी माँगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन किसी भी कीमत पर पीछे नहीं हटेगा।
नवनियुक्त IT सेल ने पिछले दो दिनों में दो योजनाओं का क्रियान्वयन किया है:
1. RW के कुछ लोगों को पैसे दे कर 'टूलकिट', 'धर्म के गद्दार', 'मोदी-योगी को हटाने के षड्यंत्रकर्ता' जैसे शब्दों के साथ RHA के लोगों को परोक्ष रूप से निशाना बनाना
2. भाजपा प्रायोजित हर्ष दूबे और नड्डा जी की मीटिंग की बात पर प्रश्न उठाने वाले वास्तविक लोगों को यह कह कर डिसक्रेडिट करना कि 'इनकी दुकान बंद हो जाएगी'
बात यह है कि दोनों ही नहीं चलने वाले! पुराने स्क्रीनशॉट्स निकाल कर मुझे कर पाए डिसक्रेडिट? सात महीने से %₹ घिस लिए, मेरी #@ उखाड़ पाए तुम सब मिल कर? तुम्हें सच में लगता है कि हर्ष दुबे ने यह सब खड़ा किया है? दो लाइन बोल पता है आरक्षण पर ठीक से? उसे तुमने ही प्लांट किया, तुम ही समझौते कर रहे हो।
और हास्यास्पद बात यह है कि ये सब बकलोली करते हुए हम पर ही आक्षेप कि हमारी दुकान बंद हो जाएगी। ठीक है, तुम खेलो मीटिंग-मीटिंग, देखते हैं कहाँ पहुँचते हो इस ग़ज़ब की तकनीक से, जो इतनी बात प्रयुक्त हो चुकी हैं कि अब आश्चर्य भी नहीं होता।
वहां इकट्ठा हुए समाज के मर्दों से निवेदन है कि इस पुलिस वाले को पहचान कर वहीं नं#@गा करके गेंद में बांस डालकर हलक से निकाल दें केंद्र सरकार तो वैसे ही बढ़ावा दे रही है सवर्णों की बहन बेटियों से बदतमीजी करवाने में।
और कितनी मुस्कान निगलेंगे मुल्ला ?
ज़िम और जिम ट्रेनर्स पर गाइडलाइन्स क्यों नहीं बना देते आप @gupta_rekha@KanoongoPriyank कहाँ है हमारे मानवाधिकार ?
हिन्दुओं ये चुप्पी बहुत भारी पड़ेगी याद रखना
कृपया मुझे इस बात पर भावनात्मक ब्लैकमेल न करें कि मोदी जाएगा तो राहुल आ जाएगा, योगी जाएगा तो अखिलेश आ जाएगा। इस दोनों परिस्थिति की चिंता भाजपा को करनी चाहिए कि इनके आने से इनका क्या होगा। इन नेताओं और पार्टी पर ऐसे लोग कैसे-कैसे प्रतिबंध डालेंगे।
मैं इन बातों का लोड नहीं लेता क्योंकि मेरे लोड लेने, या ना लेने, से कोई अंतर नहीं पड़ता। मैं सामान्य वर्ग के अधिकारों के लिए लड़ता रहूँगा। कल को कोई ऐसी पार्टी आई जो, आप जैसा कह रहे हैं की बदतर बना देगी, तो उस से सड़कों पर निपट लेंगे। उनको वैसे भी सड़कों की क्रांति पर ऑर्गैज़म आ जाता है।
आपसे तो केवल शब्दों से लड़ रहे हैं। यदि किसी को यह भ्रम है कि सवर्णों का रक्त रंगहीन जल बन चुका है, और उस से वीरता का वाष्पीकरण हो चुका है, तो हम वहीं हैं जिन्होंने लहू से सने जनेऊ मनों में तुलवाया था धर्म रक्षा हेतु। हम वही हैं जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में फाँसियाँ झेलीं। हम वही हैं जो अंग्रेजों के विरोध में बिगुल फेंका। और हम वही हैं जिन्होंने मुगलों के होते हुए भी धर्म की रक्षा की।
जो लोग शब्दों से समझ सकते हैं वो समझें। हम बिकाऊ राजनेताओं के राजनैतिक समीकरणों के वेरिएबल्स नहीं हैं कि जब इच्छा हुई, जो मन में आया वो कर लिया। हमने आशा दिखाई कि आपके पास विज़न है, और आप 'विकसित भारत' के नाम पर एक जातिवादी समाज देश पर थोप रहे हो जहाँ प्रतिभा को आगे बढ़ने के लिए हर मार्ग पर आपने गड्ढे बना रखे हैं!
अतः, यह धर्म की लड़ाई है, समाज की लड़ाई है और देश की लड़ाई है। प्रतिभा को कूड़ेदान में रखने वाला राष्ट्र कभी भी विकसित नहीं हो सकता। ऐसे राष्ट्र में रेवड़ियाँ बाँटी जाती रहेंगी और वह अंततः वेनेजुएला बन जाएगा। इसलिए, समय रहते या तो हम इनसे तंत्र को ठीक करवाएँगे या अपने जीवन की परवाह किए बिना इस समर में कूदेंगे।
मैं नेता नहीं हूँ। मैं कुछ भी नहीं हूँ। मैं कल को रहूँ या ना रहूँ, यह विषय ही समाज का नेतृत्व करेगा। और जब समाज का हर व्यक्ति अपनी चिंता, अपने बच्चों से जोड़ कर करने लगेगा, तब सत्ता को भयाक्रांत होना चाहिए।
मेरी योजना ओपन-सोर्स है। मुझे किसी पुस्तक की आवश्यकता नहीं है। मैं छुप कर अचानक से कुछ नहीं करूँगा। मैं जो करूँगा, मैंने वह कई बार लिखा है और वही करता हूँ। मैं सचेत करने के प्रयास करता हूँ, मैं प्रॉपर चैनलों से आप तक बात भी पहुँचाता हूँ परंतु यदि तुम नहीं मानते, तो मेरा क्या दोष!
संसद में सामान्य वर्ग की बात करने वाला एक भी व्यक्ति क्यों नहीं है? OBC के क्रीमी लेयर और EWS की क्वालिफिकेशन में इतनी असमानताएँ क्यों हैं? सवर्णों के टैक्स के पैसे से SC/ST/OBC की योजनाएँ फाइनेंस होती रहेंगी और हमारे बच्चे लोन के लिए मरते रहें जो उन्हें मिलता नहीं?
उनके पिता ६०% के ब्याज दर पर पैसे ले कर उसे हर महीने भेजते रहें और तुम घनघोर अयोग्य लोगों को कोचिंग दो, फिर मेरिट में छूट दो, फिर वो क्लास में कुछ ना उखाड़ पाए तो आगे PG में फिर से छूट दो, फिर नौकरी में छूट, प्रमोशन में छूट... ये अनंत काल तक चलता रहेगा?
दिस हैज टू बी फकिंग स्टॉप्ड! एंड वी विल नोट कॉम्प्रोमाइज एन इंच नाउ!
जो आइटी सेल या नस फाड़ कर चिल्लाने वाले यूट्यूबर यह कह रहे हैं कि ‘आरक्षण की बात योगी को हराने के लिए की जा रही है’, वो निर्लज्ज कल को नाचेंगे और हम सबका मजाक उड़ाएँगे यदि हमने इस आंदोलन को धीमा किया या रोका, और उसका लाभ भाजपा को मिला।
इन पर विश्वास नहीं करना चाहिए। हमारा उद्देश्य किसी को हराना नहीं है। हम भी चाहते हैं कि योगी जीतें। आरक्षण या यूजीसी का योगी जी से कोई लेना-देना नहीं है। और भाजपा ही सत्ता में है, तो नीतियाँ वही बदलेगी।
पर हाँ, भाजपा और मोदी जी ने आरक्षण में जो-जो प्रावधान किए हैं, वह देशी की बर्बादी की पटकथा है। हम बस पक चुके हैं और हम अपनी बात कहना चाहते हैं। इसका विरोध हम करेंगे और पूरे बल से करेंगे।
मैंने तो फरवरी से सुधारों की पूरी सूची सार्वजनिक रूप से रखी है। केन्द्र द्वारा अनौपचारिक रूप से भेजे गए प्रतिनिधि से भी मैंने बात कर अपनी माँगें रखी। पाँच दिन बीत चुके हैं। हमारी कोई भी माँग ऐसी नहीं है कि किसी भी को समस्या हो सके।
व्हाइट पेपर हो, EWS की बात हो, रैशनलाइजेशन हेतु महादलित जातियों के आरक्षण की बात हो… ऐसा क्या है जो मानने योग्य नहीं है? आप यह कहिए कि आपको चार जातिवादी नेताओं से भय है, जबकि अंबेडकर का नाम ले कर दंगे की धमकी देने वालों के अनुयायी भी आपको वोट नहीं देते।
श्री नेगोशिएशन प्रताप @JPNadda जी,
सादर चरणस्पर्श! अभी आपका यह पोस्ट प्राप्त हुआ और मन आह्लादित हो गया कि सरकार ने आदरणीय हर्ष भाई जी की चिट्ठी पर (जिसमें आरक्षण शब्द ही नहीं था) विचार किया और आप पुनः मिलेंगे। आपसे एक त्रुटि हो गई कि आपने आंदोलन के सबसे बड़े चेहरे श्री आनंद स्वरूप जी को साथ नहीं लिया!
आपने पहले तो (अपने ही द्वारा प्लांटेड) आदरणीय हर्ष भाई को किडनैप करवाया (जैसा कि आदरणीय हर्ष जी ने वीडियो में कहा था), और फिर नीली कलम से दो कौड़ी की डिमांड वाली चिट्ठी लिखवाई, और अब आप सौहार्दपूर्ण वार्ता भी कर रहे हैं।
यह पोस्ट पाते ही @RHAreforms वाले सारे लोग, इंक्लूडिंग @neha_laldas, लिखना छोड़ चुके हैं और उस चिट्ठी का प्रिंट आउट ले कर उत्तर प्रदेश के गाँवों में ड्रोन से गिरा रहे हैं कि सरकार ने हमारी माँगें मान ली!
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यदि सरकार को ऐसा कोई भी भ्रम है तो कोई टेबलेट खा लो। ये पुरानी और सर्वविदित तकनीक है: अपने ही द्वारा प्लांटेड व्यक्ति को नेता मान कर नेगोशिएट करने का स्वाँग रचो, फिर वास्तविक माँगों को डकार जाओ। मैं आपसे वादा करता हूँ कि मुझे आपके साथ बैठना नहीं पड़ेगा और आप हमारी माँगें भी मानोगे।
थोड़ी भी लज्जा बची है और पार्टी की थोड़ी भी चिंता है, तो खेल खेलना बंद करो। लोग ब्रजेश पाठक वाले स्टंट से ही हर्ष को नकार चुके हैं।
"आरक्षण का लालच इतना बुरा है कि उसके लिए सब पिछड़े बनने को तैयार हैं!
और इस मांग के लिए कोई पटरियां उखाड़ रहा है, कोई सरकारी संपत्ति तोड़फोड़ रहा है!
ऐतिहासिक योद्धा रहे मराठा, जमींदार रहे जाट - आज सब आरक्षण की मांग कर रहे हैं!
आरक्षण अब एक race to backwardness बन चुका है!"
We outrightly reject this as BULLSHIT. I don’t want any muslim, in any capacity, in this movement to give fodder to IT Cell calling us Pakistanis. Those MFs have already tried this once. Not this time.